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Balrampur News: गैस संकट से ठप पड़े चूल्हे, छोटे कारोबारियों की रोजी पर संकट
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बलरामपुर के तुलसीपुर मार्ग पर स्थित बालाजी गैस गोदाम पर जुटी उपभोक्ताओं की भीड़ ।-संवाद
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बलरामपुर। रसोई गैस की किल्लत ने छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर सीधा असर डाला है। टिफिन सप्लाई से लेकर छोला-भटूरा, चाट-टिक्की और चाय-नाश्ते के ठेलों तक, कई छोटे व्यवसायियों का काम ठप पड़ गया है। कुछ ने ब्लैक में महंगे सिलिंडर लेकर दो-चार दिन किसी तरह काम चलाया, लेकिन अब सिलिंडर न मिलने से चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। रोज कमाने-खाने वाले इन कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।
जिला महिला अस्पताल स्थित कैंटीन भी गैस संकट की मार से बंद हो गई है। संचालक प्रमोद शुक्ल ने बताया कि दो सप्ताह तक 2500 रुपये में सिलिंडर लेकर काम चलाया, लेकिन पिछले तीन दिनों से सिलिंडर नहीं मिल रहा। मजबूरी में कैंटीन बंद करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो गया ।
टिफिन सप्लाई का काम करने वाले बृजेश वर्मा ने बताया कि सिलिंडर न मिलने से खाना बनाना बंद हो गया है। चार दिनों से सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे नियमित ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द गैस नहीं मिली तो काम दोबारा शुरू करना मुश्किल हो जाएगा। चाट-टिक्की का ठेला लगाने वाले अमन प्रजापति ने बताया कि दस दिनों से लकड़ी जलाकर किसी तरह काम चला रहे हैं, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है और काम भी धीमा हो गया है। उन्होंने कहा कि सिलिंडर नहीं मिला तो ठेला बंद करना पड़ेगा। इसी तरह छोला-भटूरा, समोसा, चाय और फास्ट फूड बेचने वाले कई छोटे दुकानदारों का कहना है कि गैस न मिलने से रोज की आय प्रभावित हो रही है और परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
एजेंसियों पर लंबी कतारें
गैस एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। उपभोक्ता सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। तुलसीपुर मार्ग स्थित चुंगी नाका के पास बालाजी गैस गोदाम पर सुबह सात बजे से ही भारी भीड़ रही। करीब 500 उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी रही। उपभोक्ता राहुल और केशव ने बताया कि वे सुबह 6:30 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन सिलिंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। रंजन और ममता ने बताया कि बुधवार को भी लाइन में लगे थे, लेकिन ट्रक न आने से खाली हाथ लौटना पड़ा। धर्मपुर स्थित राप्ती गैस गोदाम पर भी इसी तरह की भीड़ देखने को मिली।
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जिला महिला अस्पताल स्थित कैंटीन भी गैस संकट की मार से बंद हो गई है। संचालक प्रमोद शुक्ल ने बताया कि दो सप्ताह तक 2500 रुपये में सिलिंडर लेकर काम चलाया, लेकिन पिछले तीन दिनों से सिलिंडर नहीं मिल रहा। मजबूरी में कैंटीन बंद करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो गया ।
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टिफिन सप्लाई का काम करने वाले बृजेश वर्मा ने बताया कि सिलिंडर न मिलने से खाना बनाना बंद हो गया है। चार दिनों से सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे नियमित ग्राहकों को भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द गैस नहीं मिली तो काम दोबारा शुरू करना मुश्किल हो जाएगा। चाट-टिक्की का ठेला लगाने वाले अमन प्रजापति ने बताया कि दस दिनों से लकड़ी जलाकर किसी तरह काम चला रहे हैं, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है और काम भी धीमा हो गया है। उन्होंने कहा कि सिलिंडर नहीं मिला तो ठेला बंद करना पड़ेगा। इसी तरह छोला-भटूरा, समोसा, चाय और फास्ट फूड बेचने वाले कई छोटे दुकानदारों का कहना है कि गैस न मिलने से रोज की आय प्रभावित हो रही है और परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
एजेंसियों पर लंबी कतारें
गैस एजेंसियों और गोदामों पर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। उपभोक्ता सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। तुलसीपुर मार्ग स्थित चुंगी नाका के पास बालाजी गैस गोदाम पर सुबह सात बजे से ही भारी भीड़ रही। करीब 500 उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी रही। उपभोक्ता राहुल और केशव ने बताया कि वे सुबह 6:30 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन सिलिंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। रंजन और ममता ने बताया कि बुधवार को भी लाइन में लगे थे, लेकिन ट्रक न आने से खाली हाथ लौटना पड़ा। धर्मपुर स्थित राप्ती गैस गोदाम पर भी इसी तरह की भीड़ देखने को मिली।