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Balrampur News: परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई के साथ सुरक्षा और समझ पर जोर
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फोटो-16-बलरामपुर के परिषदीय विद्यालय में पढ़ाई करते विद्यार्थी ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 शिक्षा व्यवस्था के लिहाज से कई नए प्रयोग लेकर आया है। इस बार फोकस केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ने की आदत, समझने की क्षमता और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी रखा गया है। विभाग से जारी शैक्षिक कैलेंडर में किए गए बदलाव अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने की तैयारी में हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब सप्ताह में एक दिन ‘रीडिंग डे’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन कक्षा दो से आठ तक के छात्र-छात्राएं विद्यालय की लाइब्रेरी में बैठकर किताबें, बाल पत्रिकाएं और सामान्य ज्ञान से जुड़ी सामग्री पढ़ेंगे। शिक्षक दिलीप चौहान का मानना है कि इससे बच्चों में न केवल पढ़ने की रुचि बढ़ेगी, बल्कि उनकी भाषा, उच्चारण और समझने की क्षमता भी मजबूत होगी।
तुलसीपुर की शिक्षक कुसुम कुमारी ने बताया कि बढ़ते मोबाइल और टीवी के उपयोग के बीच यह पहल बच्चों को किताबों की ओर वापस लाने की कोशिश मानी जा रही है। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान रोजाना बच्चों से मुख्य समाचार पढ़वाने की व्यवस्था भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल विकसित हो सके। बीएसए शुभम शुक्ल ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में इस बार भी समर कैंप आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन्हें और अधिक रोचक और उपयोगी बनाने की तैयारी है। इन कैंपों में कहानी लेखन, चित्रकला, खेलकूद, विज्ञान गतिविधियां और समूह कार्य जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना और सीखने को आनंददायक बनाना है।
महीनेवार पाठ्यक्रम और सख्त निगरानी
शैक्षिक कैलेंडर में पूरे साल का पाठ्यक्रम पहले से तय कर दिया गया है। अप्रैल माह में ही 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे साल के अंत में पढ़ाई का दबाव न बढ़े। शिक्षकों को इसके अनुरूप पाठ योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी अशोक पाठक ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को हर महीने प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पढ़ाई समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
पहली बार पाठ्यक्रम में ‘गुड टच-बैड टच’ और पॉक्सो की जानकारी
इस सत्र की सबसे अहम पहल बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। पहली बार कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ और पॉक्सो कानून से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी।
शिक्षक बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सरल और संवेदनशील भाषा में यह विषय समझाएं। इसमें बच्चों को निजी सीमाओं की पहचान, गलत व्यवहार को समझना और किसी भी असहज स्थिति में तुरंत अभिभावकों या शिक्षकों को बताने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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नई व्यवस्था के तहत अब सप्ताह में एक दिन ‘रीडिंग डे’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन कक्षा दो से आठ तक के छात्र-छात्राएं विद्यालय की लाइब्रेरी में बैठकर किताबें, बाल पत्रिकाएं और सामान्य ज्ञान से जुड़ी सामग्री पढ़ेंगे। शिक्षक दिलीप चौहान का मानना है कि इससे बच्चों में न केवल पढ़ने की रुचि बढ़ेगी, बल्कि उनकी भाषा, उच्चारण और समझने की क्षमता भी मजबूत होगी।
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तुलसीपुर की शिक्षक कुसुम कुमारी ने बताया कि बढ़ते मोबाइल और टीवी के उपयोग के बीच यह पहल बच्चों को किताबों की ओर वापस लाने की कोशिश मानी जा रही है। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान रोजाना बच्चों से मुख्य समाचार पढ़वाने की व्यवस्था भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल विकसित हो सके। बीएसए शुभम शुक्ल ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में इस बार भी समर कैंप आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन्हें और अधिक रोचक और उपयोगी बनाने की तैयारी है। इन कैंपों में कहानी लेखन, चित्रकला, खेलकूद, विज्ञान गतिविधियां और समूह कार्य जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना और सीखने को आनंददायक बनाना है।
महीनेवार पाठ्यक्रम और सख्त निगरानी
शैक्षिक कैलेंडर में पूरे साल का पाठ्यक्रम पहले से तय कर दिया गया है। अप्रैल माह में ही 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे साल के अंत में पढ़ाई का दबाव न बढ़े। शिक्षकों को इसके अनुरूप पाठ योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी अशोक पाठक ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को हर महीने प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पढ़ाई समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
पहली बार पाठ्यक्रम में ‘गुड टच-बैड टच’ और पॉक्सो की जानकारी
इस सत्र की सबसे अहम पहल बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। पहली बार कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ और पॉक्सो कानून से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी।
शिक्षक बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सरल और संवेदनशील भाषा में यह विषय समझाएं। इसमें बच्चों को निजी सीमाओं की पहचान, गलत व्यवहार को समझना और किसी भी असहज स्थिति में तुरंत अभिभावकों या शिक्षकों को बताने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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