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Barabanki News: एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा एसएनसीयू
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:15 AM IST
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संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर मेें बना एसएनसीयू वार्ड।
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सिरौलीगौसपुर। स्थानीय संयुक्त चिकित्सालय के एसएनसीयू में डॉक्टरों की कमी के कारण नवजात शिशुओं का इलाज प्रभावित हो रहा है। दो डॉक्टरों के तबादले के एक माह बाद भी नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में चौबीस घंटे की आपात सेवा केवल एक डॉक्टर के सहारे चल रही है।
इस स्थिति से नवजात शिशुओं की देखभाल में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सौ बेड वाले इस अस्पताल में एसएनसीयू की स्थापना वर्ष 2024 में हुई थी। इसका उद्देश्य समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और पीलिया से पीड़ित शिशुओं का इलाज करना था। स्थापना के समय डॉक्टर सीपी कनौजिया, डॉक्टर संयुक्ता गुप्ता और डॉक्टर शिवम जायसवाल तैनात थे। इन तीनों डॉक्टरों पर नवजात शिशुओं की चौबीसों घंटे देखभाल की जिम्मेदारी थी।
अब डॉक्टर संयुक्ता गुप्ता और डॉक्टर सीपी कनौजिया का तबादला हो चुका है। उनके तबादले को एक माह बीत गया है, लेकिन नए डॉक्टर नहीं आए हैं। ऐसे में डॉक्टर शिवम जायसवाल अकेले ही पूरी आपात सेवा संभाल रहे हैं। इससे अस्पताल में मरीजों को उचित देखभाल मिलने में बाधा आ रही है।
एसएनसीयू का महत्व
एसएनसीयू का मुख्य कार्य एक से 28 दिन तक के नवजात शिशुओं का उपचार करना है। इसमें कम वजन, पीलिया और गर्भ में शौच जैसी बीमारियों से पीड़ित शिशु शामिल होते हैं। यह सुविधा गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के लिए जीवनरक्षक है। एक डॉक्टर के भरोसे इतनी महत्वपूर्ण इकाई चलाना चुनौतीपूर्ण है।
वर्जन
सीएमएस डॉक्टर एके प्रियदर्शी ने बताया कि उच्च अधिकारियों को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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इस स्थिति से नवजात शिशुओं की देखभाल में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सौ बेड वाले इस अस्पताल में एसएनसीयू की स्थापना वर्ष 2024 में हुई थी। इसका उद्देश्य समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और पीलिया से पीड़ित शिशुओं का इलाज करना था। स्थापना के समय डॉक्टर सीपी कनौजिया, डॉक्टर संयुक्ता गुप्ता और डॉक्टर शिवम जायसवाल तैनात थे। इन तीनों डॉक्टरों पर नवजात शिशुओं की चौबीसों घंटे देखभाल की जिम्मेदारी थी।
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अब डॉक्टर संयुक्ता गुप्ता और डॉक्टर सीपी कनौजिया का तबादला हो चुका है। उनके तबादले को एक माह बीत गया है, लेकिन नए डॉक्टर नहीं आए हैं। ऐसे में डॉक्टर शिवम जायसवाल अकेले ही पूरी आपात सेवा संभाल रहे हैं। इससे अस्पताल में मरीजों को उचित देखभाल मिलने में बाधा आ रही है।
एसएनसीयू का महत्व
एसएनसीयू का मुख्य कार्य एक से 28 दिन तक के नवजात शिशुओं का उपचार करना है। इसमें कम वजन, पीलिया और गर्भ में शौच जैसी बीमारियों से पीड़ित शिशु शामिल होते हैं। यह सुविधा गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के लिए जीवनरक्षक है। एक डॉक्टर के भरोसे इतनी महत्वपूर्ण इकाई चलाना चुनौतीपूर्ण है।
वर्जन
सीएमएस डॉक्टर एके प्रियदर्शी ने बताया कि उच्च अधिकारियों को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।