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Barabanki: मेंथा टंकी में विस्फोट, मां-बेटे सहित तीन झुलसे, हालत गंभीर

अमर उजाला नेटवर्क, कोटवाधाम (बाराबंकी) Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 16 Jun 2026 09:03 PM IST
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सार

ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया है।

Barabanki: Explosion in menthol tank; three, including a mother and son, suffer burns; condition critical.
टंकी फटने के बाद का दृश्य। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

दरियाबाद क्षेत्र के अकबरपुर गांव में मंगलवार सुबह मेंथा का तेल निकालते समय एक बड़ा हादसा हो गया। टंकी में अचानक तेज धमाके के साथ हुए विस्फोट में भट्ठी के पास मौजूद मां, बेटे और चाचा गंभीर रूप से झुलस गए। ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया है।



अकबरपुर गांव निवासी किसान रामफेर ने मंगलवार सुबह चार बजे से मेंथा का तेल उतारने के लिए टंकी को भट्ठी पर रखा था। रामफेर की पत्नी रूपरानी (38), पुत्र शुभम (17) और छोटा भाई हरिभजन (33) भट्ठी में ईधन झोंकते हुए तेल की निगरानी कर रहे थे। करीब पांच बजे अचानक टंकी का निचला हिस्सा तेज धमाके के साथ फट गया।
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उसमें से निकला खौलता हुआ पानी व फसल के अवशेष तीनों पर गिरे और तीनों झुलस गए। उस वक्त आसपास मौजूद कुछ ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। खेत से कुछ दूर पर मौजूद रामफेर भी आ गए। तत्काल एंबुलेंस से तीनों को सीएचसी मथुरानगर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी हालत गंभीर देख तीनों लोगों को सिविल अस्पताल लखनऊ भेजा गया।
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बच्ची की मौत के चंद घंटों बाद दूसरी घटना
एक सप्ताह पहले देवा के हाजीहार में मेंथा की टंकी फटने से पांच लोग झुलस गए थे। इसमें सोमवार को इलाज के दौरान बच्ची नेहा की मौत हो चुकी है जबकि चार लोगों का इलाज जारी है। नेहा के मौत की खबर आने के चंद घंटों बाद दरियाबाद इलाके के अकबरपुर गांव में घटना हो गई।

देश का 70 प्रतिशत मेंथा ऑयल बाराबंकी से, सुरक्षा शून्य
जिले की अर्थव्यवस्था में मेंथा का सबसे बड़ा योगदान है। हर वर्ष करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मेंथा की खेती की जाती है और देश के कुल मेंथा उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत योगदान बाराबंकी का माना जाता है लेकिन टंकियों की नियमित सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कोई विभाग नहीं निभा रहा है। दरअसल मेंथा की फसल तैयार होने के बाद किसान उसे काटकर भट्ठियों पर रखी जाने वाली बड़ी टंकियों में भरते हैं। भाप की प्रक्रिया से इन टंकियों में मेंथा तेल निकाला जाता है लेकिन तेल निष्कर्षण में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश टंकियों और भट्टियों की नियमित जांच नहीं होती।

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