{"_id":"6a266113fea525264307ce42","slug":"hawala-network-busted-in-bareilly-befriended-a-dubai-based-operator-via-facebook-company-opened-in-cousin-name-2026-06-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: फेसबुक पर दुबई से दोस्ती, नोटों के नंबर करते थे व्हाट्सएप; इस नाम से खोली कंपनी, रिटर्न में आय दिखाई शून्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: फेसबुक पर दुबई से दोस्ती, नोटों के नंबर करते थे व्हाट्सएप; इस नाम से खोली कंपनी, रिटर्न में आय दिखाई शून्य
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 08 Jun 2026 01:04 PM IST
विज्ञापन
सार
बरेली की बारादरी पुलिस और एसओजी ने संयुक्त कार्रवाई में दुबई से संचालित हवाला नेटवर्क का खुलासा किया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 लाख रुपये नकद, दो फर्जी आधार कार्ड और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस मामले में चार नामजद समेत कई आरोपी भागे हुए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
hawala network
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
बरेली शहर निवासी जमीर अहमद और उसका तहेरा भाई मोईन अली (भागा हुआ) ही बरेली से हवाला धंधे के असली खिलाड़ी बताए जा रहे हैं। जमीर ने पुलिस को बताया कि दोनों शुरू में जरी के धंधे से जुड़े थे। इसी से उनका कश्मीर और दिल्ली के चांदनी चौक के व्यापारियों से जुड़ाव हुआ।
फेसबुक पर दुबई के अली जीशान से दोस्ती के बाद इन्होंने हवाला के संगठित अपराध का नेटवर्क बना लिया। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जमीर अहमद काफी समय से हवाला के जरिये रोज लाखों रुपये इधर-उधर कर रहा था।
जगदीश चोटिया भी इसी धंधे से जुड़ा था तो ये लोग साथ काम करने लगे। जमीर ने बताया कि उसका तहेरा भाई मोईन अली हजियापुर में उसके घर के पास ही रहता है। दोनों ही काफी समय तक कश्मीर में रहे हैं और वहां के जरी व कारचोबी व्यापारियों से उनका लेन-देन चलता था।
विज्ञापन
Trending Videos
फेसबुक पर दुबई के अली जीशान से दोस्ती के बाद इन्होंने हवाला के संगठित अपराध का नेटवर्क बना लिया। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जमीर अहमद काफी समय से हवाला के जरिये रोज लाखों रुपये इधर-उधर कर रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
जगदीश चोटिया भी इसी धंधे से जुड़ा था तो ये लोग साथ काम करने लगे। जमीर ने बताया कि उसका तहेरा भाई मोईन अली हजियापुर में उसके घर के पास ही रहता है। दोनों ही काफी समय तक कश्मीर में रहे हैं और वहां के जरी व कारचोबी व्यापारियों से उनका लेन-देन चलता था।
पूछताछ में जमीर ने बताया कि अली जीशान नाम के व्यक्ति से उसका फेसबुक के जरिये संपर्क हुआ। वह खुद को दुबई का निवासी बताता था। अली जीशान से व्हाट्सएप पर बात होने लगी तो उसने कंपनी के नाम बैंक खाता खुलवाने की बात कही।
उसने कहा कि मैं खाते में मोटी रकम भेजता रहूंगा। तुम उस रकम को निकालकर मेरे बताए टोकन नंबर वाले व्यक्ति के पास स्वयं जाकर या किसी करीबी से रकम भिजवाते रहना। इसके लिए तुम्हें मोटा कमीशन दूंगा।
तहेरे भाई के नाम से खोली कंपनी, रिटर्न में आय दिखाई शून्य
जमीर ने बताया कि उसने तहेरे भाई मोईन अली के नाम से केजीएन नाम की कंपनी खुलवाई। मोईन से करार हुआ कि वह इस फर्जी कारोबार में आए रुपयों का आधा हिस्सा लेगा। कंपनी का दफ्तर मकान नंबर 48 निकट शिव मंदिर आशुतोष सिटी पीलीभीत बाइपास रोड बरेली पर खोला गया। चूंकि कंपनी किसी कारोबार के लिए नहीं खोली गई तो हमेशा इसका जीएसटी रिटर्न शून्य भरता रहा। वहीं, कंपनी के चालू खाते में आने वाली रकम अली जीशान के इशारे पर टोकन वाले व्यक्तियों को जगदीश चोटिया के जरिये नकद ही दिल्ली भिजवाता रहा।
जमीर ने बताया कि उसने तहेरे भाई मोईन अली के नाम से केजीएन नाम की कंपनी खुलवाई। मोईन से करार हुआ कि वह इस फर्जी कारोबार में आए रुपयों का आधा हिस्सा लेगा। कंपनी का दफ्तर मकान नंबर 48 निकट शिव मंदिर आशुतोष सिटी पीलीभीत बाइपास रोड बरेली पर खोला गया। चूंकि कंपनी किसी कारोबार के लिए नहीं खोली गई तो हमेशा इसका जीएसटी रिटर्न शून्य भरता रहा। वहीं, कंपनी के चालू खाते में आने वाली रकम अली जीशान के इशारे पर टोकन वाले व्यक्तियों को जगदीश चोटिया के जरिये नकद ही दिल्ली भिजवाता रहा।
नोटों के नंबर करते थे व्हाट्सएप
जमीर अहमद ने बताया कि जिन टोकन वालों के पास वह रुपया भेजता रहा है, उनसे उसका कोई परिचय नहीं है। अली जीशान ही उन्हें टोकन वाले के नोट का नंबर व्हाट्सएप करता था। केजीएन कंपनी के खाते में जो भी रकम आई, वह कहां से आई, किसने भेजी ये भी वह जानने की कोशिश नहीं करता था।
जमीर अहमद ने बताया कि जिन टोकन वालों के पास वह रुपया भेजता रहा है, उनसे उसका कोई परिचय नहीं है। अली जीशान ही उन्हें टोकन वाले के नोट का नंबर व्हाट्सएप करता था। केजीएन कंपनी के खाते में जो भी रकम आई, वह कहां से आई, किसने भेजी ये भी वह जानने की कोशिश नहीं करता था।
एसएसपी ने बताया कि चूंकि कंपनी के खाते में नकद ही रकम जमा की जाती थी और ये लोग भी नकद रकम निकालकर आगे भेजते थे तो एटीएम कक्ष के अलावा इनके पकड़े जाने का कोई चांस नहीं बनता था।
दिल्ली के धंधेबाजों को डील करता था चोटिया
आरोपी जगदीश चोटिया ने बताया कि चार साल से बरेली में रहकर वह हवाला का काम कर रहा है। जो सेठ व बड़े लोग बेनामी धन को टैक्स बचाने के लिए इधर से उधर भेजते हैं, उसका कमीशन एक लाख पर तीन सौ रुपया वह जमीर से लेता है।
आरोपी जगदीश चोटिया ने बताया कि चार साल से बरेली में रहकर वह हवाला का काम कर रहा है। जो सेठ व बड़े लोग बेनामी धन को टैक्स बचाने के लिए इधर से उधर भेजते हैं, उसका कमीशन एक लाख पर तीन सौ रुपया वह जमीर से लेता है।
जमीर को पांच से दस फीसदी कमीशन मिलने की बात बताई गई। दिल्ली में चांदनी चौक पर मोतियों व नगों का धंधा करने वाले लालचंद व धम्माराम को वह नकद रुपये देकर आता था। वे दिल्ली में टोकन धारक को रकम दे देते है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 61(2), 111, 318(4), 336(3), 338 और 340(2) लगाई गई हैं।
गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 61(2), 111, 318(4), 336(3), 338 और 340(2) लगाई गई हैं।