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Balrampur News: जिले में 1200 बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 09:28 PM IST
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1200 children affected by autism in the district
बलरामपुर के पचपेड़वा में ऑटिज्म के प्रति बच्चों को किया जा रहा जागरूक ।-संवाद
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बलरामपुर। विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर जिले में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) को लेकर चिंता के साथ जागरूकता की जरूरत भी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार जिले में करीब 1200 बच्चे इस तंत्रिका विकास संबंधी समस्या से प्रभावित हैं। जागरूकता के अभाव में कई मामलों की समय पर पहचान नहीं हो पाती, जिससे बच्चों के विकास पर असर पड़ता है।
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जिला मेमोरियल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि ऑटिज्म बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करता है, जिससे सामाजिक व्यवहार, बोलने की क्षमता और प्रतिक्रिया में कमी देखी जाती है। उन्होंने कहा कि जिले में अभी दो बच्चों की नियमित काउंसिलिंग जिला मेमोरियल अस्पताल में की जा रही है। समय पर पहचान होने पर स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और व्यवहार थेरेपी से बच्चों में सुधार संभव है।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें, साथ समय बिताएं
डॉ. राजेश सिंह ने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चा आंखों से संपर्क नहीं करता, बोलने में देरी हो रही है या नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। साथ ही बच्चों का स्क्रीन टाइम कम कर उनके साथ अधिक समय बिताना भी जरूरी है, जिससे उनके व्यवहार और संवाद क्षमता में सुधार होता है। जिले में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
काउंसिलिंग और अभ्यास से हो रहा सुधार
पचपेड़वा क्षेत्र में ऑटिज्म को लेकर जागरूकता अभियान चला रहीं नेहा सिंह ने बताया कि शुरुआत में लोग इस समस्या को समझ नहीं पाते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान कई ऐसे बच्चे सामने आए, जिनमें समय पर काउंसिलिंग और अभ्यास से पहले से बेहतर सुधार देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि जानकारी मिलने के बाद अब अभिभावक बच्चों को लेकर चिकित्सकों से परामर्श भी ले रहे हैं, जो सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल, परिवार और समाज की संयुक्त पहल से ही ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
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