{"_id":"6a31a3bc6f9359721e0d7060","slug":"explosion-in-mentha-tank-three-including-a-mother-and-son-suffer-serious-burns-barabanki-news-c-315-1-brp1006-171253-2026-06-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: मेंथा टंकी में विस्फोट, मां-बेटे सहित तीन झुलसे, गंभीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: मेंथा टंकी में विस्फोट, मां-बेटे सहित तीन झुलसे, गंभीर
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बाराबंकी। दरियाबाद क्षेत्र के अकबरपुर गांव में मंगलवार सुबह मेंथा का तेल निकालते समय एक बड़ा हादसा हो गया। टंकी में अचानक तेज धमाके के साथ हुए विस्फोट में भट्ठी के पास मौजूद मां, बेटे और चाचा गंभीर रूप से झुलस गए। ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
अकबरपुर गांव निवासी किसान रामफेर ने मंगलवार सुबह चार बजे से मेंथा का तेल उतारने के लिए टंकी को भट्ठी पर रखा था। रामफेर की पत्नी रूपरानी (38), पुत्र शुभम (17) और छोटा भाई हरिभजन (33) भट्ठी में ईधन झोंकते हुए तेल की निगरानी कर रहे थे। करीब पांच बजे अचानक टंकी का निचला हिस्सा तेज धमाके के साथ फट गया।
उसमें से निकला खौलता हुआ पानी व फसल के अवशेष तीनों पर गिरे और तीनों झुलस गए। उस वक्त आसपास मौजूद कुछ ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। खेत से कुछ दूर पर मौजूद रामफेर भी आ गए। तत्काल एंबुलेंस से तीनों को सीएचसी मथुरानगर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी हालत गंभीर देख तीनों लोगों को सिविल अस्पताल लखनऊ भेजा गया।
विज्ञापन
..................................
बच्ची की मौत के चंद घंटों बाद दूसरी घटना
एक सप्ताह पहले देवा के हाजीहार में मेंथा की टंकी फटने से पांच लोग झुलस गए थे। इसमें सोमवार को इलाज के दौरान बच्ची नेहा की मौत हो चुकी है जबकि चार लोगों का इलाज जारी है। नेहा के मौत की खबर आने के चंद घंटों बाद दरियाबाद इलाके के अकबरपुर गांव में घटना हो गई।
..................................
देश का 70 प्रतिशत मेंथा ऑयल बाराबंकी से, सुरक्षा शून्य
जिले की अर्थव्यवस्था में मेंथा का सबसे बड़ा योगदान है। हर वर्ष करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मेंथा की खेती की जाती है और देश के कुल मेंथा उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत योगदान बाराबंकी का माना जाता है लेकिन टंकियों की नियमित सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कोई विभाग नहीं निभा रहा है।
दरअसल मेंथा की फसल तैयार होने के बाद किसान उसे काटकर भट्ठियों पर रखी जाने वाली बड़ी टंकियों में भरते हैं। भाप की प्रक्रिया से इन टंकियों में मेंथा तेल निकाला जाता है लेकिन तेल निष्कर्षण में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश टंकियों और भट्टियों की नियमित जांच नहीं होती।
-- -- -- -- -- -- -- --
फसल की कटाई और सुखाने की सावधानी
कटाई के तुरंत बाद गीली फसल को टंकी में न भरें। फसल को 1 से 2 दिन हल्की धूप या छाया में सुखाएं (अर्द्ध-सूखी स्थिति)। पत्तियां इतनी ज्यादा भी नहीं सूखनी चाहिए कि वे हाथ से छूते ही टूटने या झड़ने लगें। पत्तियां झड़ने से तेल का उत्पादन घट जाता है। कटी हुई फसल का बड़ा ढेर न लगाएं, वरना अंदर गर्मी पैदा होने से पत्तियां काली पड़कर सड़ने लगेंगी।
-- -- -- -- -- --
टंकी भरते समय ये रखें ध्यान
टंकी में मेंथा की घास को अच्छी तरह और बराबर दबाकर भरें। यदि कहीं जगह खाली रह गई, तो भाप बिना तेल निकाले सीधे बाहर निकल जाएगी। घास के साथ आने वाली खरपतवार, मिट्टी या कंकड़-पत्थर को निकाल दें, ताकि तेल का रंग और महक साफ रहे।
भट्ठी और भाप का नियंत्रण
भट्ठी में आग हमेशा एकसमान जलनी चाहिए। आंच अचानक तेज या धीमी होने से भाप का दबाव बिगड़ जाता है। टंकी का ढक्कन बंद करने के बाद यह सुनिश्चित करें कि कहीं से भी भाप बाहर न निकले। लीकेज बंद करने के लिए चिकनी मिट्टी या रबर वाशर का सही इस्तेमाल करें। पूरी प्रक्रिया में लगभग 2 से 2.5 घंटे का समय लगता है। शुरुआती एक घंटे में ही 80% तेल निकल आता है। इसलिए भट्ठी को बेवजह जरूरत से ज्यादा देर न चलाएं।
कंडेंसर और पानी का तापमान
कंडेंसर (कूलिंग टैंक) में ठंडे पानी की सप्लाई लगातार चालू रखें। यदि कंडेंसर का पानी गर्म हो जाएगा, तो तेल भाप बनकर उड़ जाएगा और भारी नुकसान होगा। भाप को ठंडा करने वाला पानी न तो बहुत ज्यादा उबलता हो और न ही एकदम जमा देने वाला, ताकि तेल और पानी का मिश्रण सही तापमान पर बाहर आए।
अकबरपुर गांव निवासी किसान रामफेर ने मंगलवार सुबह चार बजे से मेंथा का तेल उतारने के लिए टंकी को भट्ठी पर रखा था। रामफेर की पत्नी रूपरानी (38), पुत्र शुभम (17) और छोटा भाई हरिभजन (33) भट्ठी में ईधन झोंकते हुए तेल की निगरानी कर रहे थे। करीब पांच बजे अचानक टंकी का निचला हिस्सा तेज धमाके के साथ फट गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उसमें से निकला खौलता हुआ पानी व फसल के अवशेष तीनों पर गिरे और तीनों झुलस गए। उस वक्त आसपास मौजूद कुछ ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। खेत से कुछ दूर पर मौजूद रामफेर भी आ गए। तत्काल एंबुलेंस से तीनों को सीएचसी मथुरानगर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी हालत गंभीर देख तीनों लोगों को सिविल अस्पताल लखनऊ भेजा गया।
..................................
बच्ची की मौत के चंद घंटों बाद दूसरी घटना
एक सप्ताह पहले देवा के हाजीहार में मेंथा की टंकी फटने से पांच लोग झुलस गए थे। इसमें सोमवार को इलाज के दौरान बच्ची नेहा की मौत हो चुकी है जबकि चार लोगों का इलाज जारी है। नेहा के मौत की खबर आने के चंद घंटों बाद दरियाबाद इलाके के अकबरपुर गांव में घटना हो गई।
..................................
देश का 70 प्रतिशत मेंथा ऑयल बाराबंकी से, सुरक्षा शून्य
जिले की अर्थव्यवस्था में मेंथा का सबसे बड़ा योगदान है। हर वर्ष करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मेंथा की खेती की जाती है और देश के कुल मेंथा उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत योगदान बाराबंकी का माना जाता है लेकिन टंकियों की नियमित सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कोई विभाग नहीं निभा रहा है।
दरअसल मेंथा की फसल तैयार होने के बाद किसान उसे काटकर भट्ठियों पर रखी जाने वाली बड़ी टंकियों में भरते हैं। भाप की प्रक्रिया से इन टंकियों में मेंथा तेल निकाला जाता है लेकिन तेल निष्कर्षण में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश टंकियों और भट्टियों की नियमित जांच नहीं होती।
फसल की कटाई और सुखाने की सावधानी
कटाई के तुरंत बाद गीली फसल को टंकी में न भरें। फसल को 1 से 2 दिन हल्की धूप या छाया में सुखाएं (अर्द्ध-सूखी स्थिति)। पत्तियां इतनी ज्यादा भी नहीं सूखनी चाहिए कि वे हाथ से छूते ही टूटने या झड़ने लगें। पत्तियां झड़ने से तेल का उत्पादन घट जाता है। कटी हुई फसल का बड़ा ढेर न लगाएं, वरना अंदर गर्मी पैदा होने से पत्तियां काली पड़कर सड़ने लगेंगी।
टंकी भरते समय ये रखें ध्यान
टंकी में मेंथा की घास को अच्छी तरह और बराबर दबाकर भरें। यदि कहीं जगह खाली रह गई, तो भाप बिना तेल निकाले सीधे बाहर निकल जाएगी। घास के साथ आने वाली खरपतवार, मिट्टी या कंकड़-पत्थर को निकाल दें, ताकि तेल का रंग और महक साफ रहे।
भट्ठी और भाप का नियंत्रण
भट्ठी में आग हमेशा एकसमान जलनी चाहिए। आंच अचानक तेज या धीमी होने से भाप का दबाव बिगड़ जाता है। टंकी का ढक्कन बंद करने के बाद यह सुनिश्चित करें कि कहीं से भी भाप बाहर न निकले। लीकेज बंद करने के लिए चिकनी मिट्टी या रबर वाशर का सही इस्तेमाल करें। पूरी प्रक्रिया में लगभग 2 से 2.5 घंटे का समय लगता है। शुरुआती एक घंटे में ही 80% तेल निकल आता है। इसलिए भट्ठी को बेवजह जरूरत से ज्यादा देर न चलाएं।
कंडेंसर और पानी का तापमान
कंडेंसर (कूलिंग टैंक) में ठंडे पानी की सप्लाई लगातार चालू रखें। यदि कंडेंसर का पानी गर्म हो जाएगा, तो तेल भाप बनकर उड़ जाएगा और भारी नुकसान होगा। भाप को ठंडा करने वाला पानी न तो बहुत ज्यादा उबलता हो और न ही एकदम जमा देने वाला, ताकि तेल और पानी का मिश्रण सही तापमान पर बाहर आए।