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Balrampur News: मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के निर्माण में सुस्ती पर सख्ती, दो करोड़ का भुगतान रोका
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बलरामपुर में निर्माणाधीन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ।-संवाद
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बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगातार बरती जा रही सुस्ती पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। तय समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण पूरा न होने पर जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम पर कार्रवाई करते हुए दो करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया है। साथ ही संस्था की लापरवाही की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी गई है और एक माह के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
जिले के कोईलरा में निर्माणाधीन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के लिए नौ मार्च 2024 को 163 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई थी। शासन ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से 131 करोड़ 46 लाख रुपये की धनराशि भी जारी कर दी थी और छह दिसंबर 2025 तक कार्य हर हाल में पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं कर सकी और समय सीमा बीतने के बाद भी भवन अधूरा रह गया।
प्रशासन की मंशा थी कि चैत्र नवरात्र के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन का संचालन मुख्य भवन से शुरू कराया जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिल सके, लेकिन निर्माण अधूरा रहने के कारण यह योजना पूरी नहीं हो सकी। इससे प्रशासनिक स्तर पर नाराजगी बढ़ी और निर्माण कार्य की प्रगति की लगातार समीक्षा शुरू की गई। (संवाद)
बजट खर्च करने में भी मिली लापरवाही
11 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा में कार्यदायभ् संस्था ने 86 करोड़ 83 लाख रुपये खर्च होने और केवल 63.1 प्रतिशत कार्य पूरा होने का विवरण प्रस्तुत किया था। इसके बाद निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। हाल क्भ्स मीक्षा में भी कार्य करीब 80 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए अप्रैल माह में भी निर्माण पूरा होना कठिन माना जा रहा है। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय में कार्य पूरा न होने की स्थिति में कार्यभ्यभ्ई संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दो करोड़ रुपये का भुगतान रोकते हुए चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक प्रगति के बाद ही आगे की धनराशि जारी की जाएगी।
आयुक्त ने शासन को भेजी रिपोर्ट
डीएम की संस्तुति पर आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी है। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग के साथ ही राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को आयुक्त ने रिपोर्ट भेजी है। निर्माण कार्य अप्रैल माह में पूरा कराने और गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए निगरानी की संस्तुति की है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि अप्रैल तक कार्य पूरा न होने पर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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जिले के कोईलरा में निर्माणाधीन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के लिए नौ मार्च 2024 को 163 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई थी। शासन ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से 131 करोड़ 46 लाख रुपये की धनराशि भी जारी कर दी थी और छह दिसंबर 2025 तक कार्य हर हाल में पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं कर सकी और समय सीमा बीतने के बाद भी भवन अधूरा रह गया।
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प्रशासन की मंशा थी कि चैत्र नवरात्र के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन का संचालन मुख्य भवन से शुरू कराया जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिल सके, लेकिन निर्माण अधूरा रहने के कारण यह योजना पूरी नहीं हो सकी। इससे प्रशासनिक स्तर पर नाराजगी बढ़ी और निर्माण कार्य की प्रगति की लगातार समीक्षा शुरू की गई। (संवाद)
बजट खर्च करने में भी मिली लापरवाही
11 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा में कार्यदायभ् संस्था ने 86 करोड़ 83 लाख रुपये खर्च होने और केवल 63.1 प्रतिशत कार्य पूरा होने का विवरण प्रस्तुत किया था। इसके बाद निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। हाल क्भ्स मीक्षा में भी कार्य करीब 80 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए अप्रैल माह में भी निर्माण पूरा होना कठिन माना जा रहा है। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय में कार्य पूरा न होने की स्थिति में कार्यभ्यभ्ई संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दो करोड़ रुपये का भुगतान रोकते हुए चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक प्रगति के बाद ही आगे की धनराशि जारी की जाएगी।
आयुक्त ने शासन को भेजी रिपोर्ट
डीएम की संस्तुति पर आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी है। प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग के साथ ही राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को आयुक्त ने रिपोर्ट भेजी है। निर्माण कार्य अप्रैल माह में पूरा कराने और गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए निगरानी की संस्तुति की है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि अप्रैल तक कार्य पूरा न होने पर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।