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Banda News: गर्मी के तेवर से पिघल गया सड़क का डामर
Sat, 23 May 2026 12:46 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 23 May 2026 12:46 AM IST
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फोटो - 01 गर्मी की वजह से सड़क का पिघला हुआ डामर। संवाद
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बांदा। जिला इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। जहां पांच दिनों से तापमान 47-48 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। अत्यधिक गर्मी के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दोपहर होते-होते बाजार में सन्नाटा हो जाता है, लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है।
सूरज की तपिश इतनी अधिक है कि कंक्रीट की दीवारें और तारकोल की सड़कें भी भीषण गर्मी को सहने में नाकाम साबित हो रही हैं। वहीं सड़क पर बिछा डामर पिघलने के बाद एक स्थान पर एकत्र होकर डिवाइडर का स्वरूप ले रहा है। जिससे सूर्यास्त के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। इस गर्मी से निपटने के लिए बांदा के लगभग 18 लाख लोगों ने जीने का अपना अलग तरीका निकाला है। दैनिक कामकाज अब सूर्योदय से पहले ही शुरू हो जाता है।
महिलाएं सुबह आठ बजे तक रसोई का काम समाप्त कर ले रही हैं। मजदूर सुबह-सुबह काम पर निकल जाते हैं और किसान भी दोपहर से पहले खेतों से लौट आते हैं। चाय-पान की दुकानें भी शाम तक खाली नजर आती हैं। गर्मी से थोड़ी राहत पाने के लिए लोग दीवारों पर चूना-पत्थर से दोबारा रंगाई कर रहे हैं, ताकि गर्मी को सोखा जा सके।
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स्थानीय निवासी ऐश्वर्य सिंह का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए पुराने और नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। नरैनी जैसे इलाकों में, जहां बिजली की कटौती एक आम समस्या है, रात में चैन से सोना लगभग नामुमकिन हो गया है। लोग अंधेरा होने के बाद छतों पर चारपाई लगाकर हवा की उम्मीद में सो रहे हैं और कई लोग गर्मी से राहत के लिए पानी का छिड़काव कर रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं और जिला प्रशासन की पहल
इस भीषण गर्मी का सीधा असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। बांदा जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और अत्यधिक थकावट जैसी शिकायतों के साथ आ रहे हैं। इन गंभीर हालातों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है।
जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था
विशेष वार्डों की स्थापना
डायरिया, बुखार और लू के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, जिला अस्पताल में इनके लिए अलग से विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
दवाओं की उपलब्धता
विशेष वार्डों में डायरिया, बुखार, उल्टी-दस्त और लू के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है।
अन्य उपाय
प्रशासन गर्मी से बचाव के लिए अन्य आवश्यक कदम भी उठा रहा है, ताकि नागरिकों को इस मुश्किल दौर से निपटने में मदद मिल सके।
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सूरज की तपिश इतनी अधिक है कि कंक्रीट की दीवारें और तारकोल की सड़कें भी भीषण गर्मी को सहने में नाकाम साबित हो रही हैं। वहीं सड़क पर बिछा डामर पिघलने के बाद एक स्थान पर एकत्र होकर डिवाइडर का स्वरूप ले रहा है। जिससे सूर्यास्त के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। इस गर्मी से निपटने के लिए बांदा के लगभग 18 लाख लोगों ने जीने का अपना अलग तरीका निकाला है। दैनिक कामकाज अब सूर्योदय से पहले ही शुरू हो जाता है।
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महिलाएं सुबह आठ बजे तक रसोई का काम समाप्त कर ले रही हैं। मजदूर सुबह-सुबह काम पर निकल जाते हैं और किसान भी दोपहर से पहले खेतों से लौट आते हैं। चाय-पान की दुकानें भी शाम तक खाली नजर आती हैं। गर्मी से थोड़ी राहत पाने के लिए लोग दीवारों पर चूना-पत्थर से दोबारा रंगाई कर रहे हैं, ताकि गर्मी को सोखा जा सके।
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स्थानीय निवासी ऐश्वर्य सिंह का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए पुराने और नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। नरैनी जैसे इलाकों में, जहां बिजली की कटौती एक आम समस्या है, रात में चैन से सोना लगभग नामुमकिन हो गया है। लोग अंधेरा होने के बाद छतों पर चारपाई लगाकर हवा की उम्मीद में सो रहे हैं और कई लोग गर्मी से राहत के लिए पानी का छिड़काव कर रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं और जिला प्रशासन की पहल
इस भीषण गर्मी का सीधा असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। बांदा जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और अत्यधिक थकावट जैसी शिकायतों के साथ आ रहे हैं। इन गंभीर हालातों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है।
जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था
विशेष वार्डों की स्थापना
डायरिया, बुखार और लू के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, जिला अस्पताल में इनके लिए अलग से विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
दवाओं की उपलब्धता
विशेष वार्डों में डायरिया, बुखार, उल्टी-दस्त और लू के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है।
अन्य उपाय
प्रशासन गर्मी से बचाव के लिए अन्य आवश्यक कदम भी उठा रहा है, ताकि नागरिकों को इस मुश्किल दौर से निपटने में मदद मिल सके।