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Barabanki News: स्वावलंबन की सिलाई से तिरंगा अभियान को मिली रफ्तार
Mon, 10 Aug 2026 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:18 AM IST
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रामसनेहीघाट। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संचालित हर घर तिरंगा अभियान को ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन ने एक नई गति दी है। बनीकोडर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं देश की शान का प्रतीक राष्ट्रीय तिरंगा तैयार कर अपनी आर्थिक आजादी की नई पटकथा लिख रही हैं।
संकुल स्तरीय समिति सनौली की अगुवाई में छंदवल, काशीपुर, सनौली, तिवारी पुर और थोरथिया जैसे गांवों के सात समूहों की 72 महिलाएं दिन-रात मेहनत करके 22 हजार तिरंगे तैयार करने के लक्ष्य में जुटी हैं। 22 रुपये प्रति ध्वज की दर से तैयार इन तिरंगों की आपूर्ति ब्लॉक की 87 ग्राम पंचायतों में की जाएगी। वर्ष 2017 से गठित जय काशीदास समूह की ममता यादव को इस पूरे निर्माण कार्य का नोडल बनाया गया है। ममता बताती हैं कि एक अगस्त से लगातार चल रहे इस काम से महिलाओं को घर बैठे ही स्वरोजगार मिला है। तिरंगा सिलना उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता के साथ राष्ट्र सेवा से जुड़े गर्व का अहसास भी करा रहा है।
ब्लॉक मैनेजर बनीकोडर, सूर्या त्रिपाठी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने पर तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इससे हर घर तिरंगा अभियान को रफ्तार मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भर बनने का सीधा अवसर भी मिल रहा है।
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संकुल स्तरीय समिति सनौली की अगुवाई में छंदवल, काशीपुर, सनौली, तिवारी पुर और थोरथिया जैसे गांवों के सात समूहों की 72 महिलाएं दिन-रात मेहनत करके 22 हजार तिरंगे तैयार करने के लक्ष्य में जुटी हैं। 22 रुपये प्रति ध्वज की दर से तैयार इन तिरंगों की आपूर्ति ब्लॉक की 87 ग्राम पंचायतों में की जाएगी। वर्ष 2017 से गठित जय काशीदास समूह की ममता यादव को इस पूरे निर्माण कार्य का नोडल बनाया गया है। ममता बताती हैं कि एक अगस्त से लगातार चल रहे इस काम से महिलाओं को घर बैठे ही स्वरोजगार मिला है। तिरंगा सिलना उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता के साथ राष्ट्र सेवा से जुड़े गर्व का अहसास भी करा रहा है।
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ब्लॉक मैनेजर बनीकोडर, सूर्या त्रिपाठी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने पर तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इससे हर घर तिरंगा अभियान को रफ्तार मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भर बनने का सीधा अवसर भी मिल रहा है।
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