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Barabanki News: अब मोबाइल बताएगा... बच्चे में क्या है परेशानी
Tue, 18 Aug 2026 11:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:23 PM IST
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बाराबंकी। कक्षा में एक बच्चा गुमसुम बैठा है। वह ब्लैक बोर्ड पर लिखे अक्षर ठीक से पढ़ नहीं पाता। दूसरा बच्चा शिक्षक की बात देर से समझता है। अब तक ऐसे बच्चों को सिर्फ कमजोर या लापरवाह मान लिया जाता था। बच्चा अगली कक्षा में पहुंच जाता था लेकिन उसकी यह कमी दूर नहीं हो पाती थी। इस परेशानी को अब प्रशस्त एप के माध्यम से दूर किया जाएगा। मोबाइल एप तुरंत बता देगा कि बच्चे में किस तरह की दिव्यांगता है।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले भर में यह व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है। जिले के करीब 2700 परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में यह एप डाउनलोड कराया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों का ट्रेनिंग वीडियो देखना अनिवार्य किया गया है, जिसके बाद ही वह बच्चों की स्क्रीनिंग का काम शुरू करेंगे। एप पर मौजूद 10 ट्रेनिंग वीडियो में शिक्षकों को सूक्ष्म बातें सिखाई गई हैं। बच्चे के देखने, सुनने, बोलने या चलने में दिक्कत है तो उसकी पहचान कैसे करें, यह वीडियो में बताया गया है। ऑटिज्म और बौद्धिक दिव्यांगता से पीड़ित बच्चों से बिना उनका मनोबल गिराए सही सवाल पूछने का तरीका भी इसमें शामिल है। (संवाद)
एप से तुरंत तैयार होगा डाटा
शिक्षक बच्चे के व्यवहार और पढ़ाई के आधार पर एप में दिए गए आसान सवालों के जवाब भरेंगे। दर्ज डाटा सीधे राज्य स्तरीय पोर्टल पर पहुंचेगा। डाटा मिलते ही डॉक्टरों और स्पेशल एजुकेटरों की टीम मेडिकल जांच करेगी। इसके बाद बच्चे का ऑनलाइन दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार हो जाएगा। बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि जिले के सभी परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रशस्त एप डाउनलोड कराने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को 10 ट्रेनिंग वीडियो देखना अनिवार्य है, ताकि वह आसानी से दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें समावेशी शिक्षा से जोड़ सकें।
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महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले भर में यह व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है। जिले के करीब 2700 परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में यह एप डाउनलोड कराया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों का ट्रेनिंग वीडियो देखना अनिवार्य किया गया है, जिसके बाद ही वह बच्चों की स्क्रीनिंग का काम शुरू करेंगे। एप पर मौजूद 10 ट्रेनिंग वीडियो में शिक्षकों को सूक्ष्म बातें सिखाई गई हैं। बच्चे के देखने, सुनने, बोलने या चलने में दिक्कत है तो उसकी पहचान कैसे करें, यह वीडियो में बताया गया है। ऑटिज्म और बौद्धिक दिव्यांगता से पीड़ित बच्चों से बिना उनका मनोबल गिराए सही सवाल पूछने का तरीका भी इसमें शामिल है। (संवाद)
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एप से तुरंत तैयार होगा डाटा
शिक्षक बच्चे के व्यवहार और पढ़ाई के आधार पर एप में दिए गए आसान सवालों के जवाब भरेंगे। दर्ज डाटा सीधे राज्य स्तरीय पोर्टल पर पहुंचेगा। डाटा मिलते ही डॉक्टरों और स्पेशल एजुकेटरों की टीम मेडिकल जांच करेगी। इसके बाद बच्चे का ऑनलाइन दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार हो जाएगा। बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि जिले के सभी परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रशस्त एप डाउनलोड कराने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को 10 ट्रेनिंग वीडियो देखना अनिवार्य है, ताकि वह आसानी से दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें समावेशी शिक्षा से जोड़ सकें।
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