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Balrampur News: नवाचार व रोजगार का हब बन रहा मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:39 PM IST
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फोटो-1-बलरामपुर में निर्माणाीधीन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ।-संवाद
- फोटो : सांकेतिक
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बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने नवाचार और रोजगारपरक पाठ्यक्रम की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने बताया कि कम समय में शिक्षा, शोध और कौशल विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। आधुनिक तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय के साथ यह विश्वविद्यालय पूर्वांचल के युवाओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विश्वविद्यालय ने अब तक 10 संकायों और 37 विभागों की स्थापना कर बहुविषयी शिक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। इन पाठ्यक्रमों से युवाओं को महानगरों की ओर पलायन किए बिना नई तकनीकों में दक्ष बनने का अवसर मिलेगा।
कुलपति के अनुसार विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय पहचान को भी शिक्षा से जोड़ा गया है। भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र और श्रावस्ती, देवीपाटन धाम जैसे धार्मिक स्थलों की संभावनाओं को देखते हुए स्पिरिचुअल टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इससे पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
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वहीं थारू हिस्ट्री, कल्चर एंड एम्पावरमेंट स्टडीज के माध्यम से तराई क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक पहचान दी जा रही है।
आधुनिक शिक्षा में युवाओं को दक्ष बनाने की तैयारी पूरी
पर्यावरण संरक्षण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एग्रोफॉरेस्ट्री, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट मैनेजमेंट तथा गन्ना आधारित अध्ययन जैसे विषय भी शुरू किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों से किसानों के परिवारों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक कृषि और हरित रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने पर भी विशेष जोर दे रहा है। वेबसाइट डिजाइन, एनजीओ मैनेजमेंट, पब्लिक ओरेशन, इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन, वैदिक गणित और संस्कृत पांडुलिपि संपादन जैसे कौशल आधारित प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
सामाजिक, आर्थिक व बौद्धिक विकास का आधार बनेगा विश्वविद्यालय
182 महाविद्यालयों के माध्यम से बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और गोंडा के लाखों छात्र-छात्राओं की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने वाला मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय अब देवीपाटन मंडल के एक बड़े शैक्षिक और शोध केंद्र के रूप में उभर रहा है। इच्छुक छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पंजीकरण कर मनचाहे पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। विश्वविद्यालय परामर्शदात्री समिति के संयोजक सर्वेश सिंह का मानना है कि यह विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में न केवल उच्च शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि पूरे मंडल के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास का नया आधार भी साबित होगा।
विश्वविद्यालय ने अब तक 10 संकायों और 37 विभागों की स्थापना कर बहुविषयी शिक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। इन पाठ्यक्रमों से युवाओं को महानगरों की ओर पलायन किए बिना नई तकनीकों में दक्ष बनने का अवसर मिलेगा।
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कुलपति के अनुसार विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय पहचान को भी शिक्षा से जोड़ा गया है। भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र और श्रावस्ती, देवीपाटन धाम जैसे धार्मिक स्थलों की संभावनाओं को देखते हुए स्पिरिचुअल टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इससे पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
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वहीं थारू हिस्ट्री, कल्चर एंड एम्पावरमेंट स्टडीज के माध्यम से तराई क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक पहचान दी जा रही है।
आधुनिक शिक्षा में युवाओं को दक्ष बनाने की तैयारी पूरी
पर्यावरण संरक्षण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एग्रोफॉरेस्ट्री, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट मैनेजमेंट तथा गन्ना आधारित अध्ययन जैसे विषय भी शुरू किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों से किसानों के परिवारों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक कृषि और हरित रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने पर भी विशेष जोर दे रहा है। वेबसाइट डिजाइन, एनजीओ मैनेजमेंट, पब्लिक ओरेशन, इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन, वैदिक गणित और संस्कृत पांडुलिपि संपादन जैसे कौशल आधारित प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
सामाजिक, आर्थिक व बौद्धिक विकास का आधार बनेगा विश्वविद्यालय
182 महाविद्यालयों के माध्यम से बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और गोंडा के लाखों छात्र-छात्राओं की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने वाला मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय अब देवीपाटन मंडल के एक बड़े शैक्षिक और शोध केंद्र के रूप में उभर रहा है। इच्छुक छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पंजीकरण कर मनचाहे पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। विश्वविद्यालय परामर्शदात्री समिति के संयोजक सर्वेश सिंह का मानना है कि यह विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में न केवल उच्च शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि पूरे मंडल के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास का नया आधार भी साबित होगा।