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Barabanki News: बाढ़ से बचाव के लिए गांवों में लगेगी राहत चौपाल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:25 PM IST
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बाराबंकी। सरयू नदी में आने वाली बाढ़ को लेकर शासन से प्रशासन तक गंभीर है। शासन के निर्देश पर प्रभावित गांवों में राहत चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक किया जाना है। प्रशासन इस पर पूरी तरह से काम कर रहा है। प्रभावित होने वाली तीनों तहसीलों के एसडीएम से इसका रोस्टर तैयार कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले की तीन तहसीलें रामसनेहीघाट, रामनगर और सिरौलीगौसपुर के सैकड़ों गांव प्रतिवर्ष सरयू नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में आ जाती है। इनमें नैपुरा, कमियार, परसावल, बांसगांव, कोठीडीहा, मंझारायपुर, सुरसंडा, खुज्जी, मंझार, हेतमापुर, बिझला, परसंडा, अकौना, कोयलीपुरवा, कहारनपुरवा, जमका सहित सैकड़ों गांवों की करीब 35 से 40 हजार की आबादी प्रभावित होती है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें तटबंधों का सहारा लेना पड़ता है और महीनों तक इनकी जिंदगी परिवार के साथ तटबंधों पर ही गुजरती है।
इस बार प्रशासन बाढ़ को लेकर काफी गंभीर है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को डीएम ईशान प्रताप सिंह ने पहले ही चेतावनी दे रखी है और साफ कहा कि बाढ़ आने से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाए। वहीं पीड़ित गांवों में लोगों को बाढ़ से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए राहत चौपालें भी लगाई जाएगी। इसको लेकर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
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सुरक्षित रख ले आवश्यक दस्तावेज
बाढ़ आने से पहले प्रभावित इलाके के लोगों से अपील की जाती है कि अपने जरूरी कागजात किसी वाटरप्रूफ बैग में सुरक्षित रख लें। क्योंकि बाढ़ आने पर लोग परिवार और पशुओं को बचाने में अपने महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित रखना भूल जाते हैं और वह बाढ़ में बह जाते हैं इससे बाद में काफी असुविधा होती है। इसलिए इन्हें पहले से ही सुरक्षित रख लें।
वर्जन
बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में राहत चौपाल लगाई जाएगी। इसके लिए सभी तीनों तहसीलों के एसडीएम से रोस्टर बनाकर भेजने को कहा गया है। उम्मीद है इसी सप्ताह से गांवों में इसकी शुरूआत भी करा दी जाएगी।
- निरंकार सिंह, अपर जिलाधिकारी
जिले की तीन तहसीलें रामसनेहीघाट, रामनगर और सिरौलीगौसपुर के सैकड़ों गांव प्रतिवर्ष सरयू नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में आ जाती है। इनमें नैपुरा, कमियार, परसावल, बांसगांव, कोठीडीहा, मंझारायपुर, सुरसंडा, खुज्जी, मंझार, हेतमापुर, बिझला, परसंडा, अकौना, कोयलीपुरवा, कहारनपुरवा, जमका सहित सैकड़ों गांवों की करीब 35 से 40 हजार की आबादी प्रभावित होती है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें तटबंधों का सहारा लेना पड़ता है और महीनों तक इनकी जिंदगी परिवार के साथ तटबंधों पर ही गुजरती है।
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इस बार प्रशासन बाढ़ को लेकर काफी गंभीर है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को डीएम ईशान प्रताप सिंह ने पहले ही चेतावनी दे रखी है और साफ कहा कि बाढ़ आने से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाए। वहीं पीड़ित गांवों में लोगों को बाढ़ से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए राहत चौपालें भी लगाई जाएगी। इसको लेकर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
सुरक्षित रख ले आवश्यक दस्तावेज
बाढ़ आने से पहले प्रभावित इलाके के लोगों से अपील की जाती है कि अपने जरूरी कागजात किसी वाटरप्रूफ बैग में सुरक्षित रख लें। क्योंकि बाढ़ आने पर लोग परिवार और पशुओं को बचाने में अपने महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित रखना भूल जाते हैं और वह बाढ़ में बह जाते हैं इससे बाद में काफी असुविधा होती है। इसलिए इन्हें पहले से ही सुरक्षित रख लें।
वर्जन
बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में राहत चौपाल लगाई जाएगी। इसके लिए सभी तीनों तहसीलों के एसडीएम से रोस्टर बनाकर भेजने को कहा गया है। उम्मीद है इसी सप्ताह से गांवों में इसकी शुरूआत भी करा दी जाएगी।
- निरंकार सिंह, अपर जिलाधिकारी