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Barabanki News: 41 खातों में करीब 2.77 करोड़ का हुआ था लेनदेन
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:59 AM IST
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बाराबंकी। जैदपुर के बरौली मलिक स्थित बैंक ऑफ इंडिया में वर्ष 2022-23 के दौरान हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सीबीआई ने इस हाई प्रोफाइल बैंकिंग फ्रॉड की जांच अपने हाथ में ले लिया है। एजेंसी ने जैदपुर समेत कई थानों में दर्ज मामलों की केस डायरी, रिपोर्ट और चार्जशीट कब्जे में लेकर गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
जांच के दौरान बैंक द्वारा सौंपे गए 41 खातों में करीब 2.77 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। सीबीआई न सिर्फ घोटाले की परतें खोल रही है, बल्कि पुलिस विवेचना भी जांच के दायरे में है। इसे लेकर सीबीआई ने 15 मार्च 2026 को तत्कालीन बैंक मैनेजर अमन वर्मा, फील्ड ऑफिसर शैलेंद्र प्रताप समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी।
घोटाले की शुरुआत 2022 में हुई, जब बैंक में कई लोगों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर मुद्रा लोन सहित अन्य योजनाओं के जरिये करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि जिनके नाम पर कर्ज लिया गया, उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा जुलाई 2023 के बाद तब हुआ, जब पीड़ितों के घरों पर अचानक ऋण वसूली के नोटिस पहुंचने लगे।
बिना एक पैसा पाए लोग लाखों के कर्जदार बन चुके थे। इस सनसनीखेज घोटाले का खुलासा 17 सितंबर 2023 को अमर उजाला ने प्रमुखता से किया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए।
अक्तूबर 2023 में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बैंक मैनेजर अमन वर्मा, फील्ड ऑफिसर शैलेंद्र प्रताप और उनके सहयोगी लखनऊ निवासी सुरेश मधु रावत को गिरफ्तार कर जेल भेजा।घोटाले की गहराई और नेटवर्क को देखते हुए मामला सीबीआई तक पहुंचा। एजेंसी ने आठ मामलों की पूरी फाइल अपने कब्जे में ले ली है।
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जांच के दौरान बैंक द्वारा सौंपे गए 41 खातों में करीब 2.77 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। सीबीआई न सिर्फ घोटाले की परतें खोल रही है, बल्कि पुलिस विवेचना भी जांच के दायरे में है। इसे लेकर सीबीआई ने 15 मार्च 2026 को तत्कालीन बैंक मैनेजर अमन वर्मा, फील्ड ऑफिसर शैलेंद्र प्रताप समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी।
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घोटाले की शुरुआत 2022 में हुई, जब बैंक में कई लोगों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर मुद्रा लोन सहित अन्य योजनाओं के जरिये करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि जिनके नाम पर कर्ज लिया गया, उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा जुलाई 2023 के बाद तब हुआ, जब पीड़ितों के घरों पर अचानक ऋण वसूली के नोटिस पहुंचने लगे।
बिना एक पैसा पाए लोग लाखों के कर्जदार बन चुके थे। इस सनसनीखेज घोटाले का खुलासा 17 सितंबर 2023 को अमर उजाला ने प्रमुखता से किया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए।
अक्तूबर 2023 में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बैंक मैनेजर अमन वर्मा, फील्ड ऑफिसर शैलेंद्र प्रताप और उनके सहयोगी लखनऊ निवासी सुरेश मधु रावत को गिरफ्तार कर जेल भेजा।घोटाले की गहराई और नेटवर्क को देखते हुए मामला सीबीआई तक पहुंचा। एजेंसी ने आठ मामलों की पूरी फाइल अपने कब्जे में ले ली है।

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