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Banda News: टाइगर रिजर्व में नर बाघ की संदिग्ध हालात में मौत
Wed, 22 Apr 2026 01:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 22 Apr 2026 01:18 AM IST
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फोटो - 07 विभाग द्वारा जारी की गई फोटो।
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बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में एक नर बाघ का कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया। करीब 10 दिन पुराने इस शव के मिलने से बाघ की मौत पर सवाल उठ रहे हैं और पार्क प्रबंधन की गश्त व निगरानी व्यवस्था की कलई खुल गई।
यह घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य के अंतर्गत आने वाली कटरिया बीट के वन कक्ष क्रमांक पी-278 में हुई। सूत्रों के अनुसार बाघ का शव मुख्य मार्ग से मात्र 100 मीटर दूर जंगल में मिला। शव कंकाल की अवस्था में होने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ की मृत्यु लगभग 10 दिन पूर्व हुई होगी। प्रथम दृष्टया मौत संदिग्ध हालात में होना प्रतीत हो रहा है।
इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व जो वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपनी चाक-चौबंद व्यवस्था का दावा करता है, एक नर बाघ की संदिग्ध हालात में मौत से कई दिनों तक अनभिज्ञ रहा। मुख्य मार्ग के इतने करीब जहां से पार्क के अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन गुजरते हैं 10 दिन तक बाघ का शव सड़ता रहा और प्रबंधन को भनक तक नहीं लगी। यह घटना पार्क प्रबंधन की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और उनके दावों को खोखला साबित करती है।
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घटना की जानकारी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा वन अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलने के बाद रेंजर गंगऊ अभ्यारण्य सागर शुक्ला अमले के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव और उप संचालक वीरेंद्र कुमार पटेल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद सुबह 10 बजे तक वे मौके पर नहीं पहुंचे थे।
मामले को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वीरेंद्र पटेल ने पुष्टि की है कि बाघ का कंकाल मिला है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक जांच कमेटी नियुक्त की गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मृत्यु के सही कारणों का पता चल पाएगा। उसकी मौत आपसी संघर्ष से या किसी अन्य कारण से हुई है।
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यह घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य के अंतर्गत आने वाली कटरिया बीट के वन कक्ष क्रमांक पी-278 में हुई। सूत्रों के अनुसार बाघ का शव मुख्य मार्ग से मात्र 100 मीटर दूर जंगल में मिला। शव कंकाल की अवस्था में होने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ की मृत्यु लगभग 10 दिन पूर्व हुई होगी। प्रथम दृष्टया मौत संदिग्ध हालात में होना प्रतीत हो रहा है।
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इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व जो वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपनी चाक-चौबंद व्यवस्था का दावा करता है, एक नर बाघ की संदिग्ध हालात में मौत से कई दिनों तक अनभिज्ञ रहा। मुख्य मार्ग के इतने करीब जहां से पार्क के अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन गुजरते हैं 10 दिन तक बाघ का शव सड़ता रहा और प्रबंधन को भनक तक नहीं लगी। यह घटना पार्क प्रबंधन की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और उनके दावों को खोखला साबित करती है।
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घटना की जानकारी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा वन अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलने के बाद रेंजर गंगऊ अभ्यारण्य सागर शुक्ला अमले के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव और उप संचालक वीरेंद्र कुमार पटेल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद सुबह 10 बजे तक वे मौके पर नहीं पहुंचे थे।
मामले को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वीरेंद्र पटेल ने पुष्टि की है कि बाघ का कंकाल मिला है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक जांच कमेटी नियुक्त की गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मृत्यु के सही कारणों का पता चल पाएगा। उसकी मौत आपसी संघर्ष से या किसी अन्य कारण से हुई है।