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Ballia News: गैंगस्टर एक्ट में तीन दोषियों को को 10-10 साल की सजा
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बलिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) प्रथम हरीश कुमार की अदालत ने थाना कोतवाली में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में तीन अभियुक्तों को दोषी पाया। प्रत्येक को 10-10 साल की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना कोतवाली में वर्ष 2004 में मुकदमा अपराध संख्या 368/2004, धारा 2/3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत गजरी शिवपुर दियर निवासी वशिष्ठ सिंह, बीरबहादुर सिंह एवं रमाशंकर सिंह के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया था। विवेचना पूर्ण होने के उपरांत पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया, जहां विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य एवं गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
विचारण के दौरान अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों तथा अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा। इसके आधार पर न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को धारा 2/3(1) यूपी गैंगस्टर एक्ट के अपराध का दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के साधारण कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया।
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यह निर्णय पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मॉनिटरिंग सेल एवं अभियोजन शाखा द्वारा की गई प्रभावी न्यायालयीन पैरवी का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार सुदृढ़ साक्ष्यों, गवाहों की प्रभावी परीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग के कारण अभियोजन पक्ष न्यायालय में आरोप सिद्ध करने में सफल रहा, जिसके फलस्वरूप अभियुक्तों के विरुद्ध दोषसिद्धि एवं दंडादेश पारित किया गया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना कोतवाली में वर्ष 2004 में मुकदमा अपराध संख्या 368/2004, धारा 2/3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत गजरी शिवपुर दियर निवासी वशिष्ठ सिंह, बीरबहादुर सिंह एवं रमाशंकर सिंह के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया था। विवेचना पूर्ण होने के उपरांत पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया, जहां विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य एवं गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
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विचारण के दौरान अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों तथा अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा। इसके आधार पर न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को धारा 2/3(1) यूपी गैंगस्टर एक्ट के अपराध का दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के साधारण कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया।
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यह निर्णय पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मॉनिटरिंग सेल एवं अभियोजन शाखा द्वारा की गई प्रभावी न्यायालयीन पैरवी का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार सुदृढ़ साक्ष्यों, गवाहों की प्रभावी परीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग के कारण अभियोजन पक्ष न्यायालय में आरोप सिद्ध करने में सफल रहा, जिसके फलस्वरूप अभियुक्तों के विरुद्ध दोषसिद्धि एवं दंडादेश पारित किया गया।