बलिया। गंगा व सरयू नदी के कटान से किसान भूमिहीन हो रहे हैं। इससे उनके सामने कई तरह की दिक्कत आने लगी हैं। दोनों नदियों के कटान से हजारों एकड़ भूमि नदी में समाहित हो गई है। किसानों की भूमि जाने से वह पूरी तरह भूमिहीन हो जा रहे हैं। सरकार की तरफ से दी जाने वाला मुआवजा उनके ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। न्यूनतम केवल पांच हजार रुपये तक ही है। अधिकतम 94 हजार तक की धनराशि मिलती है। पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो करीब 7000 से अधिक किसानों की उपजाऊ भूमि नदी में समाहित हुई थी।
इन्हें तीन करोड़ का मुआवजा दिया गया है। पिछले वर्ष सदर, बांसडीह और बैरिया तहसील क्षेत्र के कुल 7,415 किसान कटान से प्रभावित हुए और उनकी कृषि भूमि नदी में समा गई। बीते वर्ष भूमि क्षति पर सरकार की तरफ से कुल 3.42 करोड़ रुपये का सहायता राशि वितरित किया गया था। बांसडीह तहसील में 196 मकान भी नदी में समा गए थे। इनमें 154 पक्के, नौ कच्चे मकान और 33 झोपड़ियां शामिल थीं। प्रभावित परिवारों को पक्के मकान के लिए 1.20 लाख रुपये तथा कच्चे मकान या झोपड़ी के लिए आठ हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इस साल भी दोनों नदी उपजाऊ भूमि लगातार निगल रही है।