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Bareilly News: मानवीय संबंधों की जटिलताओं को उजागर कर गया ‘ब्रोकन चेयर’
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बरेली। स्टेडियम रोड स्थित रिद्धिमा सभागार में रविवार को प्रयागराज की संस्था रंगचक्र ने नाटक ‘ब्रोकन चेयर’ का मंचन किया। यह नाटक मानव जीवन के अंतर्द्वंद्व, भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को उजागर कर गया।
नाटक की कहानी तीन पुराने साथियों रवि, अजीज और सुमित्रा के इर्द-गिर्द घूमती है जो वर्षों बाद एक वीरान स्थान पर मिलते हैं। वहां रवि को एक कुर्सी मिलती है, जिसका एक पाया गायब होता है। पाये की तलाश के दौरान उसे पता चलता है कि वह अजीज के पास है। रवि उससे कुर्सी का पाया मांगता है, लेकिन अजीज इन्कार कर देता है। दोनों के बीच अधिकार और स्वामित्व का विवाद गहराने लगता है।
इसी बीच सुमित्रा वहां पहुंचती है। वह भी कुर्सी को हासिल करना चाहती है। अजीज उससे पूछता है कि यदि वह कुर्सी का पाया उसे दे दे तो बदले में वह क्या दे सकती है? नाटक की कहानी दर्शकों को यह सोचने पर विवश करती है कि जीवन में अनेक संघर्ष उन वस्तुओं के लिए होते हैं जिनका वास्तविक महत्व बहुत कम होता है, जबकि रिश्ते और मानवीय संवेदनाएं कहीं अधिक मूल्यवान होती हैं। इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, देविशा, सुभाष मेहरा आदि मौजूद रहे।
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नाटक की कहानी तीन पुराने साथियों रवि, अजीज और सुमित्रा के इर्द-गिर्द घूमती है जो वर्षों बाद एक वीरान स्थान पर मिलते हैं। वहां रवि को एक कुर्सी मिलती है, जिसका एक पाया गायब होता है। पाये की तलाश के दौरान उसे पता चलता है कि वह अजीज के पास है। रवि उससे कुर्सी का पाया मांगता है, लेकिन अजीज इन्कार कर देता है। दोनों के बीच अधिकार और स्वामित्व का विवाद गहराने लगता है।
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इसी बीच सुमित्रा वहां पहुंचती है। वह भी कुर्सी को हासिल करना चाहती है। अजीज उससे पूछता है कि यदि वह कुर्सी का पाया उसे दे दे तो बदले में वह क्या दे सकती है? नाटक की कहानी दर्शकों को यह सोचने पर विवश करती है कि जीवन में अनेक संघर्ष उन वस्तुओं के लिए होते हैं जिनका वास्तविक महत्व बहुत कम होता है, जबकि रिश्ते और मानवीय संवेदनाएं कहीं अधिक मूल्यवान होती हैं। इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, देविशा, सुभाष मेहरा आदि मौजूद रहे।