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Banda News: शीशी खत्म, कागज में दे रहे होम्योपैथिक दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:19 PM IST
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फोटो- 21 जिला होमियोपैथिक अस्पताल में मरीजों को देखती डा. श्वेता।
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बांदा। जिले में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। चिकित्सकों और फार्मासिस्टों की भारी कमी, दवाओं और शीशियों का अभाव और अस्पतालों के संचालन में अनियमितताएं मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। एक समय था जब एलोपैथी दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बढ़ते मामलों के कारण लोगों का रुझान होम्योपैथी की ओर बढ़ा था और मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही थी लेकिन अस्पतालों की अव्यवस्थाओं के चलते अब मरीजों को मजबूरी में एलोपैथी इलाज का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिले में कुल 27 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं। कई में तो डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों ही अनुपस्थित हैं। राजकीय जिला होम्योपैथिक अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी सहित पांच पद स्वीकृत हैं लेकिन मौजूदा समय में वरिष्ठ चिकित्सक को किसी अन्य स्थान पर संबद्ध कर दिया गया है। वर्तमान में चिकित्सक श्वेता यादव और फार्मासिस्ट जगनंदन ही मरीजों को देख रहे हैं और दवाएं वितरित कर रहे हैं। वार्डबॉय का पद रिक्त है और चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मचारी को संबद्ध किया गया है। श्वेता सिंह के अनुसार प्रतिदिन लगभग सौ से सवा सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
हालांकि, नरैनी में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थिति अधिक गंभीर है, जहां डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों ही मौजूद नहीं हैं। यहां तीन दिन के लिए एक चिकित्सक को संबद्ध किया गया है लेकिन मरीजों का कहना है कि वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते। सैमरी में डॉक्टर तो हैं लेकिन फार्मासिस्ट नहीं है। इसी तरह की स्थिति जिले के अन्य अस्पतालों की भी है, जहां कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं फार्मासिस्ट।
दवाओं और उपकरणों का अभाव
स्टाफ की कमी के अलावा, अस्पतालों में दवाओं और शीशियों का भी भारी अभाव है। मरीजों को दवाएं देने के लिए पर्याप्त शीशियां उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें कागज पर दवाएं दी जा रही हैं। कुछ आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध न होने पर उन्हें बाजार से खरीदने की सलाह दी जाती है। यह स्थिति उन मरीजों के लिए बेहद मुश्किल खड़ी करती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं।
स्टाफ की स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति
पद स्वीकृत रिक्त
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी चार एक
चिकित्साधिकारी 27 23
फार्मासिस्ट 27 14
वर्जन-
दवाओं और शीशियों की मांग भेजी गई है और शीशियां जल्द ही प्राप्त होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अस्पताल को 30 पैकेट शीशियां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें से प्रत्येक पैकेट में 100 शीशियां होती हैं।
संतोष सोनी
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, बांदा
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जिले में कुल 27 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं। कई में तो डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों ही अनुपस्थित हैं। राजकीय जिला होम्योपैथिक अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी सहित पांच पद स्वीकृत हैं लेकिन मौजूदा समय में वरिष्ठ चिकित्सक को किसी अन्य स्थान पर संबद्ध कर दिया गया है। वर्तमान में चिकित्सक श्वेता यादव और फार्मासिस्ट जगनंदन ही मरीजों को देख रहे हैं और दवाएं वितरित कर रहे हैं। वार्डबॉय का पद रिक्त है और चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मचारी को संबद्ध किया गया है। श्वेता सिंह के अनुसार प्रतिदिन लगभग सौ से सवा सौ मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
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हालांकि, नरैनी में संचालित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थिति अधिक गंभीर है, जहां डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों ही मौजूद नहीं हैं। यहां तीन दिन के लिए एक चिकित्सक को संबद्ध किया गया है लेकिन मरीजों का कहना है कि वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते। सैमरी में डॉक्टर तो हैं लेकिन फार्मासिस्ट नहीं है। इसी तरह की स्थिति जिले के अन्य अस्पतालों की भी है, जहां कहीं डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं फार्मासिस्ट।
दवाओं और उपकरणों का अभाव
स्टाफ की कमी के अलावा, अस्पतालों में दवाओं और शीशियों का भी भारी अभाव है। मरीजों को दवाएं देने के लिए पर्याप्त शीशियां उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें कागज पर दवाएं दी जा रही हैं। कुछ आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध न होने पर उन्हें बाजार से खरीदने की सलाह दी जाती है। यह स्थिति उन मरीजों के लिए बेहद मुश्किल खड़ी करती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं।
स्टाफ की स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति
पद स्वीकृत रिक्त
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी चार एक
चिकित्साधिकारी 27 23
फार्मासिस्ट 27 14
वर्जन-
दवाओं और शीशियों की मांग भेजी गई है और शीशियां जल्द ही प्राप्त होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अस्पताल को 30 पैकेट शीशियां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें से प्रत्येक पैकेट में 100 शीशियां होती हैं।
संतोष सोनी
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, बांदा

फोटो- 21 जिला होमियोपैथिक अस्पताल में मरीजों को देखती डा. श्वेता।