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UP: फोटो बताएगी गाय की नस्ल, आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने बनाया एआई पहचान प्लेटफॉर्म

अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Updated Wed, 24 Jun 2026 03:36 PM IST
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सार

बरेली के इज्जतनगर स्थित आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने गाय की नस्ल पहचानने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है। दावा है कि यह मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म फोटो से 99 फीसदी से अधिक सटीकता से नस्ल की पहचान करता है।

Photo to reveal cow breed IVRI scientists develop AI identification platform
डॉ. अयोन तरफदार और डॉ. शीतल शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गाय की नस्ल पहचान में भ्रम दूर करने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्लेटफॉर्म तैयार किया है। जो फोटो के आधार पर गाय की नस्ल 99 फीसदी से अधिक सटीक पहचान में कारगर है। इस तकनीकी से पशुधन प्रबंधन, नस्ल संरक्षण, प्रशिक्षण और फील्ड सर्वेक्षण के कार्यों में मदद मिलेगी।



लाइवस्टॉक प्रोडक्ट्स टेक्नोलॉजी डिविजन के वैज्ञानिक डॉ. अयोन तरफदार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म मूल रूप से प्रशिक्षण, शिक्षण और नस्ल चरित्रीकरण (ब्रीड कैरेक्टराइजेशन) के उद्देश्य से बनाया है। इसमें गाय के चेहरे और शरीर की तस्वीरों का विश्लेषण कर नस्ल की पहचान की जाती है। फिलहाल गिर, साहीवाल, थारपारकर, कांकरेज, हरियाना, वृंदावनी नस्ल को मॉडल में शामिल किया है। इसके लिए मथुरा, करनाल, गुजरात समेत कई राज्यों के फार्मों से जुटाई गई छह नस्ल की गायों की तस्वीरों के आधार पर मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित किया गया।
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डॉ. तरफदार के मुताबिक कई बार फील्ड में नए कर्मचारी या नए पशुपालक किसी पशु की नस्ल की सही पहचान नहीं कर पाते। यह प्लेटफॉर्म फोटो अपलोड करते ही संबंधित नस्ल की जानकारी उपलब्ध करा देगा। इससे नस्ल संरक्षण और दस्तावेजीकरण के कार्यों में भी आसानी होगी।

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महज चार माह में बना प्लेटफॉर्म, एप भी बनाएंगे
डॉ. तरफदार के मुताबिक प्लेटफॉर्म तैयार है पर इसे सार्वजनिक सर्वर पर शुरू नहीं किया है। भविष्य में इसे मोबाइल एप के रूप में भी विकसित कराया जाएगा। जो किसानों, विद्यार्थियों, फील्ड वर्करों के लिए उपयोगी साबित होगा। महज चार माह में डॉ. अयोन तरफदार के साथ डॉ. शीतल शर्मा, डॉ. अभिनव दीक्षित, डॉ. हर्ष, शोधार्थी सत्यम ने प्लेटफॉर्म बनाया है। भविष्य में अन्य भारतीय पशु नस्लों को भी इसमें शामिल करेंगे।

कॉपीराइट लेंगे पर लोगों के लिए मुफ्त
सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. शीतल शर्मा के मुताबिक संबंधित प्लेटफॉर्म का कॉपीराइट लिया जाएगा पर इसका उपयोग कोई भी कर सकेगा। किसानों के लिए यह प्लेटफॉर्म खासा कारगर रहेगा। आईवीआरआई के इंडीजीनियस कैटल ब्रीड आईडेंटीफिकेशन प्लेटफॉर्म पर गाय के चेहरे या सामने से शरीर फोटो अपलोड करते ही नस्ल की सटीकता पता चलेगी। साथ ही, इन गायों की पहचान किस आधार पर की गई, यह भी पता चलेगा।

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