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Banda News: प्रगतिशील किसान के खेत में लगा बायोगैस संयंत्र, जैविक खेती को मिला बल
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 28 Feb 2026 12:24 AM IST
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फोटो - 07 कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों के साथ मौजूद गौ सेवा आयोग के प्रदेश अध्यक्ष। संवाद
- फोटो : गांधी इंटर कॉलेज में यूपी बोर्ड की परीक्षा देकर बाहर निकलते छात्र।
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गिरवां। गांव से खेत तक गो आधारित प्राकृतिक व्यवस्था को अपनाने से खेती को पूरी तरह से विष मुक्त बनाया जा सकता है। बायोगैस संयंत्र न केवल रसोई गैस का सशक्त विकल्प है, अपितु इससे प्राप्त जैविक खाद भूमि की उर्वरता बढ़ाकर उत्पादन में वृद्धि करती है। स्वस्थ खेत से ही स्वस्थ अन्न और समाज का निर्माण संभव है। यह बात मनीपुर गांव के किसान आलोक सिंह के खेत में बायोगैस संयंत्र स्थापना के दौरान गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कही।
कहा कि गांव का यह नवाचार किसानों के लिए प्रेरणा, उत्साह का प्रतीक है। किसान आलोक सिंह ने बताया कि बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के पीछे गो आधारित प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बताया कि उनका लक्ष्य गांव के प्रत्येक किसान तक यह मॉडल पहुंचाने का है। किसान पंकज बागवान ने कहा कि क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता के पांच सूत्रों को अपनाकर आवर्तनशील एवं प्राकृतिक खेती से लाभ कमा सकते हैं।
उन्होंने बायोगैस योजना के बारे में बताते हुए अपनाने की सलाह दी। इस दौरान प्रगतिशील किसान ने कार्यक्रम में मौजूद सभी किसानों व अतिथियों को जैव आधारित खेती से प्राप्त अमरूद भेंट किए। कार्यक्रम में संत रामसोहवन दास, हरिमोहन श्रीवास्तव, देशराज, चंद्रपाल, हंस फाउंडेशन के अवधेश गुप्ता, नवलकिशोर, शिवाकांत मिश्रा, पर्वत सिंह सहित अन्य प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
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बायोगैस से बनी चाय – आत्मनिर्भरता की मिठास
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियाें व किसानों का बायोगैस से बनी चाय से स्वागत किया गया। इसने इस पहल की उपयोगिता और प्रभावशीलता को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया। अतिथियों ने कहा कि यह संयंत्र का शुभारंभ नहीं, बल्कि प्राकृतिक, गो आधारित और आवर्तनशील खेती की ओर एक कारगर कदम है, जो आने वाले समय में किसानों की समृद्धि और समाज के स्वास्थ्य की नई दिशा तय करेगा।
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कहा कि गांव का यह नवाचार किसानों के लिए प्रेरणा, उत्साह का प्रतीक है। किसान आलोक सिंह ने बताया कि बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के पीछे गो आधारित प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बताया कि उनका लक्ष्य गांव के प्रत्येक किसान तक यह मॉडल पहुंचाने का है। किसान पंकज बागवान ने कहा कि क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता के पांच सूत्रों को अपनाकर आवर्तनशील एवं प्राकृतिक खेती से लाभ कमा सकते हैं।
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उन्होंने बायोगैस योजना के बारे में बताते हुए अपनाने की सलाह दी। इस दौरान प्रगतिशील किसान ने कार्यक्रम में मौजूद सभी किसानों व अतिथियों को जैव आधारित खेती से प्राप्त अमरूद भेंट किए। कार्यक्रम में संत रामसोहवन दास, हरिमोहन श्रीवास्तव, देशराज, चंद्रपाल, हंस फाउंडेशन के अवधेश गुप्ता, नवलकिशोर, शिवाकांत मिश्रा, पर्वत सिंह सहित अन्य प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
बायोगैस से बनी चाय – आत्मनिर्भरता की मिठास
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियाें व किसानों का बायोगैस से बनी चाय से स्वागत किया गया। इसने इस पहल की उपयोगिता और प्रभावशीलता को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया। अतिथियों ने कहा कि यह संयंत्र का शुभारंभ नहीं, बल्कि प्राकृतिक, गो आधारित और आवर्तनशील खेती की ओर एक कारगर कदम है, जो आने वाले समय में किसानों की समृद्धि और समाज के स्वास्थ्य की नई दिशा तय करेगा।