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Balrampur News: उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार पर मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:03 PM IST
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फोटो-17- एमएलके महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में जानकारी देते कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह। स्
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बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय में शनिवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की तरफ से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर चर्चा की। इस संगोष्ठी में देशभर से तमाम शिक्षाविद व शोधार्थियों ने भाग लिया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि व असिस्टेंट कंट्रोलर पेटेंट डिजाइन वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार डॉ. राजू तिवारी एवं संगोष्ठी अध्यक्ष मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने किया। कुलपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता बताते हुए ऋग्वेद को विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ बताया और कहा कि इसमें विज्ञान, खगोल, चिकित्सा व प्रौद्योगिकी का ज्ञान निहित है। मुख्य अतिथि ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार शोध, आविष्कार और कॉपीराइट की सुरक्षा के साथ उनके व्यावसायीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य छात्रों व शिक्षकों को पेटेंट, कॉपीराइट जैसे संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना और नवाचार को बढ़ावा देना है। समन्वयक डॉ. सद्गुरु प्रकाश ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि आयोजन सचिव डॉ. बजरंगी लाल गुप्त ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. स्वदेश भट्ट ने किया। संगोष्ठी में डॉ. राम रहीस, डॉ. वसंत गुप्त, डॉ. देवेंद्र चौहान, प्रो. अजय कुमार शुक्ल, प्रो. वीणा सिंह, प्रो. आरके सिंह, प्रो. पीके सिंह, प्रो. अरविंद द्विवेदी, प्रो. रेखा विश्वकर्मा, डॉ. ऋषि रंजन पांडेय, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. कृतिका तिवारी, डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. प्रखर त्रिपाठी व डॉ. सुनील कुमार सहित तमाम शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि व असिस्टेंट कंट्रोलर पेटेंट डिजाइन वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार डॉ. राजू तिवारी एवं संगोष्ठी अध्यक्ष मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने किया। कुलपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता बताते हुए ऋग्वेद को विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ बताया और कहा कि इसमें विज्ञान, खगोल, चिकित्सा व प्रौद्योगिकी का ज्ञान निहित है। मुख्य अतिथि ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार शोध, आविष्कार और कॉपीराइट की सुरक्षा के साथ उनके व्यावसायीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं।
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महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य छात्रों व शिक्षकों को पेटेंट, कॉपीराइट जैसे संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना और नवाचार को बढ़ावा देना है। समन्वयक डॉ. सद्गुरु प्रकाश ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि आयोजन सचिव डॉ. बजरंगी लाल गुप्त ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. स्वदेश भट्ट ने किया। संगोष्ठी में डॉ. राम रहीस, डॉ. वसंत गुप्त, डॉ. देवेंद्र चौहान, प्रो. अजय कुमार शुक्ल, प्रो. वीणा सिंह, प्रो. आरके सिंह, प्रो. पीके सिंह, प्रो. अरविंद द्विवेदी, प्रो. रेखा विश्वकर्मा, डॉ. ऋषि रंजन पांडेय, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. कृतिका तिवारी, डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. प्रखर त्रिपाठी व डॉ. सुनील कुमार सहित तमाम शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।

फोटो-17- एमएलके महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में जानकारी देते कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह। स्