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Banda News: दावों पर शक...जीआईसी में नहीं गणित और विज्ञान के शिक्षक
Sat, 01 Aug 2026 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:36 PM IST
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01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद
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मऊ (चित्रकूट)। सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के खूब दावे किए जा रहे हैं। वहीं ब्लॉक मऊ के गांव मंडौर के दो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर इन दावों के विपरीत है।
राजकीय हाईस्कूल में गणित, विज्ञान, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद भी लंबे समय से खाली है। शिक्षकों की कमी के अलावा इनमें कई खामियां हैं। भूमि विवाद के चलते जीआईसी में मुख्य गेट निर्माण फंसा है। इस कारण छुट्टा पशु दिनभर विद्यालय परिसर में घूमते रहते हैं। पूमावि में रसोईघर में गंदगी है।
केस-1 राजकीय हाईस्कूल मंडौर
राजकीय हाईस्कूल मंडौर में कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई होती है। विद्यालय में 180 छात्र-छात्राएं हैं लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। वर्तमान में प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार भार्गव निजी कारणों से अवकाश पर हैं। विद्यालय में केवल अंग्रेजी शिक्षक सतीश कुमार सिंह, हिंदी की शिक्षिका प्रतिभा वैश्य और व्यायाम शिक्षक अखिलेश कार्यरत हैं।
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गणित, विज्ञान, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी में छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होती है। भूमि विवाद के चलते आज तक विद्यालय का मुख्य गेट नहीं बन सका।
यह है नियम-
माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक विषय के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षक की व्यवस्था का प्रावधान है। 180 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में सामान्यतः 8 से 10 शिक्षकों की आवश्यकता होती है, जबकि यहां केवल चार शिक्षक तैनात हैं और उनमें भी प्रधानाचार्य अवकाश पर हैं।
केस-2 - उच्च प्राथमिक विद्यालय मंडौर
मंडौर का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी से जूझ रहा है। विद्यालय में 132 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं जबकि निरीक्षण के समय 85 छात्र उपस्थित मिले। यहां प्रधानाध्यापक का पद लंबे समय से रिक्त है।
विद्यालय का संचालन प्रभारी शिक्षक भोलाराम कर रहे हैं। उनके साथ महेश प्रसाद और आनंद कुमार गुप्ता कार्यरत हैं। विद्यालय के रसोईघर में गंदगी मिली। प्रभारी शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में गैस सिलिंडर उपलब्ध है लेकिन भोजन चूल्हे पर तैयार किया गया। सफाईकर्मी नियमित रूप से नहीं आता, जिससे रसोईघर और परिसर में साफ-सफाई की स्थिति खराब बनी रहती है। वहीं शौचालय में भी ताला लगा हुआ है।
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नियम-
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक तथा 100 से अधिक छात्र होने पर प्रधानाध्यापक का प्रावधान है। 132 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में नियमित प्रधानाध्यापक का होना आवश्यक है।
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वर्जन
प्रधानाध्यापक पद के लिए भर्ती जल्द होगी। इसके साथ विद्यालयों में नियमित साफ सफाई के लिए निर्देश दिए है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश भी दिए गए है। इसके बाद भी कहीं नहीं हो रही है तो इसको दिखवाकर खंड शिक्षा अधिकारी से जवाब लिया जाएगा। - रंजना शुक्ला, बीएसए
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राजकीय हाईस्कूल में गणित, विज्ञान, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद भी लंबे समय से खाली है। शिक्षकों की कमी के अलावा इनमें कई खामियां हैं। भूमि विवाद के चलते जीआईसी में मुख्य गेट निर्माण फंसा है। इस कारण छुट्टा पशु दिनभर विद्यालय परिसर में घूमते रहते हैं। पूमावि में रसोईघर में गंदगी है।
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केस-1 राजकीय हाईस्कूल मंडौर
राजकीय हाईस्कूल मंडौर में कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई होती है। विद्यालय में 180 छात्र-छात्राएं हैं लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। वर्तमान में प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार भार्गव निजी कारणों से अवकाश पर हैं। विद्यालय में केवल अंग्रेजी शिक्षक सतीश कुमार सिंह, हिंदी की शिक्षिका प्रतिभा वैश्य और व्यायाम शिक्षक अखिलेश कार्यरत हैं।
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गणित, विज्ञान, गृह विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी में छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होती है। भूमि विवाद के चलते आज तक विद्यालय का मुख्य गेट नहीं बन सका।
यह है नियम-
माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक विषय के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षक की व्यवस्था का प्रावधान है। 180 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में सामान्यतः 8 से 10 शिक्षकों की आवश्यकता होती है, जबकि यहां केवल चार शिक्षक तैनात हैं और उनमें भी प्रधानाचार्य अवकाश पर हैं।
केस-2 - उच्च प्राथमिक विद्यालय मंडौर
मंडौर का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी से जूझ रहा है। विद्यालय में 132 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं जबकि निरीक्षण के समय 85 छात्र उपस्थित मिले। यहां प्रधानाध्यापक का पद लंबे समय से रिक्त है।
विद्यालय का संचालन प्रभारी शिक्षक भोलाराम कर रहे हैं। उनके साथ महेश प्रसाद और आनंद कुमार गुप्ता कार्यरत हैं। विद्यालय के रसोईघर में गंदगी मिली। प्रभारी शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में गैस सिलिंडर उपलब्ध है लेकिन भोजन चूल्हे पर तैयार किया गया। सफाईकर्मी नियमित रूप से नहीं आता, जिससे रसोईघर और परिसर में साफ-सफाई की स्थिति खराब बनी रहती है। वहीं शौचालय में भी ताला लगा हुआ है।
नियम-
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक तथा 100 से अधिक छात्र होने पर प्रधानाध्यापक का प्रावधान है। 132 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में नियमित प्रधानाध्यापक का होना आवश्यक है।
वर्जन
प्रधानाध्यापक पद के लिए भर्ती जल्द होगी। इसके साथ विद्यालयों में नियमित साफ सफाई के लिए निर्देश दिए है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश भी दिए गए है। इसके बाद भी कहीं नहीं हो रही है तो इसको दिखवाकर खंड शिक्षा अधिकारी से जवाब लिया जाएगा। - रंजना शुक्ला, बीएसए

01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद

01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद

01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद

01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद

01 सीकेटीपी-18-विद्यालय के प्रवेश द्वार से गायब गेट। संवाद