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Banda News: आजमगढ़ से कबरई आकर खड़ा किया कारोबार, हादसे ने उजाड़ा परिवार
Fri, 15 May 2026 12:50 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 15 May 2026 12:50 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हादसे में जान गंवाने वाले अजीत विश्वकर्मा सिर्फ परिवार के जिम्मेदार बेटे ही नहीं, बल्कि कबरई के उभरते कारोबारियों में भी गिने जाते थे। 35 साल पहले उनके पिता दिवंगत राममिलन विश्वकर्मा ने आजमगढ़ के रामगढ़ गांव से निकलकर महोबा के कबरई में मेहनत और संघर्ष के दम पर कारोबार की नींव रखी थी। अब सड़क हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया है।
राममिलन विश्वकर्मा अपने भाइयों के साथ रोजी-रोटी की तलाश में कबरई आए थे। उस समय कबरई में पत्थर कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। इसी को देखते हुए उन्होंने डंपर की बॉडी बनाने और क्रशर मशीनों के पार्ट तैयार करने का कारखाना शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग आई और परिवार का कारोबार इलाके में पहचान बनाने लगा। बताया जाता है कि राममिलन की मेहनत और व्यवहार के चलते व्यापार लगातार बढ़ता गया। बाद में पिता की मौत के बाद पूरे कारोबार की जिम्मेदारी अजीत के कंधों पर आ गई। कम उम्र में ही उसने व्यापार संभाल लिया और अपने व्यवहार व कामकाज के चलते कबरई के प्रतिष्ठित व्यापारियों में शामिल हो गया।
अजीत मिलनसार स्वभाव का था और कारोबार के साथ परिवार को भी बराबर समय देता था। उसकी तीन साल पहले शादी हुई थी और उसका डेढ़ साल का बेटा है। तीन बहनों के बीच वह इकलौता भाई था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन हादसे ने सब कुछ बदल दिया। बृहस्पतिवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में अजीत समेत परिवार के चार लोगों की मौत के बाद कबरई में शोक की लहर है। व्यापारियों और परिचितों ने इसे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
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राममिलन विश्वकर्मा अपने भाइयों के साथ रोजी-रोटी की तलाश में कबरई आए थे। उस समय कबरई में पत्थर कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। इसी को देखते हुए उन्होंने डंपर की बॉडी बनाने और क्रशर मशीनों के पार्ट तैयार करने का कारखाना शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग आई और परिवार का कारोबार इलाके में पहचान बनाने लगा। बताया जाता है कि राममिलन की मेहनत और व्यवहार के चलते व्यापार लगातार बढ़ता गया। बाद में पिता की मौत के बाद पूरे कारोबार की जिम्मेदारी अजीत के कंधों पर आ गई। कम उम्र में ही उसने व्यापार संभाल लिया और अपने व्यवहार व कामकाज के चलते कबरई के प्रतिष्ठित व्यापारियों में शामिल हो गया।
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अजीत मिलनसार स्वभाव का था और कारोबार के साथ परिवार को भी बराबर समय देता था। उसकी तीन साल पहले शादी हुई थी और उसका डेढ़ साल का बेटा है। तीन बहनों के बीच वह इकलौता भाई था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन हादसे ने सब कुछ बदल दिया। बृहस्पतिवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में अजीत समेत परिवार के चार लोगों की मौत के बाद कबरई में शोक की लहर है। व्यापारियों और परिचितों ने इसे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
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