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Banda News: घर-खेत बने सांपों का ठिकाना
Sun, 09 Aug 2026 10:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 09 Aug 2026 10:45 PM IST
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बांदा। बारिश में सांप कब और कहां से निकल आए, इसका कोई भरोसा नहीं। बारिश में बिलों में पानी भरने से सांप खेत और आबादी में घरों की ओर रुख कर रहे हैं।
जुलाई में ही सर्पदंश से पीड़ित 41 लोग अस्पताल पहुंचे, इनमें 10 लोगों की जान चली गई। इनमें अधिकांश झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे या फिर देर से अस्पताल पहुंचे। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से अब तक रोज औसतन पांच से छह सांपों को रेस्क्यू किया जा रहा है। यह आंकड़ा हर महीने करीब 150 सांपों तक पहुंचता है।
घटनाएं बढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और झाड़-फूंक भी सर्पदंश के मामलों में जानलेवा साबित हो रहा है। कई मामलों में परिजन मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले झाड़-फूंक कराने में घंटों गंवा देते हैं। जब हालत गंभीर होती है तो अस्पताल पहुंचते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती समय (गोल्डन आवर) बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू होने वाले सांपों में करीब 50 से 60 प्रतिशत कोबरा बताए जा रहे हैं। 15 से 20 प्रतिशत तक करैत हैं। दोनों जहरीले सांप हैं। इसके अलावा अजगर भी लगातार रेस्क्यू किए जा रहे हैं। अजगर जहरीला नहीं होता लेकिन उसकी जकड़ जानलेवा हो सकती है।
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डर को हावी न होने दें, तुरंत अस्पताल जाएं : मनोचिकित्सक
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की काउंसलर रिजवाना हाशमी का कहना है कि सर्पदंश के बाद मरीज और परिजन अक्सर बेहद घबरा जाते हैं। मौत के डर की साइकोलॉजी मरीज पर हावी हो जाती है, जिससे वह ज्यादा हिलने-डुलने लगता है। ऐसे में जहर तेजी से फैलने लगता है। ऐसे में मरीज को हिम्मत देते हुए बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
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हाल ही में हुईं सर्पदंश की घटनाएं
- कमासिन के लोहरा गांव में बुधवार रात शशि देवी (3) बड़ी बहन सारिका के साथ बेड पर सो रही थी। इसी दौरान सांप ने उसके हाथ में डस लिया। बच्ची को कमासिन सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
- तिंदवारी के पिपरगवां गांव में बृहस्पतिवार को चारपाई पर सो रही सावित्री (22) को सांप ने डस लिया। जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उधर, बिसंडा के शिव गांव की सुशीला (60), देहात कोतवाली के चहितारा गांव की नेहा (26) और तिंदवारी के सैमरी गांव के भगवानदीन (30) को भी सांप ने डस लिया। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- देहात कोतवाली क्षेत्र के जौरही गांव में झोपड़ी में परिवार के साथ सो रही आरती (12) को सांप ने डस लिया। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
- बबेरू के कोर्रम गांव निवासी हरिशंकर (56) सुबह करीब पांच बजे धुआं करने के लिए तसला उठा रहे थे। तभी सांप ने उन्हें डस लिया। जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
- नरैनी के नौहाई गांव में आरती (12) बृहस्पतिवार को खेत में धान की बेड़ लगा रही थीं। सांप ने उसके पैर में डस लिया। घटना के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय कई घंटे तक झाड़-फूंक कराते रहे। हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी लाया गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
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सांप डसे तो इन बातों का रखें ध्यान
-झाड़-फूंक में समय न गंवाएं। मरीज को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं।
-मरीज को बेवजह चलने-फिरने न दें और शांत रखें।
-सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में खुद जोखिम न लें।
-जरूरत पड़ने पर तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद लें।
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सर्पदंश में चार लाख का मुआवजा
सर्पदंश से मौत होने पर राज्य आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये का मुआवजा मिलता है। व्यक्ति की मौत होने के बाद इसकी सूचना लेखपाल या तहसीलदार कार्यालय में दें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक के वारिस व बैंक की पासबुक की प्रति तहसीलदार या जिला कार्यालय में 15 दिन के अंदर जमा करनी होती है। राजस्व विभाग की टीम प्रमाण पत्रों की जांच के बाद मुआवजा स्वीकृत कर देती है जो डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में पहुंच जाता है। जानकारी के अभाव में अधिकांश लोग इस मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।
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जितने जल्दी पहुंचेंगे अस्पताल, बचने की उम्मीद
सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में घाव पर चीरा न लगाएं और झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। उन्होंने जूते पहनने, टॉर्च रखने और तुरंत सरकारी अस्पताल जाने की अपील की जहां इलाज पूरी तरह निशुल्क है। उन्होंने बताया कि सभी सीएचसी, पीएचसी पर एंटी वेनम वैक्सीन उपलब्ध है, जो सर्पदंश से जान बचाने में पूरी तरह कारगर है। जितने जल्दी मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए, उसके बचने की उतनी ही अधिक संभावना रहती है।
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वर्जन
सर्पदंश के बाद हर मिनट अहम है। मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सकीय उपचार मिलेगा, उसके बचने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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सर्पदंश होने पर हिम्मत से काम लें। मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। सर्प के रेस्क्यू के लिए वन विभाग को सूचना दें।- पंकज कुमार शुक्ला, डीएफओ
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जुलाई में ही सर्पदंश से पीड़ित 41 लोग अस्पताल पहुंचे, इनमें 10 लोगों की जान चली गई। इनमें अधिकांश झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे या फिर देर से अस्पताल पहुंचे। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से अब तक रोज औसतन पांच से छह सांपों को रेस्क्यू किया जा रहा है। यह आंकड़ा हर महीने करीब 150 सांपों तक पहुंचता है।
घटनाएं बढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और झाड़-फूंक भी सर्पदंश के मामलों में जानलेवा साबित हो रहा है। कई मामलों में परिजन मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले झाड़-फूंक कराने में घंटों गंवा देते हैं। जब हालत गंभीर होती है तो अस्पताल पहुंचते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती समय (गोल्डन आवर) बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू होने वाले सांपों में करीब 50 से 60 प्रतिशत कोबरा बताए जा रहे हैं। 15 से 20 प्रतिशत तक करैत हैं। दोनों जहरीले सांप हैं। इसके अलावा अजगर भी लगातार रेस्क्यू किए जा रहे हैं। अजगर जहरीला नहीं होता लेकिन उसकी जकड़ जानलेवा हो सकती है।
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डर को हावी न होने दें, तुरंत अस्पताल जाएं : मनोचिकित्सक
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की काउंसलर रिजवाना हाशमी का कहना है कि सर्पदंश के बाद मरीज और परिजन अक्सर बेहद घबरा जाते हैं। मौत के डर की साइकोलॉजी मरीज पर हावी हो जाती है, जिससे वह ज्यादा हिलने-डुलने लगता है। ऐसे में जहर तेजी से फैलने लगता है। ऐसे में मरीज को हिम्मत देते हुए बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
हाल ही में हुईं सर्पदंश की घटनाएं
- कमासिन के लोहरा गांव में बुधवार रात शशि देवी (3) बड़ी बहन सारिका के साथ बेड पर सो रही थी। इसी दौरान सांप ने उसके हाथ में डस लिया। बच्ची को कमासिन सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
- तिंदवारी के पिपरगवां गांव में बृहस्पतिवार को चारपाई पर सो रही सावित्री (22) को सांप ने डस लिया। जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उधर, बिसंडा के शिव गांव की सुशीला (60), देहात कोतवाली के चहितारा गांव की नेहा (26) और तिंदवारी के सैमरी गांव के भगवानदीन (30) को भी सांप ने डस लिया। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- देहात कोतवाली क्षेत्र के जौरही गांव में झोपड़ी में परिवार के साथ सो रही आरती (12) को सांप ने डस लिया। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
- बबेरू के कोर्रम गांव निवासी हरिशंकर (56) सुबह करीब पांच बजे धुआं करने के लिए तसला उठा रहे थे। तभी सांप ने उन्हें डस लिया। जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
- नरैनी के नौहाई गांव में आरती (12) बृहस्पतिवार को खेत में धान की बेड़ लगा रही थीं। सांप ने उसके पैर में डस लिया। घटना के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय कई घंटे तक झाड़-फूंक कराते रहे। हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी लाया गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
सांप डसे तो इन बातों का रखें ध्यान
-झाड़-फूंक में समय न गंवाएं। मरीज को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं।
-मरीज को बेवजह चलने-फिरने न दें और शांत रखें।
-सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में खुद जोखिम न लें।
-जरूरत पड़ने पर तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद लें।
सर्पदंश में चार लाख का मुआवजा
सर्पदंश से मौत होने पर राज्य आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये का मुआवजा मिलता है। व्यक्ति की मौत होने के बाद इसकी सूचना लेखपाल या तहसीलदार कार्यालय में दें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक के वारिस व बैंक की पासबुक की प्रति तहसीलदार या जिला कार्यालय में 15 दिन के अंदर जमा करनी होती है। राजस्व विभाग की टीम प्रमाण पत्रों की जांच के बाद मुआवजा स्वीकृत कर देती है जो डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में पहुंच जाता है। जानकारी के अभाव में अधिकांश लोग इस मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।
जितने जल्दी पहुंचेंगे अस्पताल, बचने की उम्मीद
सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में घाव पर चीरा न लगाएं और झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। उन्होंने जूते पहनने, टॉर्च रखने और तुरंत सरकारी अस्पताल जाने की अपील की जहां इलाज पूरी तरह निशुल्क है। उन्होंने बताया कि सभी सीएचसी, पीएचसी पर एंटी वेनम वैक्सीन उपलब्ध है, जो सर्पदंश से जान बचाने में पूरी तरह कारगर है। जितने जल्दी मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए, उसके बचने की उतनी ही अधिक संभावना रहती है।
वर्जन
सर्पदंश के बाद हर मिनट अहम है। मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सकीय उपचार मिलेगा, उसके बचने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
सर्पदंश होने पर हिम्मत से काम लें। मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। सर्प के रेस्क्यू के लिए वन विभाग को सूचना दें।- पंकज कुमार शुक्ला, डीएफओ