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Balrampur News: महिला अस्पताल में 1.52 करोड़ की खरीद में घपले की जांच तेज
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 20 May 2026 11:32 PM IST
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फोटो-35-बलरामपुर के महिला अस्पताल में रखा सामान ।-संवाद
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बलरामपुर। जिला महिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर हुई डेढ़ करोड़ रुपये की खरीद अब जांच के घेरे में आ गई है। अस्पताल में उपकरण खरीद, निविदा प्रक्रिया और सामग्री के रखरखाव में अनियमितताओं के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। देवीपाटन मंडल की अपर निदेशक स्वास्थ्य अल्पना रानी गुप्ता ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
जांच समिति में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्त, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव तथा वित्त एवं लेखाधिकारी सत्यनारायण को शामिल किया गया है। बुधवार को समिति के सदस्यों ने गोंडा स्थित अपर निदेशक कार्यालय में महिला अस्पताल के लिपिक मुनीर को तलब किया। मुनीर खरीद प्रक्रिया से संबंधित पत्रावलियों, निविदा दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों के साथ पहुंचे। अपर निदेशक ने पूरे मामले की जानकारी की। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि खरीद प्रक्रिया और उपकरण आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। समिति सभी पहलुओं की बिंदुवार जांच करेगी। जांच समिति अब निविदा प्रक्रिया, कार्यदायी संस्था चयन, सामग्री आपूर्ति, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और भंडारण व्यवस्था की पड़ताल कर रही है। वित्तीय दस्तावेजों और पत्रावलियों का मिलान भी किया जा रहा है। जांच में यह देखा जाएगा कि खरीद नियमों का पालन हुआ या नहीं और सामग्री की वास्तविक आवश्यकता कितनी थी।
बजट जारी होने के बाद महीनों लटकी रही खरीद प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार महिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत करने के लिए शासन से करीब 1 करोड़ 52 लाख 42 हजार रुपये का बजट जारी किया गया था। इस बजट से अस्पताल में एआई आधारित अल्ट्रासाउंड मशीन, ऑपरेशन थिएटर उपकरण, ड्रेसिंग टेबल, स्ट्रेचर, इमरजेंसी ट्रॉली, अलमारियां और अन्य आधुनिक संसाधन खरीदे जाने थे। आरोप है कि जनवरी में बजट मिलने के बावजूद करीब एक माह तक निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। बाद में 12 फरवरी को लगभग 1.06 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई। निविदा खोलने और कार्यदायी संस्था चयन में भी करीब 15 दिन का समय लगाया गया।
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पुराने उपकरण कंडम घोषित नहीं, फिर भी नई खरीद
वित्तीय वर्ष समाप्त होने और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचने पर 23 मार्च को अस्पताल में तेजी से सामग्री पहुंचाई गई। आरोप है कि कई उपकरणों और फर्नीचर का विधिवत सत्यापन किए बिना ही उन्हें अस्पताल परिसर में रखवा दिया गया। अस्पताल के वार्ड, कार्यालय और लेबर रूम के बाहर नए बेड, स्ट्रेचर, मेज, अलमारियां और अन्य सामग्री खुले बरामदों में पड़ी मिली। कई उपकरण अब भी पैक हालत में धूल फांक रहे हैं। इससे उपकरणों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पुराने उपकरणों को कंडम घोषित किए बिना ही नई खरीद क्यों की गई। अस्पताल परिसर में पुराने फर्नीचर और उपकरण भी रखे हुए हैं, जबकि नए संसाधन अलग से खरीदे गए। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि पुराने सामान की नीलामी होगी, उनका उपयोग जारी रहेगा या उन्हें रिकॉर्ड में ही समायोजित किया जाएगा।
जांच समिति में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्त, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव तथा वित्त एवं लेखाधिकारी सत्यनारायण को शामिल किया गया है। बुधवार को समिति के सदस्यों ने गोंडा स्थित अपर निदेशक कार्यालय में महिला अस्पताल के लिपिक मुनीर को तलब किया। मुनीर खरीद प्रक्रिया से संबंधित पत्रावलियों, निविदा दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों के साथ पहुंचे। अपर निदेशक ने पूरे मामले की जानकारी की। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि खरीद प्रक्रिया और उपकरण आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। समिति सभी पहलुओं की बिंदुवार जांच करेगी। जांच समिति अब निविदा प्रक्रिया, कार्यदायी संस्था चयन, सामग्री आपूर्ति, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और भंडारण व्यवस्था की पड़ताल कर रही है। वित्तीय दस्तावेजों और पत्रावलियों का मिलान भी किया जा रहा है। जांच में यह देखा जाएगा कि खरीद नियमों का पालन हुआ या नहीं और सामग्री की वास्तविक आवश्यकता कितनी थी।
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बजट जारी होने के बाद महीनों लटकी रही खरीद प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार महिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत करने के लिए शासन से करीब 1 करोड़ 52 लाख 42 हजार रुपये का बजट जारी किया गया था। इस बजट से अस्पताल में एआई आधारित अल्ट्रासाउंड मशीन, ऑपरेशन थिएटर उपकरण, ड्रेसिंग टेबल, स्ट्रेचर, इमरजेंसी ट्रॉली, अलमारियां और अन्य आधुनिक संसाधन खरीदे जाने थे। आरोप है कि जनवरी में बजट मिलने के बावजूद करीब एक माह तक निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। बाद में 12 फरवरी को लगभग 1.06 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई। निविदा खोलने और कार्यदायी संस्था चयन में भी करीब 15 दिन का समय लगाया गया।
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