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Banda News: कालिंजर दुर्ग प्रदेश का पहला राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:42 AM IST
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फोटो - 04 कार्यक्रम के दौरान मौजूद अतिथि। संवाद
- फोटो : ट्रामा सेंटर में तीमारदार और स्टॉफ में होती नोकझोंक। वीडियो ग्रैव
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कालिंजर। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ऐतिहासिक कालिंजर किले की पहाड़ी को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित किया है। यह उत्तर प्रदेश का पहला भू-विरासत स्थल बन गया है।
इस घोषणा के उपलक्ष्य में एक समारोह आयोजित हुआ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक राजिंदर कुमार ने इसके भूवैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी नामक असाधारण घटना का प्रमाण है। यहां 2.5 अरब वर्ष पुरानी बुंदेलखंड ग्रेनाइट और 1.2 अरब वर्ष पुरानी कैमूर बलुआ पत्थर की परतें करोड़ों वर्षों का इतिहास दर्शाती हैं। यह स्थल पृथ्वी के समय के विशाल अभिलेखागार के रूप में महत्वपूर्ण है। इसने ऐतिहासिक राजवंशों को सामरिक सुरक्षा भी प्रदान की थी। किले की दीवारों में प्रयुक्त स्थानीय पत्थर यहां की अनूठी भू-सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। इस घोषणा से क्षेत्र के पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। विमल प्रकाश गौड़, हेमंत कुमार (निदेशक), देवाशीष शुक्ला (प्रभारी निदेशक), तथा वरिष्ठ भूवैज्ञानिक अभिषेक शुक्ला और मयंक साहू, एसडीएम अमित कुमार शुक्ला, गौतम कुमार दिनकर (क्षेत्रीय अधिकारी प्रयागराज), खनिज अधिकारी राज रंजन कुमार, सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी मौजूद रहे।
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इस घोषणा के उपलक्ष्य में एक समारोह आयोजित हुआ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक राजिंदर कुमार ने इसके भूवैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी नामक असाधारण घटना का प्रमाण है। यहां 2.5 अरब वर्ष पुरानी बुंदेलखंड ग्रेनाइट और 1.2 अरब वर्ष पुरानी कैमूर बलुआ पत्थर की परतें करोड़ों वर्षों का इतिहास दर्शाती हैं। यह स्थल पृथ्वी के समय के विशाल अभिलेखागार के रूप में महत्वपूर्ण है। इसने ऐतिहासिक राजवंशों को सामरिक सुरक्षा भी प्रदान की थी। किले की दीवारों में प्रयुक्त स्थानीय पत्थर यहां की अनूठी भू-सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। इस घोषणा से क्षेत्र के पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। विमल प्रकाश गौड़, हेमंत कुमार (निदेशक), देवाशीष शुक्ला (प्रभारी निदेशक), तथा वरिष्ठ भूवैज्ञानिक अभिषेक शुक्ला और मयंक साहू, एसडीएम अमित कुमार शुक्ला, गौतम कुमार दिनकर (क्षेत्रीय अधिकारी प्रयागराज), खनिज अधिकारी राज रंजन कुमार, सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी मौजूद रहे।
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