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Balrampur News: अधूरे पशु टीकाकरण से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा
Wed, 12 Aug 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:16 PM IST
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फोटो-14-रेहरा ग्राम पंचायत के डिहवा गांव में मवेशी के साथ मौजूद पशुपालक ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए चलाया जा रहा टीकाकरण अभियान लक्ष्य की रफ्तार से पीछे चल रहा है। जिले में 1,97,628 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन अब तक करीब 25 हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है। इससे कई गांवों में पशुओं के संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है।
पिछले वर्ष जिले में 12 पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण मिले थे। वहीं खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से करीब 300 पशु बीमार हुए थे। हालांकि लंपी से किसी पशु की मौत नहीं हुई थी। इसके बावजूद जिन क्षेत्रों में टीकाकरण अधूरा है, वहां पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
रेहरा बाजार क्षेत्र के किरतापुर, रेहरा डिहवा और महुआ गांव में पिछले वर्ष दो-दो गोवंश में लंपी के लक्षण मिले थे। सदर विकासखंड क्षेत्र में भी पांच मवेशियों में लंपी के लक्षण पाए गए थे। ऐसे में इन क्षेत्रों में टीकाकरण पूरा नहीं होने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
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पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 45 दिन का विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जिले में 19 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक ब्लॉक में प्रतिदिन 450 से 500 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का कहना है कि अभियान के दौरान छूटे हुए पशुओं की पहचान कर टीकाकरण कराया जा रहा है।
डिहवा में अब भी 70 से अधिक पशु बिना टीके
रेहरा बाजार क्षेत्र के डिहवा गांव में पशुपालकों का कहना है कि पिछले वर्ष यहां लंपी वायरस से प्रभावित पशु मिले थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक टीकाकरण टीम नहीं पहुंची है। पशुपालक कप्तान चौबे और पवन कुमार चौबे ने बताया कि उनकी गायों का टीकाकरण नहीं हुआ है। गांव में 70 से अधिक पशु हैं, जिनमें कई अभी भी टीकाकरण से वंचित हैं।
मुकेश ने बताया कि उनके पास दो गाय हैं, लेकिन दोनों को टीका नहीं लगाया गया है। टीकाकरण नहीं होने से ग्रामीणों में संक्रमण को लेकर चिंता है।
महराजगंज तराई में भी छूटे पशु
महराजगंज तराई क्षेत्र के बदलपुर निवासी पशुपालक नक्के ने बताया कि उनकी गाय और दो बैलों का अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है। वहीं साहेबनगर निवासी अखिलेश पांडेय ने भी अपनी गाय को टीका नहीं लगने की बात कही।
एक संक्रमित पशु से बढ़ सकता है खतरा
पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. बीआर चौरसिया ने बताया कि लंपी और एफएमडी जैसी संक्रामक बीमारियां पशुओं में तेजी से फैल सकती हैं। संक्रमित पशु के संपर्क, कीट-पतंगों और अन्य माध्यमों से बीमारी दूसरे पशुओं तक पहुंच सकती है। इसलिए शत-प्रतिशत टीकाकरण जरूरी है।
वर्जन
45 दिन का विशेष अभियान चल रहा है। जिले में 19 टीमें गठित कर सभी क्षेत्रों में टीकाकरण कराया जा रहा है। यदि किसी गांव या पशुपालक का पशु टीकाकरण से छूट गया है तो विभाग को सूचना दें, टीम भेजकर टीकाकरण कराया जाएगा।
डॉ. राजेश शर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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पिछले वर्ष जिले में 12 पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण मिले थे। वहीं खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से करीब 300 पशु बीमार हुए थे। हालांकि लंपी से किसी पशु की मौत नहीं हुई थी। इसके बावजूद जिन क्षेत्रों में टीकाकरण अधूरा है, वहां पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
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रेहरा बाजार क्षेत्र के किरतापुर, रेहरा डिहवा और महुआ गांव में पिछले वर्ष दो-दो गोवंश में लंपी के लक्षण मिले थे। सदर विकासखंड क्षेत्र में भी पांच मवेशियों में लंपी के लक्षण पाए गए थे। ऐसे में इन क्षेत्रों में टीकाकरण पूरा नहीं होने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
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पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 45 दिन का विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जिले में 19 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक ब्लॉक में प्रतिदिन 450 से 500 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का कहना है कि अभियान के दौरान छूटे हुए पशुओं की पहचान कर टीकाकरण कराया जा रहा है।
डिहवा में अब भी 70 से अधिक पशु बिना टीके
रेहरा बाजार क्षेत्र के डिहवा गांव में पशुपालकों का कहना है कि पिछले वर्ष यहां लंपी वायरस से प्रभावित पशु मिले थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक टीकाकरण टीम नहीं पहुंची है। पशुपालक कप्तान चौबे और पवन कुमार चौबे ने बताया कि उनकी गायों का टीकाकरण नहीं हुआ है। गांव में 70 से अधिक पशु हैं, जिनमें कई अभी भी टीकाकरण से वंचित हैं।
मुकेश ने बताया कि उनके पास दो गाय हैं, लेकिन दोनों को टीका नहीं लगाया गया है। टीकाकरण नहीं होने से ग्रामीणों में संक्रमण को लेकर चिंता है।
महराजगंज तराई में भी छूटे पशु
महराजगंज तराई क्षेत्र के बदलपुर निवासी पशुपालक नक्के ने बताया कि उनकी गाय और दो बैलों का अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है। वहीं साहेबनगर निवासी अखिलेश पांडेय ने भी अपनी गाय को टीका नहीं लगने की बात कही।
एक संक्रमित पशु से बढ़ सकता है खतरा
पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. बीआर चौरसिया ने बताया कि लंपी और एफएमडी जैसी संक्रामक बीमारियां पशुओं में तेजी से फैल सकती हैं। संक्रमित पशु के संपर्क, कीट-पतंगों और अन्य माध्यमों से बीमारी दूसरे पशुओं तक पहुंच सकती है। इसलिए शत-प्रतिशत टीकाकरण जरूरी है।
वर्जन
45 दिन का विशेष अभियान चल रहा है। जिले में 19 टीमें गठित कर सभी क्षेत्रों में टीकाकरण कराया जा रहा है। यदि किसी गांव या पशुपालक का पशु टीकाकरण से छूट गया है तो विभाग को सूचना दें, टीम भेजकर टीकाकरण कराया जाएगा।
डॉ. राजेश शर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

फोटो-14-रेहरा ग्राम पंचायत के डिहवा गांव में मवेशी के साथ मौजूद पशुपालक ।-संवाद