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Banda News: किसानों पर मंडरा रहा ठंड और कोहरे का साया, फसलें खतरे में
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फोटो- 11 खप्टिहा में खेतों में फूल रही मटर की फसल। संवाद
फोटो- 12 पैलानी में खेतों में फूल रही अरहर की फसल। संवाद
फोटो- 13 नरैनी में सरसों के खेत में सिर पकड़ कर बैठा किसान। संवाद
- ठंड व कोहरे से गिरने लगे फसलों के फूल
- चना, मटर, सरसों में फफूंद व माहू कीट
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान एक बार फिर मानसूनी आपदा के कगार पर खड़े हैं। पिछले पंद्रह दिनों से छाए घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। दिन भर धूप न निकलने के कारण सरसों, मटर, मसूर और अरहर जैसी नकदी फसलें सूखने और खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों के अनुसार, पाले के कारण पौधों के फूल गिर रहे हैं, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गिरते तापमान और वातावरण में अधिक नमी (70 से 100 फीसदी) फसलों में झुलसा और फफूंद रोग को बढ़ावा दे रही है।
पैलानी, नरैनी और अतर्रा जैसे क्षेत्रों से आ रही खबरें चिंताजनक हैं। खप्टिहा कलां के किसान मनोज पांडे बताते हैं कि अरहर, मटर और सरसों के फूल झड़ रहे हैं, और कुछ जगहों पर पौधे सूखने लगे हैं। चने की फसल में ''जोरई'' नामक कीट लगने से फल अंदर से खोखले हो रहे हैं। नरैनी के किसानों ने सरसों और चने पर ''माहू'' व ''जुरई'' कीटों के प्रकोप की सूचना दी है, जो उत्पादन को काफी कम कर सकते हैं। खरीफ की फसल पहले ही अतिवृष्टि से बर्बाद हो चुकी थी, और अब रबी की फसल पर पाला और कीटों का खतरा मंडरा रहा है। किसान चंद्रिका ने बताया कि उनके दस बीघा खेत में से पांच बीघा में बोई गई सरसों और चने की फसल कोहरे और ठंड से प्रभावित हुई है।
किसानों ने बताई परेशानी
फोटो - 14 किसान चंद्रिका।
नरैनी के बल्देव पुरवा के किसान चंद्रिका ने कहना कि लामा ख़ुटला में 10 बीघा खेती है, जिसमें से पांच बीघा में सरसों और चना की बुआई की गई थी। कोहरा और ठंड लगने से फसलों के फूल झड़ रहे हैं। उधर, चना, मसूर, मटर, सरसों में कीट लगने लगे है।
फोटो - 15 किसान जर्नादन।
खप्टिहा के किसान जनार्दन सिंह का कहना है कि 10 बीघे में चना, पांच में सरसों और पांच में मसूर बोया था। फसलों में माहू, जुरई आदि कीट लगने लगे है। सुबह के समय खेतों में फसलों के फूल जमीन में पड़े मिलते है। रात में पानी की बूंद बर्फ बन जाती है।
धूप कम मिलने से रुक जाती बढ़वार, झड़ते हैं फूल
पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर ही रही बर्फ वारी के कारण सर्दी का असर बढ़ने की संभावना है, कोहरे का प्रकोप भी बना रहेगा। ठंड और कोहरे के कारण दलहन (चना मटर मसूर अरहर) एवं तिलहन (सरसों, अलसी) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। धूप कम मिलने या न मिलने के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं हो पाती है फलस्वरूप फसलों के बढ़वार रुक जाता है वातावरण में नमी की अत्यधिक मात्रा से कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। फूल झड़ने लगते हैं।
चार्ट
पिछले तीन दिन का तापमान
दिन न्यूनतम अधिकतम
सोमवार 7.0 17.1
मंगलवार 7.45 17.0
बुधवार 7.4 16.2
बृहस्पतिवार 8.30 17.8
कृषि विभाग ने बचाव के उपाय सुझाए
उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। चना और मटर में फफूंद लगने पर मैनकोजेब, कार्बेंडाजिम, इमिडावक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर कात्यायनी डीमैट जैसी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फसलों में धुआं करके और हल्की सिंचाई करके भी बचाव किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी दवा का प्रयोग कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना न करने की हिदायत दी गई है।
वैज्ञानिक परामर्श और बचाव के उपाय
पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी से सर्दी का असर बढ़ने की संभावना है, जिससे कोहरे का प्रकोप बना रहेगा। यह स्थिति दलहन (चना, मटर, मसूर, अरहर) और तिलहन (सरसों, अलसी) के लिए हानिकारक है। धूप की कमी से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार बाधित होती है और फूल गिरते हैं। उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग करें। चना और मटर में फफूंद लगने पर मैनकोजेब या कार्बेंडाजिम जैसे फफूंदनाशक का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर उचित कीटनाशक का प्रयोग करें। देसी उपाय के तौर पर फसलों में धुआं करना और हल्की सिंचाई करना भी फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, कोई भी दवा कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना इस्तेमाल न करें
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फोटो- 12 पैलानी में खेतों में फूल रही अरहर की फसल। संवाद
फोटो- 13 नरैनी में सरसों के खेत में सिर पकड़ कर बैठा किसान। संवाद
- ठंड व कोहरे से गिरने लगे फसलों के फूल
- चना, मटर, सरसों में फफूंद व माहू कीट
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान एक बार फिर मानसूनी आपदा के कगार पर खड़े हैं। पिछले पंद्रह दिनों से छाए घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। दिन भर धूप न निकलने के कारण सरसों, मटर, मसूर और अरहर जैसी नकदी फसलें सूखने और खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों के अनुसार, पाले के कारण पौधों के फूल गिर रहे हैं, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गिरते तापमान और वातावरण में अधिक नमी (70 से 100 फीसदी) फसलों में झुलसा और फफूंद रोग को बढ़ावा दे रही है।
पैलानी, नरैनी और अतर्रा जैसे क्षेत्रों से आ रही खबरें चिंताजनक हैं। खप्टिहा कलां के किसान मनोज पांडे बताते हैं कि अरहर, मटर और सरसों के फूल झड़ रहे हैं, और कुछ जगहों पर पौधे सूखने लगे हैं। चने की फसल में ''जोरई'' नामक कीट लगने से फल अंदर से खोखले हो रहे हैं। नरैनी के किसानों ने सरसों और चने पर ''माहू'' व ''जुरई'' कीटों के प्रकोप की सूचना दी है, जो उत्पादन को काफी कम कर सकते हैं। खरीफ की फसल पहले ही अतिवृष्टि से बर्बाद हो चुकी थी, और अब रबी की फसल पर पाला और कीटों का खतरा मंडरा रहा है। किसान चंद्रिका ने बताया कि उनके दस बीघा खेत में से पांच बीघा में बोई गई सरसों और चने की फसल कोहरे और ठंड से प्रभावित हुई है।
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किसानों ने बताई परेशानी
फोटो - 14 किसान चंद्रिका।
नरैनी के बल्देव पुरवा के किसान चंद्रिका ने कहना कि लामा ख़ुटला में 10 बीघा खेती है, जिसमें से पांच बीघा में सरसों और चना की बुआई की गई थी। कोहरा और ठंड लगने से फसलों के फूल झड़ रहे हैं। उधर, चना, मसूर, मटर, सरसों में कीट लगने लगे है।
फोटो - 15 किसान जर्नादन।
खप्टिहा के किसान जनार्दन सिंह का कहना है कि 10 बीघे में चना, पांच में सरसों और पांच में मसूर बोया था। फसलों में माहू, जुरई आदि कीट लगने लगे है। सुबह के समय खेतों में फसलों के फूल जमीन में पड़े मिलते है। रात में पानी की बूंद बर्फ बन जाती है।
धूप कम मिलने से रुक जाती बढ़वार, झड़ते हैं फूल
पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर ही रही बर्फ वारी के कारण सर्दी का असर बढ़ने की संभावना है, कोहरे का प्रकोप भी बना रहेगा। ठंड और कोहरे के कारण दलहन (चना मटर मसूर अरहर) एवं तिलहन (सरसों, अलसी) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। धूप कम मिलने या न मिलने के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं हो पाती है फलस्वरूप फसलों के बढ़वार रुक जाता है वातावरण में नमी की अत्यधिक मात्रा से कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। फूल झड़ने लगते हैं।
चार्ट
पिछले तीन दिन का तापमान
दिन न्यूनतम अधिकतम
सोमवार 7.0 17.1
मंगलवार 7.45 17.0
बुधवार 7.4 16.2
बृहस्पतिवार 8.30 17.8
कृषि विभाग ने बचाव के उपाय सुझाए
उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। चना और मटर में फफूंद लगने पर मैनकोजेब, कार्बेंडाजिम, इमिडावक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर कात्यायनी डीमैट जैसी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फसलों में धुआं करके और हल्की सिंचाई करके भी बचाव किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी दवा का प्रयोग कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना न करने की हिदायत दी गई है।
वैज्ञानिक परामर्श और बचाव के उपाय
पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी से सर्दी का असर बढ़ने की संभावना है, जिससे कोहरे का प्रकोप बना रहेगा। यह स्थिति दलहन (चना, मटर, मसूर, अरहर) और तिलहन (सरसों, अलसी) के लिए हानिकारक है। धूप की कमी से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार बाधित होती है और फूल गिरते हैं। उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग करें। चना और मटर में फफूंद लगने पर मैनकोजेब या कार्बेंडाजिम जैसे फफूंदनाशक का छिड़काव करें। सरसों में माहू लगने पर उचित कीटनाशक का प्रयोग करें। देसी उपाय के तौर पर फसलों में धुआं करना और हल्की सिंचाई करना भी फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, कोई भी दवा कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना इस्तेमाल न करें
