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Bareilly News: डॉक्टरों के नाम पर जिला जेल कर्मियों ने मांगे रुपये, इलाज के अभाव में कैदी की मौत

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 24 Mar 2026 02:33 AM IST
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सार

बरेली जिला जेल के सिपाहियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि मेरठ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती जेल के कैदी के इलाज के नाम पर सिपाहियों ने परिजनों से रुपये मांगे। इलाज के लिए रुपये न देने से सजायाफ्ता कैदी की मौत हो गई।

Prisoner dies after district jail staff demand money in the name of doctors
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार

बरेली के जिला जेल प्रशासन (केंद्रीय कारागार-2) के सिपाहियों पर मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती बंदी का ऑपरेशन कराने के नाम पर साठ हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। इलाज के रुपये न देने से सजायाफ्ता बंदी की मौत हो गई। उसकी पत्नी ने सीएम पोर्टल पर मामले की शिकायत की है।
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शाही थाना क्षेत्र के खरसैनी गांव निवासी ओमकार मौर्य ने बताया कि उनके बहनोई सत्यपाल मौर्य फतेहगंज पश्चिमी के गांव मनकारी के निवासी थे। वह हत्या के मुकदमे में सजायाफ्ता होकर जिला जेल में बंद थे। शनिवार को तबीयत खराब होने पर उनको जिला जेल से बरेली जिला अस्पताल लाया गया। पुलिस ने बहन पुष्पा को सत्यपाल की हालत नाजुक होने की सूचना दी गई। भांजा आकाश जिला अस्पताल पहुंच गया। वहां बताया गया कि इनका ऑपरेशन होना है, इसलिए इनको मेरठ ले जाना पड़ेगा।
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इलाज के लिए मांगे थे 60 हजार रुपये 
बहनोई सत्यपाल को लेकर आकाश के साथ जेल के आरक्षी मेरठ पहुंचे। मेरठ से आकाश ने उन्हें कॉल किया कि पुलिस इलाज के लिए साठ हजार रुपये मांग रही है। बताया जा रहा है बिना रकम दिए इलाज संभव नहीं है। इतनी रकम देने में असमर्थता जताते हुए पुष्पा देवी ने खरसैनी गांव के प्रधान से पुलिसकर्मियों की फोन पर बात कराई। 

फोन पर बताया गया कि रुपये देने के बाद तुरंत ऑपरेशन संभव होगा। हालांकि, पुलिस कर्मचारियों ने बताया कि ये रुपये बाद में अस्पताल द्वारा वापस कर दिए जाएंगे। अगले दिन रविवार होने की मजबूरी बताई। आरोप है कि इलाज के लिए रकम न देने पर सत्यपाल की रविवार दोपहर दो बजे मौत हो गई। पुष्पा देवी की ओर से सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।

जिला जेल के जेलर शैलेश सिंह ने बताया कि सत्यपाल के इलाज को लेकर जेल प्रशासन गंभीर रहा है। उसके निधन के बाद भी जेल प्रशासन ने पांच हजार रुपये की एंबुलेंस करके परिवार की मदद की। आरोप निराधार हैं। 

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