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Balrampur News: सीमावर्ती गांवों की मतदाता सूची खंगालेगी पुलिस, नेपाली वोटरों की तलाश शुरू
Tue, 07 Jul 2026 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 07 Jul 2026 10:42 PM IST
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फोटो 25 बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत नेपाल प्रवेश द्वार। फाइल फोटो
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बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े गांवों में सामने आए कथित फर्जी नागरिकता प्रकरण की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 27 नेपाली नागरिकों के भारतीय पहचान पत्र बनवाकर मतदाता सूची में शामिल होने के मामले में पुलिस ने अब सीमावर्ती 44 गांवों की मतदाता सूचियों की व्यापक जांच शुरू करने की तैयारी की है।
सूत्रों के अनुसार जांच केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राम पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों और पुराने अभिलेखों की भी पड़ताल की जाएगी। इसके जरिये यह पता लगाया जाएगा कि वर्षों के दौरान कितने नेपाली नागरिक भारतीय मतदाता के रूप में दर्ज हुए और उन्होंने किन-किन चुनावों में मतदान किया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि पुराने निर्वाचन रिकॉर्ड, संशोधन रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के मिलान से फर्जी नागरिकता का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है। इसी वजह से निर्वाचन आयोग से पिछले कई चुनावों की मतदाता सूचियां और पुनरीक्षण संबंधी रिकॉर्ड तलब किए जा रहे हैं। विशेष निगरानी उन गांवों पर रखी जा रही है, जहां पहले भी नेपाली नागरिकों को भारतीय मतदाता बनाए जाने की शिकायतें मिल चुकी हैं।
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यह भी जांच की जाएगी कि आरोपियों के नाम पहली बार किस वर्ष मतदाता सूची में जोड़े गए, उनका सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया और बाद के पुनरीक्षण में उन्हें हटाया क्यों नहीं गया। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और सत्यापनकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू दोहरी नागरिकता के आधार पर मताधिकार के इस्तेमाल से भी जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक एफआईआर में नामजद 27 लोगों के बारे में यह जानकारी जुटाई जा रही है कि क्या वे नेपाल में भी मतदाता हैं और वहां के चुनावों में मतदान करते रहे हैं। यदि उन्होंने भारत और नेपाल दोनों देशों में मतदान किया है तो इसे केवल फर्जी दस्तावेज का मामला नहीं, बल्कि दोनों देशों की चुनावी व्यवस्था का दुरुपयोग करने की सुनियोजित साजिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि भारतीय दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, बैंक खाते, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने संबंधी रिकॉर्ड भी जुटाए जा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल किन-किन सरकारी सुविधाओं के लिए किया गया।
पूर्व सांसद के नेपाल कनेक्शन की भी पड़ताल
सूत्रों के अनुसार विवेचना के दौरान पूर्व सांसद रिजवान जहीर के नेपाल में संभावित संपर्कों और सीमावर्ती क्षेत्र में उनके प्रभाव की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेपाली नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने में किसी संगठित नेटवर्क या राजनीतिक संरक्षण की भूमिका तो नहीं रही। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है। आने वाले दिनों में सीमावर्ती गांवों से जुटने वाले दस्तावेज इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं।
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सूत्रों के अनुसार जांच केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राम पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों और पुराने अभिलेखों की भी पड़ताल की जाएगी। इसके जरिये यह पता लगाया जाएगा कि वर्षों के दौरान कितने नेपाली नागरिक भारतीय मतदाता के रूप में दर्ज हुए और उन्होंने किन-किन चुनावों में मतदान किया।
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जांच एजेंसियों का मानना है कि पुराने निर्वाचन रिकॉर्ड, संशोधन रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के मिलान से फर्जी नागरिकता का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है। इसी वजह से निर्वाचन आयोग से पिछले कई चुनावों की मतदाता सूचियां और पुनरीक्षण संबंधी रिकॉर्ड तलब किए जा रहे हैं। विशेष निगरानी उन गांवों पर रखी जा रही है, जहां पहले भी नेपाली नागरिकों को भारतीय मतदाता बनाए जाने की शिकायतें मिल चुकी हैं।
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यह भी जांच की जाएगी कि आरोपियों के नाम पहली बार किस वर्ष मतदाता सूची में जोड़े गए, उनका सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया और बाद के पुनरीक्षण में उन्हें हटाया क्यों नहीं गया। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और सत्यापनकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू दोहरी नागरिकता के आधार पर मताधिकार के इस्तेमाल से भी जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक एफआईआर में नामजद 27 लोगों के बारे में यह जानकारी जुटाई जा रही है कि क्या वे नेपाल में भी मतदाता हैं और वहां के चुनावों में मतदान करते रहे हैं। यदि उन्होंने भारत और नेपाल दोनों देशों में मतदान किया है तो इसे केवल फर्जी दस्तावेज का मामला नहीं, बल्कि दोनों देशों की चुनावी व्यवस्था का दुरुपयोग करने की सुनियोजित साजिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि भारतीय दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, बैंक खाते, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने संबंधी रिकॉर्ड भी जुटाए जा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल किन-किन सरकारी सुविधाओं के लिए किया गया।
पूर्व सांसद के नेपाल कनेक्शन की भी पड़ताल
सूत्रों के अनुसार विवेचना के दौरान पूर्व सांसद रिजवान जहीर के नेपाल में संभावित संपर्कों और सीमावर्ती क्षेत्र में उनके प्रभाव की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेपाली नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने में किसी संगठित नेटवर्क या राजनीतिक संरक्षण की भूमिका तो नहीं रही। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है। आने वाले दिनों में सीमावर्ती गांवों से जुटने वाले दस्तावेज इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं।