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आठ दिन का होलाष्टक शुरू: क्या करें, क्या न करें...पढ़ें पूरी जानकारी, मांगलिक कार्य पर रहेंगे निषेध; 4 को होली

अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 27 Feb 2026 06:22 AM IST
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सार

Holi: 

Holashtak read the full details auspicious functions will be prohibited Holi on 4 february
होलाष्टक 2026 उपाय - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Holashtak: होलाष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है, 'होली' व 'अष्टक' जिसका अर्थ है आठ दिनों की अवधि। यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर 'होलिका दहन' तक रहता है। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना निषेध होता है। आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि होलाष्टक के साथ मौसम परिवर्तन शुरू हो जाता है। 

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सूर्य का प्रकाश तेज होता है। हवाएं ठंडी रहती हैं। ऐसे में व्यक्ति रोग की चपेट में आ जाता है। इस समय मन की स्थिति अवसाद ग्रस्त रहती है। होलाष्टक के समय सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। इसलिए इस दौरान जो शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए मांगलिक कार्य करना निषेध माना जाता है। होलाष्टक में विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन संस्कार व नये व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।

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होलाष्टक में क्या करें
यह समय भगवान विष्णु व नरसिंह भगवान की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। भगवान नरसिंह की पूजा करें व सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। ग्रह दोष शमन के लिए सूर्य की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ करें व तामसिक भोजन न करें।

होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ
आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि होलिका दहन से पहले प्रहलाद पर अनेकानेक अत्याचार किए गए थे, जिनकी पीड़ा के कारण इन आठ दिनों को नकारात्मक ऊर्जा से भरा माना जाता है। इसलिए इस दौरान किये गए अशुभ कार्यों का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।

दो मार्च की रात 12.50 बजे होलिकादहन व चार को होली
आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि 2 मार्च को रात्रि पर्यन्त भद्रा होने से भद्रा पुच्छ में रात्रि 12 बजकर 50 मिनट से रात्रि 2 बजकर 02 मिनट के मध्य होलिका दहन किया जाएगा। इसके दूसरे दिन ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण लग रहा है। इसी दिन ग्रहण के उपरांत प्रदोषकाल में प्रतिपदा के होने से काशी में चतुःषष्टि यात्रा तथा दर्शन होगा तथा चैत्र कृष्ण प्रतिपदा दिन बुधवार दिनांक 4 मार्च को होली-वसन्तोत्सव मनाया जाएगा।

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