Bareilly News: लाखों रुपये की नौकरी छोड़ खेतों में उतरे युवा, जैविक खेती से बदली तकदीर
लाखों रुपये के पैकेज वाली नौकरियां छोड़कर युवा खेतों का रुख कर रहे हैं। पारंपरिक तरीके छोड़कर खेती-किसानी में नवाचार लाने वाले ये युवा लाखों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं। इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे युवा भी नई तकनीक से खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
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इसके बाद बैंक व नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड से सब्सिडी लेकर पॉली हाउस लगाया। बीज रहित खीरे का बीज पोलैंड से मंगाया। उन्होंने बताया कि 35 दिन के भीतर एक फसल तैयार हो जाती है। होटलों से संपर्क करके वह उपज की सीधी बिक्री भी कर रहे हैं। इससे अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। उन्होंने बताया कि खेती से वह साल में सात से आठ लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। दादाजी भी अपनी पारंपरिक खेती छोड़कर मेरे काम में शामिल होने लगे हैं।
राजकुमार ने लगाए पॉली हाउस
वहीं, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में एक समय पर काम करने वाले युवा किसान राजकुमार ने भी कई विश्वविद्यालय की नौकरी छोड़ खेती शुरू की। वह बताते हैं कि उन्होंने भाइयों के साथ मिलकर अब तक चार पॉली हाउस लगाए हैं। यहां वह लाल व पीली शिमला मिर्च के साथ ही खीरा भी उगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में काम करने के दौरान पौधों की देखभाल, कीड़ों से बचाव का प्रशिक्षण मिला। इसका फायदा अब मिलता है। इजरायली ड्रिप इरिगेशन तकनीक से सिंचाई करके वह पानी की बचत भी कर रहे हैं। लागत भी घटी है।
लाल बहादुर ने स्थापित की मशरूम के बीज की प्रयोगशाला
फरीदपुर के गांव किर्सुरा के रहने वाले लाल बहादुर कई वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे पहले वह कई नौकरियां भी कर चुके हैं। वह बताते हैं कि पहले हरियाणा व पंजाब के एक इंस्ट्रक्टर को बुलाकर ट्रेनिंग ली। बीज भी बाहर से मंगाया। करीब दो साल पहले मशरूम के बीज बनाने के लिए प्रयोगशाला स्थापित की। अब वह बीज का निर्यात भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.5 टन मशरूम की पैदावार हो रही है। इससे करीब 25 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
