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Barabanki News: भवन आलीशान, भविष्य वीरान
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:28 AM IST
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बाराबंकी। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार फतेहपुर कस्बे की राजकीय महिला पॉलीटेक्निक जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण बदहाल हो जा रही है। लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह आधुनिक भवन पिछले चार वर्षों से अपने संचालन का इंतजार कर रहा है। देखरेख के अभाव में अब यह शानदार इमारत खंडहर में तब्दील होने लगी है।
इस पॉलीटेक्निक की नींव 3 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी। कस्बे की कांशीराम कॉलोनी के पास जब इसका शिलान्यास हुआ, तो क्षेत्रीय छात्राओं में तकनीकी शिक्षा को लेकर एक नई उम्मीद जगी थी। निर्माण कार्य में लंबा वक्त लगा और साल 2022 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो गया। इस परिसर में पढ़ाई के लिए अत्याधुनिक क्लासरूम, प्रैक्टिकल लैब, छात्राओं के लिए छात्रावास, कैंटीन, गार्डन और गार्ड रूम जैसी तमाम सुविधाएं विकसित की गईं।
विडंबना यह है कि निर्माण कार्य पूरा हुए चार साल बीत जाने के बाद भी यहां एक भी कक्षा शुरू नहीं हो सकी है। आज स्थिति यह है कि पूरे परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। सुरक्षा और रखरखाव न होने के कारण खिड़कियों के कीमती शीशे टूट रहे हैं। करोड़ों की लागत से बनी लैब और उपकरण पर धूल जम गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही यहां शैक्षणिक कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह जर्जर हो जाएगी।
जिम्मेदारों का आश्वासन
क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा का कहना है कि वे इस मामले को शासन स्तर पर उठाएंगे और जल्द से जल्द संचालन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। हालांकि, जिम्मेदार विभाग की चुप्पी और टालमटोल वाले रवैये से स्थानीय जनता और अभिभावकों में गहरा रोष है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक करोड़ों का यह निवेश धूल फांकता रहेगा और कब फतेहपुर की बेटियों को अपने घर के पास तकनीकी शिक्षा का अधिकार मिलेगा?
पढ़ाई क्यों नहीं शुरू हुई
क्षेत्र की छात्रा माही और शिखा मिश्रा ने बताया कि इंटर पास करने के बाद उन्हें तकनीकी शिक्षा के लिए मजबूरन बाराबंकी मुख्यालय या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। घर के पास कॉलेज होने के बावजूद दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ तो बढ़ता ही है, साथ ही सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी होती हैं। छात्राओं का सवाल है कि जब भवन तैयार है और विभाग को हैंडओवर भी हो चुका है, तो फिर पढ़ाई शुरू करने में देरी क्यों?
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इस पॉलीटेक्निक की नींव 3 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी। कस्बे की कांशीराम कॉलोनी के पास जब इसका शिलान्यास हुआ, तो क्षेत्रीय छात्राओं में तकनीकी शिक्षा को लेकर एक नई उम्मीद जगी थी। निर्माण कार्य में लंबा वक्त लगा और साल 2022 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो गया। इस परिसर में पढ़ाई के लिए अत्याधुनिक क्लासरूम, प्रैक्टिकल लैब, छात्राओं के लिए छात्रावास, कैंटीन, गार्डन और गार्ड रूम जैसी तमाम सुविधाएं विकसित की गईं।
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विडंबना यह है कि निर्माण कार्य पूरा हुए चार साल बीत जाने के बाद भी यहां एक भी कक्षा शुरू नहीं हो सकी है। आज स्थिति यह है कि पूरे परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। सुरक्षा और रखरखाव न होने के कारण खिड़कियों के कीमती शीशे टूट रहे हैं। करोड़ों की लागत से बनी लैब और उपकरण पर धूल जम गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही यहां शैक्षणिक कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह जर्जर हो जाएगी।
जिम्मेदारों का आश्वासन
क्षेत्रीय विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा का कहना है कि वे इस मामले को शासन स्तर पर उठाएंगे और जल्द से जल्द संचालन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। हालांकि, जिम्मेदार विभाग की चुप्पी और टालमटोल वाले रवैये से स्थानीय जनता और अभिभावकों में गहरा रोष है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक करोड़ों का यह निवेश धूल फांकता रहेगा और कब फतेहपुर की बेटियों को अपने घर के पास तकनीकी शिक्षा का अधिकार मिलेगा?
पढ़ाई क्यों नहीं शुरू हुई
क्षेत्र की छात्रा माही और शिखा मिश्रा ने बताया कि इंटर पास करने के बाद उन्हें तकनीकी शिक्षा के लिए मजबूरन बाराबंकी मुख्यालय या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। घर के पास कॉलेज होने के बावजूद दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ तो बढ़ता ही है, साथ ही सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी होती हैं। छात्राओं का सवाल है कि जब भवन तैयार है और विभाग को हैंडओवर भी हो चुका है, तो फिर पढ़ाई शुरू करने में देरी क्यों?