{"_id":"695ea0501f04637f3e09f53b","slug":"justice-was-won-through-strong-advocacy-and-precise-strategy-banda-news-c-212-1-bnd1018-138674-2026-01-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: मजबूत पैरवी और सटीक रणनीति से जीता इंसाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: मजबूत पैरवी और सटीक रणनीति से जीता इंसाफ
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो- 07 कमल सिंह गौतम, शासकीय अधिवक्ता पाक्सो
फोटो- 08 विजय बहादुर सिंह परिहार, शासकीय अधिवक्ता
- आरोपपत्र की खामियां दूर कर ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ साबित किया मामला
- शासकीय अधिवक्ताओं की मेहनत, संवेदनशील सोच का रहा योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के जघन्य मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के पीछे शासकीय अधिवक्ताओं की अथक मेहनत, संवेदनशील सोच और मजबूत कानूनी रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पॉक्सो मामलों के शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने इस प्रकरण को केवल एक केस के रूप में नहीं, बल्कि हर उस पिता के दर्द से जोड़ा जिसकी बेटी है। उन्होंने घटना को हृदय विदारक बताते हुए कहा कि इसे हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
अक्टूबर में केस सौंपे जाने के बाद से ही कमल सिंह गौतम ने दिन-रात इस पर काम किया। गहन अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि पुलिस द्वारा चार्जशीट में दो गंभीर धाराओं को शामिल नहीं किया गया था। इनमें हाथ तोड़ने की धारा 117(2) और दुष्कर्मी की पहचान छुपाने के उद्देश्य से पीड़िता की जीभ काटने की धारा 118(2) शामिल थीं।
अधिवक्ता ने विवेचक के साथ मिलकर इन खामियों को दूर कराया और अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करवाई, जिससे आरोपी को बचने का कोई अवसर न मिले। इसी सुदृढ़ कानूनी आधार पर मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखकर मौत की सजा सुनिश्चित की जा सकी।
प्रकरण की मॉनिटरिंग कर रहे शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आते ही वे भीतर तक हिल गए थे। ट्रायल के दौरान बच्ची की मानसिक स्थिति ठीक न होने और बोल न पाने जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद, गवाहों और साक्ष्यों की सशक्त प्रस्तुति से आरोप सिद्ध किए गए।
उन्होंने इस फैसले के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास स्थापित करते हैं। यह अपराधियों को एक स्पष्ट संदेश देता है कि बुरे कर्मों का परिणाम अत्यंत कठोर होता है, जिससे वे अपराध करने से पूर्व सौ बार सोचें। इस ऐतिहासिक निर्णय ने न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को साबित किया है।
Trending Videos
फोटो- 08 विजय बहादुर सिंह परिहार, शासकीय अधिवक्ता
- आरोपपत्र की खामियां दूर कर ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ साबित किया मामला
- शासकीय अधिवक्ताओं की मेहनत, संवेदनशील सोच का रहा योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के जघन्य मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के पीछे शासकीय अधिवक्ताओं की अथक मेहनत, संवेदनशील सोच और मजबूत कानूनी रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पॉक्सो मामलों के शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने इस प्रकरण को केवल एक केस के रूप में नहीं, बल्कि हर उस पिता के दर्द से जोड़ा जिसकी बेटी है। उन्होंने घटना को हृदय विदारक बताते हुए कहा कि इसे हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अक्टूबर में केस सौंपे जाने के बाद से ही कमल सिंह गौतम ने दिन-रात इस पर काम किया। गहन अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि पुलिस द्वारा चार्जशीट में दो गंभीर धाराओं को शामिल नहीं किया गया था। इनमें हाथ तोड़ने की धारा 117(2) और दुष्कर्मी की पहचान छुपाने के उद्देश्य से पीड़िता की जीभ काटने की धारा 118(2) शामिल थीं।
अधिवक्ता ने विवेचक के साथ मिलकर इन खामियों को दूर कराया और अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करवाई, जिससे आरोपी को बचने का कोई अवसर न मिले। इसी सुदृढ़ कानूनी आधार पर मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखकर मौत की सजा सुनिश्चित की जा सकी।
प्रकरण की मॉनिटरिंग कर रहे शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आते ही वे भीतर तक हिल गए थे। ट्रायल के दौरान बच्ची की मानसिक स्थिति ठीक न होने और बोल न पाने जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद, गवाहों और साक्ष्यों की सशक्त प्रस्तुति से आरोप सिद्ध किए गए।
उन्होंने इस फैसले के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास स्थापित करते हैं। यह अपराधियों को एक स्पष्ट संदेश देता है कि बुरे कर्मों का परिणाम अत्यंत कठोर होता है, जिससे वे अपराध करने से पूर्व सौ बार सोचें। इस ऐतिहासिक निर्णय ने न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को साबित किया है।