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Balrampur News: दो दिन भारी बारिश की चेतावनी के बाद पलायन की तैयारी
Thu, 16 Jul 2026 08:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 16 Jul 2026 08:45 PM IST
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फोटो-24-बलरामपुर के चौका कला गांव के पास कटान कर रही राप्ती नदी ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले में अभी बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन खतरा लगातार बढ़ रहा है। नेपाल में हो रही बारिश और अगले दो दिनों में भारी वर्षा के पूर्वानुमान ने राप्ती नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है और बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे अधिक चिंता गंगाबख्श भागड़ गांव में दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के 50 प्रतिशत से अधिक परिवार पहले ही अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर रिश्तेदारों या सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। जो लोग अभी गांव में हैं, वे भी हालात बिगड़ने से पहले वैकल्पिक ठिकाने की तलाश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों में बाढ़ का अनुभव उन्हें पहले से सतर्क रहने के लिए मजबूर करता है।
इसी तरह चौका कला, जोगिया कला, कोड़री, गंगापुर, लालपुर, फगुनिया, दुर्गापुर, शेरनगर और जगतापुरवा समेत कई गांवों में लोग राप्ती नदी और उससे जुड़े नालों के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। ये गांव पहले भी बाढ़ की मार झेल चुके हैं। ग्रामीणों को पता है कि नेपाल में होने वाली तेज बारिश का असर कुछ ही घंटों में राप्ती नदी के जलस्तर पर दिखाई देने लगता है।
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राप्ती नदी का अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के दांग और देउखुरी क्षेत्र में आता है। वहां होने वाली लगातार बारिश का पानी सीधे बलरामपुर की ओर पहुंचता है। यही वजह है कि जिले में कम बारिश होने के बावजूद नेपाल में तेज वर्षा यहां बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अगले 24 से 48 घंटे तक नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश जारी रही तो राप्ती नदी और पहाड़ी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन तैयार
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिंचाई, राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभागों को सक्रिय कर संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है। तटबंधों के संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कराया जा रहा है। अपर जिलाधिकारी ज्योति यादव ने बताया कि बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा गया है। राहत शिविरों, नावों, गोताखोरों, खाद्यान्न, दवाओं और पशुचारे की उपलब्धता का सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। संवेदनशील गांवों के लेखपालों और ग्राम प्रधानों से भी लगातार स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
नेपाल की बारिश तय करेगी आगे की स्थिति
बाढ़ विशेषज्ञों का मानना है कि बलरामपुर के लिए अगले दो-तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश कम होती है तो स्थिति सामान्य रह सकती है। लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
इसी कारण बाढ़ नहीं आने के बावजूद तटवर्ती गांवों में भय का माहौल है। प्रशासन भी किसी तरह की लापरवाही बरतने के पक्ष में नहीं है।
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सबसे अधिक चिंता गंगाबख्श भागड़ गांव में दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के 50 प्रतिशत से अधिक परिवार पहले ही अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर रिश्तेदारों या सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। जो लोग अभी गांव में हैं, वे भी हालात बिगड़ने से पहले वैकल्पिक ठिकाने की तलाश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्षों में बाढ़ का अनुभव उन्हें पहले से सतर्क रहने के लिए मजबूर करता है।
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इसी तरह चौका कला, जोगिया कला, कोड़री, गंगापुर, लालपुर, फगुनिया, दुर्गापुर, शेरनगर और जगतापुरवा समेत कई गांवों में लोग राप्ती नदी और उससे जुड़े नालों के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। ये गांव पहले भी बाढ़ की मार झेल चुके हैं। ग्रामीणों को पता है कि नेपाल में होने वाली तेज बारिश का असर कुछ ही घंटों में राप्ती नदी के जलस्तर पर दिखाई देने लगता है।
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राप्ती नदी का अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के दांग और देउखुरी क्षेत्र में आता है। वहां होने वाली लगातार बारिश का पानी सीधे बलरामपुर की ओर पहुंचता है। यही वजह है कि जिले में कम बारिश होने के बावजूद नेपाल में तेज वर्षा यहां बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अगले 24 से 48 घंटे तक नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश जारी रही तो राप्ती नदी और पहाड़ी नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन तैयार
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिंचाई, राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभागों को सक्रिय कर संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है। तटबंधों के संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कराया जा रहा है। अपर जिलाधिकारी ज्योति यादव ने बताया कि बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा गया है। राहत शिविरों, नावों, गोताखोरों, खाद्यान्न, दवाओं और पशुचारे की उपलब्धता का सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। संवेदनशील गांवों के लेखपालों और ग्राम प्रधानों से भी लगातार स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
नेपाल की बारिश तय करेगी आगे की स्थिति
बाढ़ विशेषज्ञों का मानना है कि बलरामपुर के लिए अगले दो-तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश कम होती है तो स्थिति सामान्य रह सकती है। लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
इसी कारण बाढ़ नहीं आने के बावजूद तटवर्ती गांवों में भय का माहौल है। प्रशासन भी किसी तरह की लापरवाही बरतने के पक्ष में नहीं है।