Bareilly Accident: सड़क पर खड़ा 'खूनी' पेड़, काटने के लिए कागज की कुल्हाड़ी चला रहे अफसर; तीन की गई थी जान
बरेली के स्वाले नगर में रामपुर रोड पर पेड़ से टकराने से कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी। यह पेड़ वर्षों से सड़क पर खड़ा है, लेकिन जिम्मेदार पेड़ कटवाने के नाम पर कागजी घोड़े तो दौड़ाते रहे। हादसे के बाद नींद टूटी और अब सड़क पर खड़े पेड़ों को कटवाने की बात कही जा रही है।
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बरेली में रामपुर रोड पर स्वालेनगर में रविवार सुबह हुए हादसे की प्रमुख वजह सड़क पर खड़े पेड़ को लेकर लीपापोती शुरू हो गई है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और चालक को झपकी आने को हादसे की प्रमुख वजह बताया गया है, जबकि सड़क पर खड़े पेड़ के आसपास कोई संकेतक, चेतावनी बोर्ड या फिर स्पीड ब्रेकर तक नहीं हैं। जिम्मेदार पेड़ कटवाने के नाम पर कागजी घोड़े तो दौड़ाते रहे, लेकिन मौके पर सुरक्षात्मक उपाय कराना जरूरी नहीं समझा।
इस स्थान को ब्लैक स्पॉट के रूप में भी शामिल नहीं किया गया। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता भगत सिंह का कहना है कि अगर किसी स्थान पर तीन साल में पांच या पांच से अधिक हादसों में लोगों की जान जाती है, तब उस स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है। एआरटीओ प्रवर्तन वैभव श्रोतीय ने बताया कि मौके पर कोई संकेतक नहीं पाया गया है। हादसे का एक प्रमुख कारण यह भी हो सकता है। सप्ताहभर में रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।
जिले में 59 खतरनाक टी और वाई प्वॉइंट
पुलिस ने भी जिलेभर के नेशनल, स्टेट हाईवे और अन्य जिला मार्गों पर 59 टी और वाई प्वॉइंट चिह्नित किए हैं। बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र में चार टी प्वॉइंट हैं। फरीदपुर में तीन टी और दो वाई, कैंट में तीन और भोजीपुरा में दो टी प्वॉइंट, इज्जतनगर और भमोरा थाना क्षेत्र में चार-चार टी प्वॉइंट चिह्नित किए गए हैं। यहां कोई सुधारात्मक उपाय नहीं कराए गए हैं।
फाइलों में ही दम तोड़ रहे सुधार के कार्य
लोक निर्माण विभाग ने जिले के 45 ब्लैक स्पॉट पर सुधार के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 38.63 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तो बनाई, लेकिन बजट न मिलने के कारण फाइल धूल फांक रही है। चालू वित्तीय वर्ष में सड़क सुरक्षा के दावे एस्टीमेट तक ही सीमित रहे। इन खतरनाक ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के बजाय सिर्फ संकेतक लगाए गए हैं।
वन विभाग की टूटी नींद, होगी पेड़ों की कटाई
तीन मौतों के बाद वन विभाग के अफसरों की नींद भी टूट गई है। अब इन पेड़ों को छपान के बाद कटवाया जाएगा। डीएफओ दीक्षा भंडारी ने बताया कि अब तक पेड़ों की कटाई के लिए कोई डिमांड नहीं की गई थी। असांविधानिक तरीके से सड़कों के चौड़ीकरण से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है। सपा सरकार में बनाई गई इस सड़क के लिए कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी की तरफ से एनओसी के लिए वन विभाग से संपर्क ही नहीं किया गया।
इससे जुड़ी कोई पत्रावली लंबित भी नहीं है। अब जनहित में परमिशन लेकर एक सप्ताह में खतरनाक पेड़ों को कटवाया जाएगा। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने बताया कि इस मार्ग का निर्माण पूर्व में पीडब्ल्यूडी भवन खंड की तरफ से कराया गया था। उस समय वह सड़क बनाने का काम करती थी। उस समय के अधिशासी अभियंता सेवानिवृत्त हो गए और जेई का ट्रांसफर हो गया है।
