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Barabanki News: बाल पोर्नोग्राफी पर शिंकजा, 66 माेबाइल धारकों की जांच शुरू
Wed, 05 Aug 2026 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:12 AM IST
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बाराबंकी। अगर किसी के मोबाइल फोन में नाबालिग बच्चों से जुड़ी अश्लील फोटो या वीडियो हैं। उस वीडियो को देखा है या डाउनलोड किया है अथवा फॉरवर्ड किया है, तो यह न सोचे की इसकी भनक किसी को नहीं लगेगी। बाराबंकी में ऐसे 66 मोबाइल यूजर पुलिस की जांच के घेरे में आए हैं। इनकी जानकारी अमेरिका की संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) की साइबर टिपलाइन के जरिये गृह मंत्रालय होते हुए जिले तक पहुंची है।
अब साइबर थाना और संबंधित थानों की पुलिस हर मामले से जुड़े तकनीकी पहलूओं की जांच कर रही है। पुष्टि होते ही संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में सामने आए अधिकांश मामले बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री से संबंधित हैं। कुछ मामलों में एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक सामग्री और अनजाने में शेयर किए गए लिंक भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस हर मोबाइल और डिजिटल गतिविधि का तकनीकी विश्लेषण कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सामग्री जानबूझकर देखी, डाउनलोड की गई या केवल किसी लिंक के माध्यम से पहुंची। एक साल पहले सतरिख में आरोपी मोहम्मद अनस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। साइबर क्राइम मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक की जांच में पता चला कि स्नैपचैट पर एक अश्लील वीडियो शेयर किया गया था। (संवाद)
देश में 22.5 लाख से अधिक मामले आए
अमेरिका स्थित संस्था एनसीएमईसी दुनिया भर में बच्चों के ऑनलाइन और ऑफलाइन यौन शोषण से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। फेसबुक, गूगल, व्हाट्सएप सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म संदिग्ध सामग्री मिलने पर उसकी सूचना एनसीएमईसी की साइबर टिपलाइन को भेजते हैं। इसके बाद संस्था संबंधित जानकारी भारत के गृह मंत्रालय को उपलब्ध कराती है, जहां से मामलों को संबंधित राज्य और जिले की पुलिस के पास जांच और कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। भारत में अब तक 22.5 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
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बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री देखना, अपने पास रखना या साझा करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। जिले में प्राप्त सभी मामलों की साइबर थाना गंभीरता से जांच कर रहा है।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी
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अब साइबर थाना और संबंधित थानों की पुलिस हर मामले से जुड़े तकनीकी पहलूओं की जांच कर रही है। पुष्टि होते ही संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में सामने आए अधिकांश मामले बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री से संबंधित हैं। कुछ मामलों में एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक सामग्री और अनजाने में शेयर किए गए लिंक भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस हर मोबाइल और डिजिटल गतिविधि का तकनीकी विश्लेषण कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सामग्री जानबूझकर देखी, डाउनलोड की गई या केवल किसी लिंक के माध्यम से पहुंची। एक साल पहले सतरिख में आरोपी मोहम्मद अनस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। साइबर क्राइम मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक की जांच में पता चला कि स्नैपचैट पर एक अश्लील वीडियो शेयर किया गया था। (संवाद)
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देश में 22.5 लाख से अधिक मामले आए
अमेरिका स्थित संस्था एनसीएमईसी दुनिया भर में बच्चों के ऑनलाइन और ऑफलाइन यौन शोषण से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। फेसबुक, गूगल, व्हाट्सएप सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म संदिग्ध सामग्री मिलने पर उसकी सूचना एनसीएमईसी की साइबर टिपलाइन को भेजते हैं। इसके बाद संस्था संबंधित जानकारी भारत के गृह मंत्रालय को उपलब्ध कराती है, जहां से मामलों को संबंधित राज्य और जिले की पुलिस के पास जांच और कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। भारत में अब तक 22.5 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
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बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री देखना, अपने पास रखना या साझा करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। जिले में प्राप्त सभी मामलों की साइबर थाना गंभीरता से जांच कर रहा है।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी