{"_id":"6a38253fed4a3d3c190ab68b","slug":"the-cycle-of-time-has-become-a-challenge-for-high-achievers-barabanki-news-c-315-1-brb1038-171821-2026-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: मेधावियों के लिए समय चक्र बना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: मेधावियों के लिए समय चक्र बना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बाराबंकी। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) रविवार को जिले के आठ केंद्रों पर भले ही कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण ढंग से निपट गई, लेकिन परीक्षा हॉल के भीतर अभ्यर्थियों को एक अलग ही मनोवैज्ञानिक और तकनीकी जंग लड़नी पड़ी। इस बार का प्रश्नपत्र पारंपरिक ढर्रे से बिल्कुल जुदा था।
परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरे बता रहे थे कि इस बार मुकाबला सिर्फ सही जवाब देने का नहीं, बल्कि घड़ी की सुइयों को मात देने का था। थर्मल फिजिक्स, मैकेनिक्स और थर्मोडायनामिक्स के ऐसे पेचीदा और लंबे न्यूमेरिकल्स (अंकगणितीय सवाल) सामने थे, जिन्होंने अच्छे-अच्छे मेधावियों के कैलकुलेशन को उलझाकर रख दिया।
इस बार बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सीधे व सपाट सवालों ने शुरुआत में छात्रों को राहत की सांस जरूर दी, लेकिन जैसे ही उन्होंने फिजिक्स सेक्शन का पन्ना पलटा, पसीने छूट गए। सवालों की लेंथ इतनी ज्यादा थी कि रफ वर्क करते-करते समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि जिन छात्रों ने फिजिक्स में टाइम मैनेजमेंट नहीं किया, उनका स्कोरिंग ग्राफ सीधे प्रभावित हो सकता है।
विज्ञापन
बोले परीक्षार्थी-
फिजिक्स के चक्रव्यूह में फंसे सवाल
बायो और केमिस्ट्री ने उम्मीद जगाई थी, लेकिन फिजिक्स सेक्शन उम्मीद से कई गुना उलझाऊ और कठिन आ गया। लंबे समीकरणों को हल करने के फेर में आखिरी के मिनटों में दबाव इतना बढ़ गया कि आते हुए सवाल भी हड़बड़ाहट की भेंट चढ़ गए।
- फजीलत हुसैन, सफदरगंज
.........................................................
पिछले साल के मुकाबले भारी रहा पेपर
अगर पिछले साल के पेपर से तुलना करें तो इस बार का ओवरऑल कठिनता का स्तर काफी ऊपर था। विशेषकर फिजिक्स के समीकरण इतने घुमावदार थे कि उन्हें समझने और हल करने में दोगुना समय लग रहा था।
- आरती वर्मा, बड़ागांव
...................................................
अब सिर्फ बेदाग रिजल्ट की दुआ
हम छात्र पहले ही परीक्षाओं के रद्द होने और री-एग्जाम के चक्रव्यूह में फंसकर भारी मानसिक तनाव झेल चुके हैं। अब पेपर लीक या विवादों पर कुछ भी कहना बेकार है। बस यही दुआ है कि इस बार सब साफ-सुथरा रहे और परीक्षा निर्विवाद रहे।
- अमन, मसौली
...............................................................
सहारा बनी केमिस्ट्री, फिजिक्स ने झटका दिया
बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सेक्शन काफी हद तक स्कोरिंग और राहत देने वाले थे, लेकिन फिजिक्स ने ऐन वक्त पर बड़ा झटका दिया। कुछ सवाल इतने लंबे थे कि उन्हें दो बार पढ़ना पड़ रहा था। फिर भी मेहनत पर पूरा भरोसा है।
- राखी रावत
परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरे बता रहे थे कि इस बार मुकाबला सिर्फ सही जवाब देने का नहीं, बल्कि घड़ी की सुइयों को मात देने का था। थर्मल फिजिक्स, मैकेनिक्स और थर्मोडायनामिक्स के ऐसे पेचीदा और लंबे न्यूमेरिकल्स (अंकगणितीय सवाल) सामने थे, जिन्होंने अच्छे-अच्छे मेधावियों के कैलकुलेशन को उलझाकर रख दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बार बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सीधे व सपाट सवालों ने शुरुआत में छात्रों को राहत की सांस जरूर दी, लेकिन जैसे ही उन्होंने फिजिक्स सेक्शन का पन्ना पलटा, पसीने छूट गए। सवालों की लेंथ इतनी ज्यादा थी कि रफ वर्क करते-करते समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि जिन छात्रों ने फिजिक्स में टाइम मैनेजमेंट नहीं किया, उनका स्कोरिंग ग्राफ सीधे प्रभावित हो सकता है।
बोले परीक्षार्थी-
फिजिक्स के चक्रव्यूह में फंसे सवाल
बायो और केमिस्ट्री ने उम्मीद जगाई थी, लेकिन फिजिक्स सेक्शन उम्मीद से कई गुना उलझाऊ और कठिन आ गया। लंबे समीकरणों को हल करने के फेर में आखिरी के मिनटों में दबाव इतना बढ़ गया कि आते हुए सवाल भी हड़बड़ाहट की भेंट चढ़ गए।
- फजीलत हुसैन, सफदरगंज
.........................................................
पिछले साल के मुकाबले भारी रहा पेपर
अगर पिछले साल के पेपर से तुलना करें तो इस बार का ओवरऑल कठिनता का स्तर काफी ऊपर था। विशेषकर फिजिक्स के समीकरण इतने घुमावदार थे कि उन्हें समझने और हल करने में दोगुना समय लग रहा था।
- आरती वर्मा, बड़ागांव
...................................................
अब सिर्फ बेदाग रिजल्ट की दुआ
हम छात्र पहले ही परीक्षाओं के रद्द होने और री-एग्जाम के चक्रव्यूह में फंसकर भारी मानसिक तनाव झेल चुके हैं। अब पेपर लीक या विवादों पर कुछ भी कहना बेकार है। बस यही दुआ है कि इस बार सब साफ-सुथरा रहे और परीक्षा निर्विवाद रहे।
- अमन, मसौली
...............................................................
सहारा बनी केमिस्ट्री, फिजिक्स ने झटका दिया
बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सेक्शन काफी हद तक स्कोरिंग और राहत देने वाले थे, लेकिन फिजिक्स ने ऐन वक्त पर बड़ा झटका दिया। कुछ सवाल इतने लंबे थे कि उन्हें दो बार पढ़ना पड़ रहा था। फिर भी मेहनत पर पूरा भरोसा है।
- राखी रावत