Bareilly News: कच्ची उम्र में फेरे... फिर मातृत्व का जोखिम, अब अस्पताल का चक्कर लगा रही विवाहिताएं
बरेली में कम उम्र में शादी से विवाहिताओं में एनीमिया और प्रसव संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। महिला अस्पताल में मंगलवार को ऐसे छह मामले सामने आए। जिनमें 19 से 20 वर्ष की ये विवाहिताएं तीसरी या चौथी बार गर्भवती हैं।
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बरेली में पढ़ाई की उम्र में फेरे लेकर कई लड़कियां अस्पतालों के चक्कर लगा रही हैं। महिला अस्पताल में मंगलवार को ऐसे छह मामले सामने आए। 19 से 20 वर्ष की ये विवाहिताएं तीसरी या चौथी बार गर्भवती हैं। ऐसे मामलों ने सिर्फ मातृ स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि बाल विवाह रोकने के सरकारी प्रयासों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में गर्भधारण से एनीमिया और प्रसव संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
महिला चिकित्सक डॉ. शशि ने बताया कि अस्पताल आने वाली हर तीसरी गर्भवती एनीमिया (रक्ताल्पता) से पीड़ित है। आंकड़ों के अनुसार हर माह करीब 240 महिलाओं में से 80 महिलाएं जांच में एनीमिक पाई जाती हैं। इनकी उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच होती है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों से प्रसव के बाद प्रत्येक माह करीब 35 महिलाएं पोस्टपार्टम हैमरेज (पीपीएच) की समस्या के साथ उपचार के लिए रेफर की जाती हैं। रक्त स्तर तीन या चार प्वाइंट होने से इन महिलाओं को खून चढ़ाना पड़ता है।
कम उम्र में मां बनने के खतरे
अस्पताल की परिवार नियोजन काउंसलर पायल जौहरी ने बताया कि कम उम्र में मां बनने से एनीमिया, प्रसव के बाद पीपीएच, संक्रमण और समय से पहले प्रसव का खतरा अधिक रहता है। नवजात का वजन कम होने के साथ ही मां के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। हर माह दो सौ से अधिक गर्भवतियों की काउंसलिंग की जाती है, जिनमें से अधिकतर की उम्र 18 से 20 साल होती है।
560 अभियान चलाने का दावा, फिर भी नहीं थम रहा बाल विवाह
महिला कल्याण विभाग का दावा है कि बाल विवाह रोकने के लिए तीन वर्षों में 560 अभियान चलाकर 50,560 लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान 124 शिकायतें मिलीं। 76 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि 15 मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई। महिला अस्पताल के आंकड़े महिला कल्याण विभाग के दावों का दम निकालने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, डीपीओ मोनिका राणा का दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में बाल विवाह में कमी आई है। इस वर्ष अब तक प्राप्त 24 शिकायतों में से 14 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि दो पर कानूनी कार्रवाई हुई। आठ शिकायतें गलत भी पाई गईं।
कुंवरपुर बजरिया निवासी 19 वर्षीय युवती सास के साथ एनीमिया का इलाज कराने अस्पताल पहुंची। वर्तमान में वह छह माह की गर्भवती है और दूसरी बार मां बनने जा रही है। उसने बताया कि दो साल पहले ही उसकी शादी हुई है।
केस दो
बहेड़ी निवासी एक अन्य युवती दो बच्चों के साथ एनीमिया का इलाज कराने अस्पताल पहुंची। वर्तमान में युवती की उम्र 19 साल है। उसने बताया कि तीन साल पहले उसकी शादी हुई है और वर्तमान में वह सात माह की गर्भवती है।
केस तीन
कटघर निवासी युवती जिसकी उम्र महज 20 वर्ष है, तीसरे बच्चे को जन्म देने जा रहीं हैं। आठ माह की गर्भवती को जब खून की कमी हुई तो डॉक्टर ने ब्लड ट्रांसमिशन की सलाह दी। पति ने बताया कि अक्सर वह बीमार रहती है।
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने कहा कि अस्पताल में नियमित काउंसलिंग कराई जाती है। समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं, ताकि कम उम्र में गर्भधारण व मातृ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम किए जा सकें।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। पहले की तुलना में काफी कमी आई है। यदि कहीं भी ऐसी समस्या आ रही है तो सूचित करें, विभाग उसका तुरंत संज्ञान लेगा।