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Banda News: एसपी कार्यालय घेरा, 20 घंटे से धरने पर बैठीं आदिवासी महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 11 May 2026 12:06 AM IST
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फोटो - 03 एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठीं महिलाओं को समझाते अधिकारी। स्त्रोत : ग्रामीण
- फोटो : महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल पर रविवार को आयोजित विजयोत्सव।
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करतल (बांदा)। पन्ना जिले में रुंझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासन और स्थानीय आदिवासी समुदाय के बीच गंभीर टकराव का रूप ले चुका है। देर रात आंदोलनकारी ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर सहित कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। ग्रामीण परिवार पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए, जहां लगभग 20 घंटे के लंबे इंतजार के बाद पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू ने उनसे मुलाकात की।
अजयगढ़ थाना में अमित भटनागर, कामता प्रसाद, केदार पाल, कमल कोदर, चक्रदीन, दीपक कुमार त्रिवेदी, शिवचरण, देश कुमार, लवकुश यादव और पचबेनी यादव को आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिनमें धारा 296 बी, 115(2), 119(1), 191(2), 190, 351(3), 61(2) तथा 3(5) बीएनएस शामिल हैं। वहीं, धरने में शामिल कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने पुलिस प्रशासन पर ग्रामीणों का पक्ष न सुनने और आंदोलन को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी परिवारों की जमीन, जल और जंगल पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें समुचित पुनर्वास, मुआवजा और परियोजना के बारे में स्पष्ट जानकारी दिए बिना ही प्रशासन इसे आगे बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने रात के अंधेरे में घरों से लोगों को उठाकर गिरफ्तार किया, जिससे इलाके में भय और आक्रोश दोनों फैल गया। यह कार्रवाई कथित तौर पर सिंचाई विभाग के एसडीओ और ठेकेदार की शिकायत पर की गई।
वर्तमान में रुंझ बांध क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण आंदोलन पर डटे हुए हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं।
यह है केन-बेतवा लिंक परियोजना
यह केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। यह पहल बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उपयोग में लाना है। इस पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों जैसे झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना और छतरपुर को सिंचाई का लाभ मिलेगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 44,605 करोड़ रुपये है। इसके तहत 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
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अजयगढ़ थाना में अमित भटनागर, कामता प्रसाद, केदार पाल, कमल कोदर, चक्रदीन, दीपक कुमार त्रिवेदी, शिवचरण, देश कुमार, लवकुश यादव और पचबेनी यादव को आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिनमें धारा 296 बी, 115(2), 119(1), 191(2), 190, 351(3), 61(2) तथा 3(5) बीएनएस शामिल हैं। वहीं, धरने में शामिल कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने पुलिस प्रशासन पर ग्रामीणों का पक्ष न सुनने और आंदोलन को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी परिवारों की जमीन, जल और जंगल पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें समुचित पुनर्वास, मुआवजा और परियोजना के बारे में स्पष्ट जानकारी दिए बिना ही प्रशासन इसे आगे बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने रात के अंधेरे में घरों से लोगों को उठाकर गिरफ्तार किया, जिससे इलाके में भय और आक्रोश दोनों फैल गया। यह कार्रवाई कथित तौर पर सिंचाई विभाग के एसडीओ और ठेकेदार की शिकायत पर की गई।
वर्तमान में रुंझ बांध क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण आंदोलन पर डटे हुए हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं।
यह है केन-बेतवा लिंक परियोजना
यह केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। यह पहल बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उपयोग में लाना है। इस पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों जैसे झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, पन्ना और छतरपुर को सिंचाई का लाभ मिलेगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 44,605 करोड़ रुपये है। इसके तहत 10 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।