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Ballia News: 3400 करोड़ खर्च होने के बाद भी 30 फीसदी काम अभी अधूरा
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फेफना क्षेत्र के वैना गांव में निर्माणाधीन पानी टंकी।संवाद
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बलिया। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चल रहीं तीन परियोजनाएं 3400 करोड़ खर्च होने के बाद भी 20 से लेकर 30 फीसदी अधूरी हैं। जिले की एक-तिहाई आबादी को आर्सेनिक युक्त पानी से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
बजट के अभाव में मार्च के पहले काम प्रभावित हो गया था लेकिन अब शासन से कार्यदायी संस्थाओं से कुछ धनराशि जारी होने से उम्मीद जगनी लगी है। जिले के भूगर्भ जल में घुला यह धीमा जहर लोगों को बीमारियों की गर्त में धकेल रहा है, जबकि इसे रोकने के लिए बनाई गई सरकार की महत्वाकांक्षी सरफेस वाटर योजना अभी अधूरी है।
जिले में गंगा और सरयू नदी के जल को शोधित कर घर-घर पहुंचाने के लिए लगभग 3,400 करोड़ रुपये की लागत से तीन बड़ी इकाइयों पर काम शुरू हुआ था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी पर हनुमानगंज और बेलहरी में काम चल रहा है।
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सरयू नदी का जल शोधित करने के लिए मनियर के पास इकाई निर्माणाधीन है। योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और जिले में 450 पानी की टंकियां बनकर तैयार हैं। 95% नमूनों में मिला आर्सेनिक: साल 2013 में की गई एक व्यापक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। लिए गए नमूनों में से 95.83 प्रतिशत में आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से कहीं अधिक पाई गई थी।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पानी में आर्सेनिक की मात्रा फॉस्फेट, लोहा, अमोनियम और मैंगनीज जैसे तत्वों के साथ बढ़ती है, जिससे यह और भी घातक हो जाता है।
लंबे समय तक इस पानी के सेवन से ग्रामीण कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
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बजट के अभाव में मार्च के पहले काम प्रभावित हो गया था लेकिन अब शासन से कार्यदायी संस्थाओं से कुछ धनराशि जारी होने से उम्मीद जगनी लगी है। जिले के भूगर्भ जल में घुला यह धीमा जहर लोगों को बीमारियों की गर्त में धकेल रहा है, जबकि इसे रोकने के लिए बनाई गई सरकार की महत्वाकांक्षी सरफेस वाटर योजना अभी अधूरी है।
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जिले में गंगा और सरयू नदी के जल को शोधित कर घर-घर पहुंचाने के लिए लगभग 3,400 करोड़ रुपये की लागत से तीन बड़ी इकाइयों पर काम शुरू हुआ था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी पर हनुमानगंज और बेलहरी में काम चल रहा है।
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सरयू नदी का जल शोधित करने के लिए मनियर के पास इकाई निर्माणाधीन है। योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और जिले में 450 पानी की टंकियां बनकर तैयार हैं। 95% नमूनों में मिला आर्सेनिक: साल 2013 में की गई एक व्यापक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। लिए गए नमूनों में से 95.83 प्रतिशत में आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से कहीं अधिक पाई गई थी।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पानी में आर्सेनिक की मात्रा फॉस्फेट, लोहा, अमोनियम और मैंगनीज जैसे तत्वों के साथ बढ़ती है, जिससे यह और भी घातक हो जाता है।
लंबे समय तक इस पानी के सेवन से ग्रामीण कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।