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Bareilly News: व्यक्तिगत विकास को अध्यात्म मानते हैं 85 फीसदी युवा
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बरेली। प्रसन्नता के मायने जानने के लिए रानी अवंतीबाई महिला महाविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सुरभि श्रीवास्तव ने छात्राओं से अलग-अलग कॉलेजों के स्नातक के 50 विद्यार्थियों के बीच सर्वे कराया। इसमें पता चला कि 85 प्रतिशत युवा अपने भीतरी गुणों के विकास को अध्यात्म मानते हैं।
डॉ. सुरभि ने बताया कि युवाओं की सोच जानने के लिए प्रश्नावली तैयार की गई। इसमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं व्यक्तिगत पृष्ठभूमि के सवाल शामिल किए गए। सर्वे से पता चला कि अब युवा दो वक्त की रोटी जुटाने से आगे की सोच रहे हैं। उनका मानना है कि आर्थिक मजबूती जितनी जरूरी है, उतनी ही आवश्यक रुचि के कार्य करना भी है। वर्तमान में युवा अध्यात्म को धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर नहीं देखते। स्वयं का विकास ही युवाओं के लिए अध्यात्म है। सामाजिक सक्रियता पर भी युवाओं ने जोर दिया। डॉ. सुरभि ने बताया कि अब तक देखा गया कि 22-23 वर्ष के युवाओं ने नौकरी छोड़ी, क्योंकि उसका सेटअप बेहद पारंपरिक था। संवाद
सर्वे में शामिल प्रश्न
प्रश्न : आपके लिए सकारात्मक संवेग क्या है?
उत्तर : 70 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उनके लिए मानिसक संतुष्टि ही सकारात्मक संवेग है।
प्रश्न : सामाजिक एवं मानिसक कल्याण के क्या मायने हैं?
उत्तर : 82 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि परिवार व दोस्तों को समय देना सामाजिक कल्याण है व अपनी रुचि को समय देना मानसिक कल्याण है।
प्रश्न : अध्यात्म से क्या समझते हैं?
उत्तर : 85 प्रतिशत युवाओं का मानना था कि अध्यात्म का अर्थ व्यक्तिगत विकास व आत्म स्वीकृति है।
प्रश्न : सकारात्मक सामाजिक व्यवहार क्या है?
उत्तर : 52 प्रतिशत युवाओं ने माना कि परोपकारी होना, दूसरों को महत्व देना, क्षमा कराना ही सकारात्मक सामाजिक व्यवहार है।
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डॉ. सुरभि ने बताया कि युवाओं की सोच जानने के लिए प्रश्नावली तैयार की गई। इसमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं व्यक्तिगत पृष्ठभूमि के सवाल शामिल किए गए। सर्वे से पता चला कि अब युवा दो वक्त की रोटी जुटाने से आगे की सोच रहे हैं। उनका मानना है कि आर्थिक मजबूती जितनी जरूरी है, उतनी ही आवश्यक रुचि के कार्य करना भी है। वर्तमान में युवा अध्यात्म को धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर नहीं देखते। स्वयं का विकास ही युवाओं के लिए अध्यात्म है। सामाजिक सक्रियता पर भी युवाओं ने जोर दिया। डॉ. सुरभि ने बताया कि अब तक देखा गया कि 22-23 वर्ष के युवाओं ने नौकरी छोड़ी, क्योंकि उसका सेटअप बेहद पारंपरिक था। संवाद
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सर्वे में शामिल प्रश्न
प्रश्न : आपके लिए सकारात्मक संवेग क्या है?
उत्तर : 70 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उनके लिए मानिसक संतुष्टि ही सकारात्मक संवेग है।
प्रश्न : सामाजिक एवं मानिसक कल्याण के क्या मायने हैं?
उत्तर : 82 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि परिवार व दोस्तों को समय देना सामाजिक कल्याण है व अपनी रुचि को समय देना मानसिक कल्याण है।
प्रश्न : अध्यात्म से क्या समझते हैं?
उत्तर : 85 प्रतिशत युवाओं का मानना था कि अध्यात्म का अर्थ व्यक्तिगत विकास व आत्म स्वीकृति है।
प्रश्न : सकारात्मक सामाजिक व्यवहार क्या है?
उत्तर : 52 प्रतिशत युवाओं ने माना कि परोपकारी होना, दूसरों को महत्व देना, क्षमा कराना ही सकारात्मक सामाजिक व्यवहार है।