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Barabanki News: चूल्हे पर बन रहीं रोटियां, खेतों में बैलों की जोड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:11 AM IST
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बाराबंकी। रसोई गैस और डीजल की किल्लत ने गांव की जिंदगी को जैसे अचानक पीछे मोड़ दिया है। जिन घरों में गैस चूल्हे रोजमर्रा की जरूरत बन गए थे, वहां अब फिर से मिट्टी के चूल्हे जल रहे हैं। खेतों में ट्रैक्टरों की जगह बैलों की जोड़ी नजर आने लगी है।
बनीकोडर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जरौली में 15 दिनों के भीतर करीब 150 से ज्यादा नए चूल्हे बनाए गए हैं। गांव की महिलाएं अपनी दादी-नानी से सीखकर फिर से चूल्हा गढ़ रही हैं। किसान रामकिशोर बताते हैं कि डीजल नहीं मिला तो ट्रैक्टर खड़ा कर दिया। बैल तो घर में थे ही, उन्हें जोत दिया। मेहनत ज्यादा है लेकिन खेती तो करनी ही है।
खेती पर डीजल का संकट, गैस डिलीवरी अब भी ठप
जनपद में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर मची अफरातफरी के बाद अब स्थिति सामान्य होती दिख रही है। अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़ अब छंटने लगी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डीजल की किल्लत ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। विशेषकर मेंथा की रोपाई और सिंचाई के इस महत्वपूर्ण समय में डीजल न मिलना कृषि कार्यों के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
बीते दो दिनों से सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र और कोटवाधाम के आसपास यह अफवाह फैल गई थी कि तेल का स्टॉक खत्म होने वाला है। इस खबर के जंगल की आग की तरह फैलते ही पेट्रोल पंपों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग बोतलों, पीपियों और बड़े ड्रमों में तेल स्टॉक करने की होड़ में लग गए, जिससे कई पंपों का स्टॉक समय से पहले ही खत्म हो गया। हालांकि, रविवार को प्रशासन की मुस्तैदी के बाद भीड़ सामान्य हुई और लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से तेल लिया।
शहर में स्थिति सुधरने के बावजूद ग्रामीण अंचलों, विशेषकर दरियाबाद से भिटरिया मार्ग पर स्थित पंपों पर डीजल की उपलब्धता अब भी चुनौती बनी हुई है। क्षेत्र के किसान पंकज और रिंकू ने बताया कि सरसों की कटाई के बाद अब खाली खेतों में मेंथा की रोपाई का समय है। जिन खेतों में बिजली के नलकूप या नहर की सुविधा नहीं है, वहां किसान पूरी तरह से डीजल पंप सेट पर निर्भर हैं। ट्रैक्टर चालक जुल्फकार अली के अनुसार, डीजल न मिलने से खेतों की जुताई का काम रुका हुआ है, जिससे फसल चक्र पिछड़ने का डर है। गेहूं की मड़ाई का सीजन भी सिर पर है, ऐसे में डीजल की कमी कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकती है।
गैस की बुकिंग चालू, पर डिलीवरी नहीं
जिन उपभोक्ताओं ने गैस बुक कराई है, उन्हें सिलिंडर मिल रहा है। हालांकि, डोर-टू-डोर डिलीवरी की सेवा अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। उपभोक्ताओं को स्वयं एजेंसी या वितरण केंद्रों तक जाकर सिलिंडर लाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने कहा कि जिले में डीजल और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। कुछ पंपों पर अत्यधिक भीड़ के कारण स्टॉक अस्थायी रूप से कम हुआ था, जिसे अब बहाल किया जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें।
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बनीकोडर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जरौली में 15 दिनों के भीतर करीब 150 से ज्यादा नए चूल्हे बनाए गए हैं। गांव की महिलाएं अपनी दादी-नानी से सीखकर फिर से चूल्हा गढ़ रही हैं। किसान रामकिशोर बताते हैं कि डीजल नहीं मिला तो ट्रैक्टर खड़ा कर दिया। बैल तो घर में थे ही, उन्हें जोत दिया। मेहनत ज्यादा है लेकिन खेती तो करनी ही है।
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खेती पर डीजल का संकट, गैस डिलीवरी अब भी ठप
जनपद में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर मची अफरातफरी के बाद अब स्थिति सामान्य होती दिख रही है। अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़ अब छंटने लगी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डीजल की किल्लत ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। विशेषकर मेंथा की रोपाई और सिंचाई के इस महत्वपूर्ण समय में डीजल न मिलना कृषि कार्यों के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
बीते दो दिनों से सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र और कोटवाधाम के आसपास यह अफवाह फैल गई थी कि तेल का स्टॉक खत्म होने वाला है। इस खबर के जंगल की आग की तरह फैलते ही पेट्रोल पंपों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग बोतलों, पीपियों और बड़े ड्रमों में तेल स्टॉक करने की होड़ में लग गए, जिससे कई पंपों का स्टॉक समय से पहले ही खत्म हो गया। हालांकि, रविवार को प्रशासन की मुस्तैदी के बाद भीड़ सामान्य हुई और लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से तेल लिया।
शहर में स्थिति सुधरने के बावजूद ग्रामीण अंचलों, विशेषकर दरियाबाद से भिटरिया मार्ग पर स्थित पंपों पर डीजल की उपलब्धता अब भी चुनौती बनी हुई है। क्षेत्र के किसान पंकज और रिंकू ने बताया कि सरसों की कटाई के बाद अब खाली खेतों में मेंथा की रोपाई का समय है। जिन खेतों में बिजली के नलकूप या नहर की सुविधा नहीं है, वहां किसान पूरी तरह से डीजल पंप सेट पर निर्भर हैं। ट्रैक्टर चालक जुल्फकार अली के अनुसार, डीजल न मिलने से खेतों की जुताई का काम रुका हुआ है, जिससे फसल चक्र पिछड़ने का डर है। गेहूं की मड़ाई का सीजन भी सिर पर है, ऐसे में डीजल की कमी कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकती है।
गैस की बुकिंग चालू, पर डिलीवरी नहीं
जिन उपभोक्ताओं ने गैस बुक कराई है, उन्हें सिलिंडर मिल रहा है। हालांकि, डोर-टू-डोर डिलीवरी की सेवा अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। उपभोक्ताओं को स्वयं एजेंसी या वितरण केंद्रों तक जाकर सिलिंडर लाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने कहा कि जिले में डीजल और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। कुछ पंपों पर अत्यधिक भीड़ के कारण स्टॉक अस्थायी रूप से कम हुआ था, जिसे अब बहाल किया जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें।