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Barabanki News: समृद्धि केंद्र तैयार , मुफ्त में जांचें मिट्टी की सेहत
Sat, 08 Aug 2026 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:29 AM IST
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सैदनपुर। अब खेत की मिट्टी में किस खाद की जरूरत है और कितनी मात्रा डालनी है, इसके लिए किसानों को शहर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। गांव के पास ही जल्द ही मिट्टी की जांच से लेकर उन्नत खाद और बीज तक से जुड़ी समस्या का पूरी तरह समाधान हो सकेगा।
सिरौलीगौसपुर तहसील के मरकामऊ में प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। यहां हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के सहयोग से स्थापित की गई अत्याधुनिक प्रयोगशाला के जरिये किसान अब अपने खेत की मिट्टी और खाद के नमूनों की निशुल्क जांच करा सकेंगे। जांच रिपोर्ट से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक स्थिति का पता चलेगा, जिससे असंतुलित खाद के बेजा इस्तेमाल पर रोक लगने से खेती की लागत में कमी आएगी, वहीं दूसरी तरफ जमीन की उर्वरा शक्ति भी बची रहने से फसलें लहलहाएगी।
मरकामऊ का यह केंद्र एक ही जगह सब कुछ की तर्ज पर काम करेगा। क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी, एचयूआरएल शैलेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि केंद्र व आधुनिक लैब बन कर तैयार हो गए हैं, इनका संचालन शुरू होने पर किसान मुफ्त में मिट्टी जांच कराकर संतुलित खाद का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसका उद्देश्य पैदावार की लागत घटाकर बेहतर उत्पादन कराना है।
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सिरौलीगौसपुर तहसील के मरकामऊ में प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। यहां हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के सहयोग से स्थापित की गई अत्याधुनिक प्रयोगशाला के जरिये किसान अब अपने खेत की मिट्टी और खाद के नमूनों की निशुल्क जांच करा सकेंगे। जांच रिपोर्ट से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक स्थिति का पता चलेगा, जिससे असंतुलित खाद के बेजा इस्तेमाल पर रोक लगने से खेती की लागत में कमी आएगी, वहीं दूसरी तरफ जमीन की उर्वरा शक्ति भी बची रहने से फसलें लहलहाएगी।
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मरकामऊ का यह केंद्र एक ही जगह सब कुछ की तर्ज पर काम करेगा। क्षेत्रीय सहायक विकास अधिकारी, एचयूआरएल शैलेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि केंद्र व आधुनिक लैब बन कर तैयार हो गए हैं, इनका संचालन शुरू होने पर किसान मुफ्त में मिट्टी जांच कराकर संतुलित खाद का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसका उद्देश्य पैदावार की लागत घटाकर बेहतर उत्पादन कराना है।
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