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Ballia News: 236 में से 71 बेड तक ही ऑक्सीजन आपूर्ति इमरजेंसी वार्ड में कंसंट्रेटर के भरोसे मरीज
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जिला अस्पताल के आपातकालीन में बेड हेड पैनल के अभाव में शोपीस बनी पाइप लाइन।संवाद
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बलिया। जिला अस्पताल के कुल 236 बेडों में से केवल 71 बेड तक ही पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पा रही है। इमरजेंसी वार्ड में मरीज आज भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनों के भरोसे हैं।
महज 10 से 15 हजार रुपये के ऑक्सीजन बेड हेड पैनल के अभाव में पिछले छह वर्षों से इमरजेंसी में सीधे पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन 130 से 160 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत मरीज सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से पीड़ित होते हैं।
इन्हें तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लेकिन इमरजेंसी के बेड पर पैनल न होने से पाइपलाइन बेकार साबित हो रही है। ऐसे में चिकित्सक प्राथमिक उपचार के बाद कई मरीजों को मेडिकल वार्ड या फिर बीएचयू (वाराणसी) रेफर कर देते हैं। उपचार के ''गोल्डन आवर'' (शुरुआती महत्वपूर्ण समय) में ऑक्सीजन न मिलने से मरीजों की हालत और गंभीर हो जाती है।
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करीब छह वर्ष पहले अस्पताल में इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड तक ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन इमरजेंसी के बेडों पर पैनल नहीं लगाए गए। कोविड की दो भयानक लहरें गुजरने और पिछले वर्षों में हीट वेव (लू) की बड़ी आपदा देखने के बावजूद प्रबंधन नहीं चेता। स्थिति यह है कि इमरजेंसी के 10 तथा ट्रॉमा सेंटर के 4 बेड अब तक इस सीधे कनेक्शन से वंचित हैं।
इमरजेंसी में बेड पर सीधे ऑक्सीजन न होने से मरीजों को कंसंट्रेटर मशीन के भरोसे रहना पड़ता है। इस मशीन को लाने-लगाने में 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है, और बिजली कटने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
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प्लांट का दबाव कम हुआ तो बढ़ सकता है संकट
वर्तमान में अस्पताल के पास 80 ऑक्सीजन सिलिंडर और 36 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनें उपलब्ध हैं। हालांकि ट्रॉमा सेंटर के वार्ड के बेड पर पैनल लगे हैं, लेकिन इमरजेंसी कक्ष में यह सुविधा शून्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में एक साथ बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे और ऑक्सीजन प्लांट का दबाव कम हुआ, तो 90 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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जिला अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर के इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था है। सिलिंडर और कंसंट्रेटर पर्याप्त मात्रा में हैं। इमरजेंसी में पाइपलाइन चालू करने के लिए बेड हेड पैनल लगाने हेतु उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द ही यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
— डॉ. एसके यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल बलिया।
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महज 10 से 15 हजार रुपये के ऑक्सीजन बेड हेड पैनल के अभाव में पिछले छह वर्षों से इमरजेंसी में सीधे पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन 130 से 160 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत मरीज सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से पीड़ित होते हैं।
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इन्हें तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लेकिन इमरजेंसी के बेड पर पैनल न होने से पाइपलाइन बेकार साबित हो रही है। ऐसे में चिकित्सक प्राथमिक उपचार के बाद कई मरीजों को मेडिकल वार्ड या फिर बीएचयू (वाराणसी) रेफर कर देते हैं। उपचार के ''गोल्डन आवर'' (शुरुआती महत्वपूर्ण समय) में ऑक्सीजन न मिलने से मरीजों की हालत और गंभीर हो जाती है।
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करीब छह वर्ष पहले अस्पताल में इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड तक ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन इमरजेंसी के बेडों पर पैनल नहीं लगाए गए। कोविड की दो भयानक लहरें गुजरने और पिछले वर्षों में हीट वेव (लू) की बड़ी आपदा देखने के बावजूद प्रबंधन नहीं चेता। स्थिति यह है कि इमरजेंसी के 10 तथा ट्रॉमा सेंटर के 4 बेड अब तक इस सीधे कनेक्शन से वंचित हैं।
इमरजेंसी में बेड पर सीधे ऑक्सीजन न होने से मरीजों को कंसंट्रेटर मशीन के भरोसे रहना पड़ता है। इस मशीन को लाने-लगाने में 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है, और बिजली कटने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
प्लांट का दबाव कम हुआ तो बढ़ सकता है संकट
वर्तमान में अस्पताल के पास 80 ऑक्सीजन सिलिंडर और 36 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनें उपलब्ध हैं। हालांकि ट्रॉमा सेंटर के वार्ड के बेड पर पैनल लगे हैं, लेकिन इमरजेंसी कक्ष में यह सुविधा शून्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में एक साथ बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे और ऑक्सीजन प्लांट का दबाव कम हुआ, तो 90 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
जिला अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर के इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था है। सिलिंडर और कंसंट्रेटर पर्याप्त मात्रा में हैं। इमरजेंसी में पाइपलाइन चालू करने के लिए बेड हेड पैनल लगाने हेतु उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द ही यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
— डॉ. एसके यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल बलिया।