{"_id":"69e52f474ac56246d80abd38","slug":"british-era-bridge-over-ken-river-is-fit-for-another-50-years-banda-news-c-212-1-bnd1017-144840-2026-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: केन नदी पर ब्रिटिशकालीन पुल 50 साल और फिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: केन नदी पर ब्रिटिशकालीन पुल 50 साल और फिट
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 20 Apr 2026 01:08 AM IST
विज्ञापन
फोटो- 01 केन नदी पर पुराने पुल के बगल से बन रहा नया पुल। संवाद
विज्ञापन
बांदा। जिले में केन नदी पर स्थित ब्रिटिशकालीन रेल पुल को तकनीकी अधिकारियों द्वारा जांच के बाद अगले 50 वर्षों के लिए पूरी तरह से फिट घोषित किया गया है। यह ऐतिहासिक पुल, जो ब्रिटिश शासन काल में 1889 में निर्मित हुआ था, अभी भी अपनी मजबूती बनाए हुए है। रेल मंत्रालय द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले कड़े निरीक्षणों के बाद इसे यह प्रमाणपत्र मिला है।
रेलवे के तकनीकी अधिकारियों की एक टीम ने वर्ष 1965 में इस पुल की गहन जांच की थी और तब इसे अगले 60 वर्षों तक के लिए उपयुक्त बताया था। अब, हालिया निरीक्षणों में भी इसकी फिटनेस की पुष्टि हुई है। मंडलीय अभियंता कार्य (एईएन) ने बताया कि मंडल स्तर की तकनीकी अधिकारियों की टीम हर साल पुराने पुलों की गुणवत्ता का परीक्षण करती है। यदि कोई खामी पाई जाती है, तो उसकी मरम्मत की जाती है।
इसके अतिरिक्त, हर पांच साल में केंद्रीय तकनीकी अधिकारियों की एक टीम भी पुलों का परीक्षण करती है। यह टीम पुलों की मियाद बढ़ाने या उन्हें कंडम घोषित करने की रिपोर्ट भी देती है। बांदा का यह पुल सभी मानकों पर खरा उतरा है और इसे अगले 50 वर्षों तक के लिए सुरक्षित माना गया है।
झांसी-मानिकपुर रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य
वर्तमान में, झांसी-मानिकपुर रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना के तहत, केन नदी पर पुराने पुल के बगल में ही 90 करोड़ रुपये की लागत से एक नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस नए पुल का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
दोहरीकरण कार्य में प्रगति
रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है। खैरार जंक्शन से केन पुल भूरागढ़ तक मिट्टी का काम पूरा हो चुका है। पुल का निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद, ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। यह दोहरीकरण परियोजना क्षेत्र में रेल यातायात को सुगम बनाने और क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Trending Videos
रेलवे के तकनीकी अधिकारियों की एक टीम ने वर्ष 1965 में इस पुल की गहन जांच की थी और तब इसे अगले 60 वर्षों तक के लिए उपयुक्त बताया था। अब, हालिया निरीक्षणों में भी इसकी फिटनेस की पुष्टि हुई है। मंडलीय अभियंता कार्य (एईएन) ने बताया कि मंडल स्तर की तकनीकी अधिकारियों की टीम हर साल पुराने पुलों की गुणवत्ता का परीक्षण करती है। यदि कोई खामी पाई जाती है, तो उसकी मरम्मत की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके अतिरिक्त, हर पांच साल में केंद्रीय तकनीकी अधिकारियों की एक टीम भी पुलों का परीक्षण करती है। यह टीम पुलों की मियाद बढ़ाने या उन्हें कंडम घोषित करने की रिपोर्ट भी देती है। बांदा का यह पुल सभी मानकों पर खरा उतरा है और इसे अगले 50 वर्षों तक के लिए सुरक्षित माना गया है।
झांसी-मानिकपुर रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य
वर्तमान में, झांसी-मानिकपुर रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना के तहत, केन नदी पर पुराने पुल के बगल में ही 90 करोड़ रुपये की लागत से एक नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस नए पुल का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
दोहरीकरण कार्य में प्रगति
रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है। खैरार जंक्शन से केन पुल भूरागढ़ तक मिट्टी का काम पूरा हो चुका है। पुल का निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद, ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। यह दोहरीकरण परियोजना क्षेत्र में रेल यातायात को सुगम बनाने और क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
