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Banda News: बारिश-ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत और फसल तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:51 AM IST
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फोटो- 09 खप्टिहा कलां गांव में बारिश के पानी में डूबी फसल। संवाद
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बांदा। दो दिनों में हुई बारिश, ओलावृष्टि और आंधी से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके बाद कृषि व राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से सर्वे शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, लगभग 20 फीसदी फसलों का नुकसान हुआ है।
करतल, बबेरू, अतर्रा, पैलानी और बांदा सदर तहसील क्षेत्रों में गेहूं, चना, लाही, आम और नींबू जैसी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों को नुकसान की जानकारी देने के लिए टोल-फ्री नंबर, वॉट्सऐप और फसल बीमा ऐप जैसे माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही लिखित अर्जी भी मांगी जा रही है।
तिंदवारी के राजबहादुर सिंह पटेल ने बताया कि प्रति बीघा गेहूं की उपज पाँच-छह क्विंटल से घटकर ढाई क्विंटल रह गई है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। हालांकि, नरैनी क्षेत्र के पुंगरी और अकेलवा जैसे कुछ गांवों के किसानों ने शिकायत की है कि सर्वे टीम अभी तक उनके खेतों तक नहीं पहुंची है, जहां गेहूं काला पड़ गया है और दीमक लग रही है।
पैलानी के अलोना गांव में उदयपाल सिंह सहित कई किसानों की गेहूं की फसलें पानी में डूब गईं, जबकि खप्टिहा कलां में मनोज दीक्षित व अन्य किसानों की फसलें आंधी से टूटकर जमीन पर गिर गईं, जिससे उनके भरण-पोषण पर संकट आ गया है।
किसान नुकसान की यहां करें शिकायत
टोल फ्री नंबर- 14447- सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक।
हेल्प डेस्क नंबर- 18001801551
वॉट्सऐप नंबर- 7065514447
बारिश से हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर टीमें गठित की गई है। दो दिन में किसानों का कितना नुकसान हुआ यह रिपोर्ट मिलेगी। नुकसान के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। अगर किसान की 33 फीसदी फसल में नुकसान हुआ है तो उसे मुआवजा मिलेगा।
संजय कुमार
जिला कृषि अधिकारी, बांदा।
किसानों की सहायता के लिए विभाग ने टोल फ्री नंबर और वॉट्सऐप नंबर जारी किए हैं। कार्यालय में आने वाले किसानों की लिखित नुकसान की शिकायत भी दर्ज की जा रही है। टीमें गांव स्तर पर नुकसान का जायजा ले रहीं है। कृषि व राजस्व की संयुक्त टीम लगाई गई है। शुरुआती आकलन 15 से 20 फीसदी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है।
डॉ. अभय कुमार
उपनिदेशक कृषि, बांदा।
नरैनी क्षेत्र के किसानों के नुकसान का आकलन करने के लिए लेखपालों की टीम लगाई है। हल्का लेखपाल मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे। अपनी रिपोर्ट देंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आकलन किया जाएगा।
सतीश कुमार वर्मा
तहसीलदार, नरैनी।
जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है, वह 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर पर अपनी शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। समय सीमा के बाद दर्ज शिकायतों पर बीमा कंपनियां दावा स्वीकार नहीं करेंगी, जिससे किसान मुआवजे के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
पंकज सिंह
राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी, जसपुरा।
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तिंदवारी के राजबहादुर सिंह पटेल ने बताया कि प्रति बीघा गेहूं की उपज पाँच-छह क्विंटल से घटकर ढाई क्विंटल रह गई है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। हालांकि, नरैनी क्षेत्र के पुंगरी और अकेलवा जैसे कुछ गांवों के किसानों ने शिकायत की है कि सर्वे टीम अभी तक उनके खेतों तक नहीं पहुंची है, जहां गेहूं काला पड़ गया है और दीमक लग रही है।
पैलानी के अलोना गांव में उदयपाल सिंह सहित कई किसानों की गेहूं की फसलें पानी में डूब गईं, जबकि खप्टिहा कलां में मनोज दीक्षित व अन्य किसानों की फसलें आंधी से टूटकर जमीन पर गिर गईं, जिससे उनके भरण-पोषण पर संकट आ गया है।
किसान नुकसान की यहां करें शिकायत
टोल फ्री नंबर- 14447- सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक।
हेल्प डेस्क नंबर- 18001801551
वॉट्सऐप नंबर- 7065514447
बारिश से हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर टीमें गठित की गई है। दो दिन में किसानों का कितना नुकसान हुआ यह रिपोर्ट मिलेगी। नुकसान के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। अगर किसान की 33 फीसदी फसल में नुकसान हुआ है तो उसे मुआवजा मिलेगा।
संजय कुमार
जिला कृषि अधिकारी, बांदा।
किसानों की सहायता के लिए विभाग ने टोल फ्री नंबर और वॉट्सऐप नंबर जारी किए हैं। कार्यालय में आने वाले किसानों की लिखित नुकसान की शिकायत भी दर्ज की जा रही है। टीमें गांव स्तर पर नुकसान का जायजा ले रहीं है। कृषि व राजस्व की संयुक्त टीम लगाई गई है। शुरुआती आकलन 15 से 20 फीसदी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है।
डॉ. अभय कुमार
उपनिदेशक कृषि, बांदा।
नरैनी क्षेत्र के किसानों के नुकसान का आकलन करने के लिए लेखपालों की टीम लगाई है। हल्का लेखपाल मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे। अपनी रिपोर्ट देंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आकलन किया जाएगा।
सतीश कुमार वर्मा
तहसीलदार, नरैनी।
जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है, वह 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर पर अपनी शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। समय सीमा के बाद दर्ज शिकायतों पर बीमा कंपनियां दावा स्वीकार नहीं करेंगी, जिससे किसान मुआवजे के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
पंकज सिंह
राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी, जसपुरा।