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Banda News: पशु अस्पताल या खंडहर...घुसने में लग रहा डर
Sat, 01 Aug 2026 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:25 PM IST
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फोटो 3-खंडहर में तब्दील हुआ खप्टिहा कला का पशु अस्पताल। संवाद
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बांदा/बबेरू/नरैनी/करतल। पशु अस्पताल बांदा मुख्यालय का हो या ग्रामीण इलाके का। इन्हें शासन से तत्काल इलाज की दरकार है। इन अस्पतालों में न तो स्टाफ है और न ही कोई व्यवस्था।
बेजुबानों का इलाज करने वाले जर्जर भवनों में चल रहे पशु अस्पतालों में कहीं छत और दीवारों में दरारें हैं तो कहीं पानी टपक रहा है। स्टाफ का कहना है कि यहां बैठकर इलाज करना खतरे से खाली नहीं है। बारिश में खंडहर इमारतें ढहने का डर लगा रहता है।
शहर के स्टेडियम रोड पर स्थित पशु अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। यहां स्टाफ ने अपनी व्यवस्था जर्जर भवन के सामने बनी लैब की इमारत में कर ली है। डॉक्टर भी यहीं पर बैठते हैं और पशुओं का इलाज करते हैं। बबेरू संवाद के अनुसार कस्बा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय केवल एक डाॅक्टर के सहारे चल रहा है।
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अस्पताल की 50 साल पुरानी इमारत जर्जर हो चुकी है। बारिश होने पर यहां काम करना मुश्किल होता है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष कुमार ने बताया कि भवन के नवीनीकरण के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। उधर, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी संतोष और वाहन चालक की तैनाती है। उन्हें अस्पताल के साथ गोशाला भी जाना पड़ता है। अस्पताल पर 61 गांवों के 56 हजार से अधिक पशुओं की सेहत की जिम्मेदारी है।
राजकीय पशु चिकित्सालय नरैनी का लगभग 60 वर्ष पुराना भवन जर्जर हो चुका है। भवन में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। बारिश के मौसम में यहां कामकाज करना भी चुनौती है। विभाग की ओर से कई बार नए भवन के निर्माण के लिए पत्राचार किया जा चुका है। विकास खंड नरैनी की 83 ग्राम पंचायतों में कुल 71,877 पशु हैं।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी नरैनी विजय कमल ने बताया कि जर्जर भवन के संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। पशु चिकित्सालय करतल में भी स्टाफ की कमी है। पिछले दो वर्षों से पूरे अस्पताल का संचालन केवल पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार के भरोसे हो रहा है।
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तिंदवारी में फार्मासिस्ट व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी
तिंदवारी संवाद के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र में चार पशु चिकित्सा केंद्र हैं। इसमें पलरा, तिंदवारी, पैलानी, बेंदा घाट है। दो पशु सेवा केंद्र भी संचालित हैं। जो खप्टिहा और अतरहट में चल रहे हैं। चार पशु चिकित्सा केंद्रों में से बेंदा और पलरा में चिकित्सक की तैनाती है। पलरा में तैनात चिकित्सा अधिकारी पैलानी का कार्यभार भी देखते हैं।
बेंदा में तैनात चिकित्सा अधिकारी तिंदवारी का भी कार्यभार देख रहे हैं। तिंदवारी में तैनात फार्मासिस्ट जसपुरा, पैलानी, बेंदा क्षेत्र का कार्यभार देखते हैं। अतरहट में पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती है। बेंदा में प्रभारी चिकित्साधिकारी और चपरासी की तैनाती है। तिंदवारी में फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी की तैनाती है।
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कालिंजर से गायब पशु अस्पताल, न भवन न डाक्टर, 15 गांवों के मवेशियों का इलाज मुश्किल
कालिंजर। राजकीय पशु अस्पताल कालिंजर पूरी तरह से अपना अस्तित्व खो चुका है। यहां का अस्पताल सरकारी की जगह किराये के भवन में चल रहा है लेकिन किराये के भवन का अस्पताल भी कहां है, किसी को पता नहीं।
पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है। केवल एक कर्मचारी है। ग्रामीण कर्मचारी पर नियमित न आने का आरोप लगाते हैं। क्षेत्र के करीब 15 गांवों के पशुपालकों को अपने जानवरों के इलाज के लिए भटकना पड़ता है। इस समस्या से कालिंजर, कटरा, बहादुरपुर, भवानीपुर, तलैया पुरवा सातोंगंज, भारतपुर, मसौनी, पहाड़ी, रानीपुर, पुरैनिया सौता सहित लगभग 15 गांवों के पशुपालक प्रभावित हैं।
किसान रोहित कुशवाहा, कमलेश मिश्रा, सुनील पाठक, महफूज अली, कोमल कुशवाहा का कहना है कि कालिंजर में तत्काल पशु चिकित्साधिकारी की नियुक्ति कर पशु चिकित्सालय का संचालन फिर से शुरू कराया जाए। (संवाद)
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स्टाफ का टोटा, सेवाएं प्रभावित
अतर्रा। कस्बा के नरैनी मार्ग स्थित पशु चिकित्सालय में बीते एक महीने से ज्यादा समय से तैनात डाॅक्टर निर्मल कुमार गुप्ता को इस समय मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का प्रभार मिला हुआ है। अस्पताल एक फार्मासिस्ट अशोक कुमार वर्मा व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अनमोल सिंह यादव के भरोसे ही है।
फार्मासिस्ट ने बताया कि रोजाना सात से दस पशुपालक मवेशियों के उपचार के लिए अस्पताल आते है। अस्पताल परिसर में 2008 में बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत बने मीटिंग हाल पर खिड़की का छज्जा क्षतिग्रस्त होकर लटक रहा है। जिससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है। (संवाद)
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खप्टिहा कलां पशु चिकित्सालय 10 साल से खंडहर, भर दिया भूसा
पैलानी में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में पिछले दो साल से कोई भी डॉक्टर नहीं है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष गुप्ता ने बताया की हफ्ते में तीन दिन मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार को पलरा पशु चिकित्सालय में ड्यूटी है। शुक्रवार, शनिवार, सोमवार को पैलानी पशु चिकित्सालय में ड्यूटी रहती है। मात्र एक कर्मचारी तैनात है।
खप्टिहा कलां कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय 10 साल से खंडहर में तब्दील पड़ा है। यहां न तो भवन सुरक्षित है और न ही कोई डाक्टर व कर्मचारी की तैनाती की जा सकी है।
चिकित्सालय में भूसा भर दिया गया है। ग्रामीण बुधराज यादव, राजेंद्र यादव, उमाशंकर द्विवेदी, बाबूलाल यादव, ने बताया है कि जानवरों की बीमारी के दौरान उन्हें पैलानी पशु चिकित्सालय के अलावा आसपास के प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है।
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वर्जन
नए निर्माण के लिए चल रहा पत्राचार
जिन जगहों के पशु अस्पताल जर्जर होकर निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। उनकी जगह पर नए अस्पताल के निर्माण के लिए शासन को पत्राचार नियमित रूप से किया जा रहा है। बांदा में नए पशु अस्पताल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू है। स्टाफ की कमी काफी समय से है और नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। शासन स्तर पर आउटसोर्सिंग के जरिये इस समस्या को खत्म करने पर विचार चल रहा है लेकिन अभी तक कोई परिणाम आया नहीं है।
डॉक्टर निर्मल गुप्ता, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा।
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बेजुबानों का इलाज करने वाले जर्जर भवनों में चल रहे पशु अस्पतालों में कहीं छत और दीवारों में दरारें हैं तो कहीं पानी टपक रहा है। स्टाफ का कहना है कि यहां बैठकर इलाज करना खतरे से खाली नहीं है। बारिश में खंडहर इमारतें ढहने का डर लगा रहता है।
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शहर के स्टेडियम रोड पर स्थित पशु अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। यहां स्टाफ ने अपनी व्यवस्था जर्जर भवन के सामने बनी लैब की इमारत में कर ली है। डॉक्टर भी यहीं पर बैठते हैं और पशुओं का इलाज करते हैं। बबेरू संवाद के अनुसार कस्बा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय केवल एक डाॅक्टर के सहारे चल रहा है।
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अस्पताल की 50 साल पुरानी इमारत जर्जर हो चुकी है। बारिश होने पर यहां काम करना मुश्किल होता है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष कुमार ने बताया कि भवन के नवीनीकरण के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। उधर, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी संतोष और वाहन चालक की तैनाती है। उन्हें अस्पताल के साथ गोशाला भी जाना पड़ता है। अस्पताल पर 61 गांवों के 56 हजार से अधिक पशुओं की सेहत की जिम्मेदारी है।
राजकीय पशु चिकित्सालय नरैनी का लगभग 60 वर्ष पुराना भवन जर्जर हो चुका है। भवन में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। बारिश के मौसम में यहां कामकाज करना भी चुनौती है। विभाग की ओर से कई बार नए भवन के निर्माण के लिए पत्राचार किया जा चुका है। विकास खंड नरैनी की 83 ग्राम पंचायतों में कुल 71,877 पशु हैं।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी नरैनी विजय कमल ने बताया कि जर्जर भवन के संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। पशु चिकित्सालय करतल में भी स्टाफ की कमी है। पिछले दो वर्षों से पूरे अस्पताल का संचालन केवल पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार के भरोसे हो रहा है।
तिंदवारी में फार्मासिस्ट व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी
तिंदवारी संवाद के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र में चार पशु चिकित्सा केंद्र हैं। इसमें पलरा, तिंदवारी, पैलानी, बेंदा घाट है। दो पशु सेवा केंद्र भी संचालित हैं। जो खप्टिहा और अतरहट में चल रहे हैं। चार पशु चिकित्सा केंद्रों में से बेंदा और पलरा में चिकित्सक की तैनाती है। पलरा में तैनात चिकित्सा अधिकारी पैलानी का कार्यभार भी देखते हैं।
बेंदा में तैनात चिकित्सा अधिकारी तिंदवारी का भी कार्यभार देख रहे हैं। तिंदवारी में तैनात फार्मासिस्ट जसपुरा, पैलानी, बेंदा क्षेत्र का कार्यभार देखते हैं। अतरहट में पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती है। बेंदा में प्रभारी चिकित्साधिकारी और चपरासी की तैनाती है। तिंदवारी में फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी की तैनाती है।
कालिंजर से गायब पशु अस्पताल, न भवन न डाक्टर, 15 गांवों के मवेशियों का इलाज मुश्किल
कालिंजर। राजकीय पशु अस्पताल कालिंजर पूरी तरह से अपना अस्तित्व खो चुका है। यहां का अस्पताल सरकारी की जगह किराये के भवन में चल रहा है लेकिन किराये के भवन का अस्पताल भी कहां है, किसी को पता नहीं।
पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है। केवल एक कर्मचारी है। ग्रामीण कर्मचारी पर नियमित न आने का आरोप लगाते हैं। क्षेत्र के करीब 15 गांवों के पशुपालकों को अपने जानवरों के इलाज के लिए भटकना पड़ता है। इस समस्या से कालिंजर, कटरा, बहादुरपुर, भवानीपुर, तलैया पुरवा सातोंगंज, भारतपुर, मसौनी, पहाड़ी, रानीपुर, पुरैनिया सौता सहित लगभग 15 गांवों के पशुपालक प्रभावित हैं।
किसान रोहित कुशवाहा, कमलेश मिश्रा, सुनील पाठक, महफूज अली, कोमल कुशवाहा का कहना है कि कालिंजर में तत्काल पशु चिकित्साधिकारी की नियुक्ति कर पशु चिकित्सालय का संचालन फिर से शुरू कराया जाए। (संवाद)
स्टाफ का टोटा, सेवाएं प्रभावित
अतर्रा। कस्बा के नरैनी मार्ग स्थित पशु चिकित्सालय में बीते एक महीने से ज्यादा समय से तैनात डाॅक्टर निर्मल कुमार गुप्ता को इस समय मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का प्रभार मिला हुआ है। अस्पताल एक फार्मासिस्ट अशोक कुमार वर्मा व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अनमोल सिंह यादव के भरोसे ही है।
फार्मासिस्ट ने बताया कि रोजाना सात से दस पशुपालक मवेशियों के उपचार के लिए अस्पताल आते है। अस्पताल परिसर में 2008 में बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत बने मीटिंग हाल पर खिड़की का छज्जा क्षतिग्रस्त होकर लटक रहा है। जिससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है। (संवाद)
खप्टिहा कलां पशु चिकित्सालय 10 साल से खंडहर, भर दिया भूसा
पैलानी में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में पिछले दो साल से कोई भी डॉक्टर नहीं है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष गुप्ता ने बताया की हफ्ते में तीन दिन मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार को पलरा पशु चिकित्सालय में ड्यूटी है। शुक्रवार, शनिवार, सोमवार को पैलानी पशु चिकित्सालय में ड्यूटी रहती है। मात्र एक कर्मचारी तैनात है।
खप्टिहा कलां कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय 10 साल से खंडहर में तब्दील पड़ा है। यहां न तो भवन सुरक्षित है और न ही कोई डाक्टर व कर्मचारी की तैनाती की जा सकी है।
चिकित्सालय में भूसा भर दिया गया है। ग्रामीण बुधराज यादव, राजेंद्र यादव, उमाशंकर द्विवेदी, बाबूलाल यादव, ने बताया है कि जानवरों की बीमारी के दौरान उन्हें पैलानी पशु चिकित्सालय के अलावा आसपास के प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है।
वर्जन
नए निर्माण के लिए चल रहा पत्राचार
जिन जगहों के पशु अस्पताल जर्जर होकर निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। उनकी जगह पर नए अस्पताल के निर्माण के लिए शासन को पत्राचार नियमित रूप से किया जा रहा है। बांदा में नए पशु अस्पताल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू है। स्टाफ की कमी काफी समय से है और नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। शासन स्तर पर आउटसोर्सिंग के जरिये इस समस्या को खत्म करने पर विचार चल रहा है लेकिन अभी तक कोई परिणाम आया नहीं है।
डॉक्टर निर्मल गुप्ता, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा।

फोटो 3-खंडहर में तब्दील हुआ खप्टिहा कला का पशु अस्पताल। संवाद

फोटो 3-खंडहर में तब्दील हुआ खप्टिहा कला का पशु अस्पताल। संवाद

फोटो 3-खंडहर में तब्दील हुआ खप्टिहा कला का पशु अस्पताल। संवाद

फोटो 3-खंडहर में तब्दील हुआ खप्टिहा कला का पशु अस्पताल। संवाद