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Balrampur News: 63 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 20 May 2026 11:33 PM IST
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बलरामपुर। पंचायतों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान शुरू होगा। इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में 63 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। समूहों से जोड़ने के बाद स्थानीय आवश्यकता के आधार पर लघु उद्यम स्थापित कराकर महिलाओं को छह माह में ही रोजगार से जोड़ने की पहल होगी। इसके लिए सर्वे का कार्य हो रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से अभी तक जिले की 84,782 महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा चुका है। इनमें पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, किराना संचालन और छोटे घरेलू उद्योग शामिल हैं। इन गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं न केवल परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांवों में रोजगार का नया मॉडल भी तैयार कर रही हैं। लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की मन्ना देवी, जूही समूह की गीता, नारी सखी समूह की सुंदरवती, लोट्स समूह की रीमा पांडेय आदि महिलाएं स्वयं के साथ परिवार को भी सहारा दे रही हैं। जिले के छह विकास खंडों में स्थापित टीएचआर प्लांटों के जरिए महिलाओं को पुष्टाहार उत्पादन का कार्य भी दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और समूहों से जुड़ी महिलाओं की आमदनी में इजाफा हुआ है। फिलहाल अभी तक विभाग ने 62,890 संभावित लखपति दीदी का आजीविका रजिस्टर तैयार कर लिया गया है। इनमें से 29,562 महिलाओं ने वार्षिक आय एक लाख रुपये की सीमा को पार भी कर लिया है। उन्हें और आगे बढ़ाने की पहल भी साथ-साथ चलेगी।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से अभी तक जिले की 84,782 महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा चुका है। इनमें पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, किराना संचालन और छोटे घरेलू उद्योग शामिल हैं। इन गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं न केवल परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांवों में रोजगार का नया मॉडल भी तैयार कर रही हैं। लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की मन्ना देवी, जूही समूह की गीता, नारी सखी समूह की सुंदरवती, लोट्स समूह की रीमा पांडेय आदि महिलाएं स्वयं के साथ परिवार को भी सहारा दे रही हैं। जिले के छह विकास खंडों में स्थापित टीएचआर प्लांटों के जरिए महिलाओं को पुष्टाहार उत्पादन का कार्य भी दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और समूहों से जुड़ी महिलाओं की आमदनी में इजाफा हुआ है। फिलहाल अभी तक विभाग ने 62,890 संभावित लखपति दीदी का आजीविका रजिस्टर तैयार कर लिया गया है। इनमें से 29,562 महिलाओं ने वार्षिक आय एक लाख रुपये की सीमा को पार भी कर लिया है। उन्हें और आगे बढ़ाने की पहल भी साथ-साथ चलेगी।
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