सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Leaving his job and joining the farm organic farming changed his destiny

Bareilly News: लाखों रुपये की नौकरी छोड़ खेतों में उतरे युवा, जैविक खेती से बदली तकदीर

संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Mon, 09 Mar 2026 11:13 AM IST
विज्ञापन
सार

लाखों रुपये के पैकेज वाली नौकरियां छोड़कर युवा खेतों का रुख कर रहे हैं। पारंपरिक तरीके छोड़कर खेती-किसानी में नवाचार लाने वाले ये युवा लाखों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं। इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे युवा भी नई तकनीक से खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। 

Leaving his job and joining the farm organic farming changed his destiny
किसान संजीव गंगवार - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार

बरेली में बड़ा बाइपास के किनारे स्थित गांव परधौली के रहने वाले 29 वर्षीय संजीव गंगवार बैंक में नौकरी करते थे। करीब साल भर पहले उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला लिया। पहले तो उन्होंने खेती-बाड़ी के नए तौर-तरीकों को लेकर रिसर्च की। इंटरनेट के साथ ही हरियाणा, गुजरात व पंजाब जाकर सफल किसानों से उनके तरीके सीखे।
Trending Videos


इसके बाद बैंक व नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड से सब्सिडी लेकर पॉली हाउस लगाया। बीज रहित खीरे का बीज पोलैंड से मंगाया। उन्होंने बताया कि 35 दिन के भीतर एक फसल तैयार हो जाती है। होटलों से संपर्क करके वह उपज की सीधी बिक्री भी कर रहे हैं। इससे अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। उन्होंने बताया कि खेती से वह साल में सात से आठ लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। दादाजी भी अपनी पारंपरिक खेती छोड़कर मेरे काम में शामिल होने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजकुमार ने लगाए पॉली हाउस 
वहीं, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में एक समय पर काम करने वाले युवा किसान राजकुमार ने भी कई विश्वविद्यालय की नौकरी छोड़ खेती शुरू की। वह बताते हैं कि उन्होंने भाइयों के साथ मिलकर अब तक चार पॉली हाउस लगाए हैं। यहां वह लाल व पीली शिमला मिर्च के साथ ही खीरा भी उगा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में काम करने के दौरान पौधों की देखभाल, कीड़ों से बचाव का प्रशिक्षण मिला। इसका फायदा अब मिलता है। इजरायली ड्रिप इरिगेशन तकनीक से सिंचाई करके वह पानी की बचत भी कर रहे हैं। लागत भी घटी है।

लाल बहादुर ने स्थापित की मशरूम के बीज की प्रयोगशाला
फरीदपुर के गांव किर्सुरा के रहने वाले लाल बहादुर कई वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे पहले वह कई नौकरियां भी कर चुके हैं। वह बताते हैं कि पहले हरियाणा व पंजाब के एक इंस्ट्रक्टर को बुलाकर ट्रेनिंग ली। बीज भी बाहर से मंगाया। करीब दो साल पहले मशरूम के बीज बनाने के लिए प्रयोगशाला स्थापित की। अब वह बीज का निर्यात भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.5 टन मशरूम की पैदावार हो रही है। इससे करीब 25 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed